राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान में विजयादशमी उत्सव आयोजित किया। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष के समापन कार्यक्रमों का हिस्सा रहा। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पारंपरिक शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की।
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संघ के पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अतिथियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान संगठन की सौ वर्षों की यात्रा, सामाजिक गतिविधियों और भविष्य की प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया गया।
नागपुर में शताब्दी वर्ष का विशेष आयोजन
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने विजयादशमी के अवसर पर की थी। इसी परंपरा के तहत संघ हर साल विजयादशमी उत्सव आयोजित करता है।
वर्ष 2026 का कार्यक्रम इसलिए विशेष रहा क्योंकि यह संगठन के शताब्दी वर्ष के समापन से जुड़ा था। कार्यक्रम में शस्त्र पूजन और संघ संस्थापक को श्रद्धांजलि देने के साथ संगठन की विचारधारा, सामाजिक संपर्क और आगामी योजनाओं पर भी चर्चा हुई।
मोहन भागवत ने शस्त्र पूजन किया
उत्सव के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पारंपरिक शस्त्र पूजन किया। संघ में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति, अनुशासन और कर्तव्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
कार्यक्रम से पहले भागवत ने स्मृति मंदिर में डॉ. हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। आयोजन में स्वयंसेवकों की भागीदारी और संगठन की पारंपरिक गतिविधियां प्रमुख आकर्षण रहीं।
संबोधन में सामाजिक एकता और स्वदेशी पर जोर
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में भारत की विविधता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश में अलग-अलग भाषा, क्षेत्र, खानपान और परंपराओं के बावजूद आपसी सम्मान और अपनापन एकता का आधार होना चाहिए।
उन्होंने स्वदेशी की भावना और भारतीय समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की बात भी रखी। संबोधन में तकनीक और विज्ञान की उपयोगिता स्वीकार करते हुए उनके विवेकपूर्ण इस्तेमाल की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भागवत ने युवाओं के सामने नशे की समस्या, डिजिटल माध्यमों से मिलने वाली सामग्री और सही-गलत में अंतर करने की क्षमता जैसे विषयों को भी महत्वपूर्ण बताया।
संघ के पंच परिवर्तन की पहल
शताब्दी वर्ष के दौरान संघ ने समाज में पांच प्रमुख बदलावों को प्रोत्साहित करने की पहल की। इन्हें ‘पंच परिवर्तन’ कहा जाता है।
इन पांच विषयों में शामिल हैं:
- सामाजिक समरसता: समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सम्मान, सहयोग और सद्भाव बढ़ाना।
- कुटुंब प्रबोधन: परिवार में संवाद, संस्कार और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना।
- पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार को प्रोत्साहित करना।
- स्व बोध और स्वदेशी: अपनी सांस्कृतिक पहचान के प्रति जागरूकता तथा स्वदेशी व्यवहार को बढ़ावा देना।
- नागरिक अनुशासन: नागरिक कर्तव्यों, जिम्मेदारी और सामाजिक नियमों के पालन पर जोर देना।
भागवत के अनुसार, इन पहलों को केवल किसी एक वर्ष तक सीमित रखने के बजाय दैनिक जीवन और सामाजिक व्यवहार का हिस्सा बनाने की जरूरत है।
शताब्दी वर्ष में करोड़ों घरों तक संपर्क का दावा
संघ प्रमुख के संबोधन में शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यक्रमों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए। संघ की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, संपर्क अभियान के तहत 4,61,527 गांवों और 41,076 शहरी बस्तियों में लगभग 10.19 करोड़ घरों तक संपर्क किया गया।
इसके अतिरिक्त, 1,117 जिलों में प्रबुद्ध नागरिक गोष्ठियां आयोजित किए जाने और
उनमें 4,26,497 लोगों की भागीदारी का उल्लेख किया गया। सद्भावना बैठकों,
हिंदू सम्मेलनों और युवा सम्मेलनों के आयोजन की जानकारी भी दी गई।
ये आंकड़े संघ की ओर से प्रस्तुत किए गए हैं। इनके आधार पर संगठन ने शताब्दी वर्ष में
अपने सामाजिक संपर्क और जनभागीदारी के विस्तार को रेखांकित किया।
समाज की भागीदारी से समस्याओं के समाधान पर जोर
अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि सामाजिक समस्याओं के समाधान में सरकार और आंदोलनों के
साथ-साथ समाज की सक्रिय भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यावरण और
सामाजिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मिलकर काम करने की जरूरत बताई।
उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में मतभेद होने के बावजूद बातचीत, संयम और
संवैधानिक मर्यादाओं का ध्यान रखना चाहिए। सामाजिक सद्भाव बनाए रखना
किसी भी बड़े और विविधतापूर्ण समाज के लिए आवश्यक है।
शताब्दी के बाद संघ की आगे की दिशा
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों के समापन के साथ संघ ने सामाजिक संपर्क, स्वयंसेवकों की
भागीदारी और पंच परिवर्तन की पहलों को आगे बढ़ाने की दिशा पर जोर दिया।
संगठन के अनुसार, इन पहलों का उद्देश्य सामाजिक जिम्मेदारी, स्वावलंबन, पर्यावरण के प्रति
जागरूकता और नागरिक अनुशासन को दैनिक जीवन में मजबूत करना है। आने वाले समय में
इन गतिविधियों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जाएगा।
निष्कर्ष
नागपुर में आयोजित विजयादशमी उत्सव RSS के शताब्दी वर्ष के समापन का महत्वपूर्ण अवसर रहा।
मोहन भागवत के शस्त्र पूजन, संघ संस्थापक को श्रद्धांजलि और संबोधन में सामाजिक एकता,
स्वदेशी, पर्यावरण तथा नागरिक अनुशासन जैसे विषय प्रमुख रहे।
संघ की सौ वर्षों की यात्रा के बाद अब उसकी घोषित प्राथमिकताओं में पंच परिवर्तन की पहल और
सामाजिक भागीदारी को आगे बढ़ाना शामिल है। इन प्रयासों का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में
उनके क्रियान्वयन और समाज की भागीदारी से आंका जा सकेगा।
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