भारत की स्टार पैरा एथलीट दीप्ति जीवांजी ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को गौरवान्वित किया है। जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियन पैरा गेम्स 2026 में दीप्ति ने महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत लिया। उन्होंने 56.36 सेकंड का समय निकालकर नया गेम्स रिकॉर्ड बनाया।
तेलंगाना के वारंगल जिले के कलेड़ा गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर अपनी पहचान बनाने वाली दीप्ति की यह उपलब्धि उनकी मेहनत, निरंतर अभ्यास और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। लगातार दूसरी बार इस स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने भारतीय पैरा एथलेटिक्स में अपनी मजबूत जगह साबित की।
56.36 सेकंड में पूरी की 400 मीटर रेस
एशियन पैरा गेम्स की महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा में दीप्ति जीवांजी ने शुरुआत से ही शानदार गति बनाए रखी। उन्होंने 56.36 सेकंड में फिनिश लाइन पार कर पहला स्थान हासिल किया और प्रतियोगिता का नया गेम्स रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
जापान की नीना कान्नो ने 58.92 सेकंड के साथ रजत पदक जीता, जबकि उनकी हमवतन अकाने काटो 1 मिनट 0.26 सेकंड के समय के साथ कांस्य पदक पर रहीं।
दीप्ति की इस जीत ने भारतीय दल के स्वर्ण पदकों की संख्या में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
कौन हैं दीप्ति जीवांजी?
दीप्ति जीवांजी तेलंगाना के वारंगल जिले के कलेड़ा गांव की रहने वाली भारतीय पैरा एथलीट हैं। उनका परिवार साधारण आर्थिक परिस्थितियों से आता है। उनके माता-पिता ने परिवार चलाने के लिए खेतों में मजदूरी सहित मेहनत-मशक्कत के काम किए।
दीप्ति को बौद्धिक दिव्यांगता है। बचपन में उन्हें अपनी स्थिति के कारण सामाजिक भेदभाव और लोगों की नकारात्मक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। लेकिन परिवार के सहयोग और खेल के प्रति अपने समर्पण के दम पर उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों को पीछे छोड़ दिया।
आज दीप्ति की पहचान उनकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हासिल किए गए पदकों और रिकॉर्ड से होती है। उनकी कहानी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों और सामाजिक बाधाओं के बावजूद अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं।
15 साल की उम्र में कोच ने पहचानी प्रतिभा
दीप्ति के खेल करियर को आगे बढ़ाने में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के कोच एन. रमेश की अहम भूमिका रही। जब दीप्ति लगभग 15 वर्ष की थीं, तब एक राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उनके प्रदर्शन ने कोच का ध्यान आकर्षित किया।
कोच ने उनकी दौड़ने की क्षमता को पहचाना और उन्हें प्रशिक्षण का अवसर दिया। नियमित अभ्यास, तकनीक में सुधार और प्रतियोगिताओं में भागीदारी के जरिए दीप्ति ने अपनी प्रतिभा को निखारा।
साल 2019 में हांगकांग में आयोजित एशियन यूथ चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतना उनके शुरुआती अंतरराष्ट्रीय सफर की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल रहा। इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार बेहतर प्रदर्शन किया।
खेलो इंडिया से विश्व चैंपियन बनने तक का सफर
दीप्ति ने 2020 में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 100 मीटर और 200 मीटर स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इसके बाद उनके करियर में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां जुड़ती गईं।
साल 2023 में आयोजित एशियन पैरा गेम्स में उन्होंने महिलाओं की 400 मीटर T20 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।
उस प्रतियोगिता में भी उन्होंने गेम्स रिकॉर्ड और एशियाई रिकॉर्ड बनाया था।
मई 2024 में विश्व पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप में दीप्ति ने 400 मीटर T20 स्पर्धा में
55.07 सेकंड का समय दर्ज करते हुए स्वर्ण पदक जीता और विश्व रिकॉर्ड बनाया।
इसके बाद पेरिस पैरालंपिक 2024 में उन्होंने कांस्य पदक हासिल किया।
इन उपलब्धियों ने उन्हें भारत की प्रमुख पैरा एथलीटों में शामिल कर दिया।
क्या है 400 मीटर T20 श्रेणी?
पैरा एथलेटिक्स में T20 श्रेणी बौद्धिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ियों के लिए निर्धारित होती है।
इस श्रेणी में खिलाड़ी निर्धारित वर्गीकरण नियमों के अनुसार प्रतिस्पर्धा करते हैं।
400 मीटर दौड़ में खिलाड़ियों को गति के साथ-साथ अपनी ऊर्जा का सही उपयोग,
दौड़ की लय और अंतिम चरण में तेजी बनाए रखनी होती है।
दीप्ति ने इस स्पर्धा में लगातार बेहतर प्रदर्शन करके अपनी क्षमता साबित की है।
उनका नया गेम्स रिकॉर्ड बताता है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में निरंतर अभ्यास और उच्च स्तर की तैयारी कितनी महत्वपूर्ण है।
दीप्ति की सफलता से भारत को नई उम्मीद
दीप्ति जीवांजी की उपलब्धि केवल एक स्वर्ण पदक तक सीमित नहीं है।
उनकी सफलता यह भी दिखाती है कि उचित प्रशिक्षण, अवसर और
सहयोग मिलने पर दिव्यांग खिलाड़ी विश्व स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं।
उनकी यात्रा खेल संस्थानों, प्रशिक्षकों और परिवारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि
प्रतिभा को पहचानकर उसे सही दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है।
समाज में दिव्यांगता को लेकर मौजूद पूर्वाग्रहों को दूर करना और
खिलाड़ियों को समान अवसर देना खेल जगत को अधिक मजबूत बना सकता है।
निष्कर्ष
एशियन पैरा गेम्स 2026 में दीप्ति जीवांजी का स्वर्ण पदक और 56.36 सेकंड का
गेम्स रिकॉर्ड भारत के लिए गर्व का क्षण है। तेलंगाना के एक छोटे से गांव से निकलकर विश्व चैंपियन और
पैरालंपिक पदक विजेता बनने तक का उनका सफर संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है।
दीप्ति ने एक बार फिर साबित किया कि सही अवसर और निरंतर प्रयास से
बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। उनका प्रदर्शन आने वाली पीढ़ी के
खिलाड़ियों को आगे बढ़ने और देश के लिए पदक जीतने की प्रेरणा देता रहेगा।
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