रोज 100 ग्राम अतिरिक्त अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से दिल का जोखिम बढ़ा

परिचय

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड को लेकर सामने आए नए बड़े अध्ययन ने स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ाई है। 51 संभावित कोहोर्ट अध्ययनों और करीब 88 लाख वयस्कों के आंकड़ों के विश्लेषण में रोजाना अतिरिक्त 100 ग्राम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने का संबंध हृदय संबंधी घटनाओं के 14% अधिक जोखिम से पाया गया।

मुख्य खबर

88 लाख से ज्यादा लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड यानी ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें औद्योगिक स्तर पर काफी ज्यादा प्रोसेस किया जाता है, आज की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन चुके हैं। पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय, कुछ तरह के प्रोसेस्ड मीट, तैयार भोजन और कई पैकेज्ड खाद्य पदार्थ इसके उदाहरण हो सकते हैं। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि इन खाद्य पदार्थों की मात्रा बढ़ने के साथ अलग-अलग गंभीर बीमारियों का जोखिम किस तरह बदलता है।

22 सितंबर 2026 को प्रकाशित इस डोज-रिस्पॉन्स मेटा-विश्लेषण में 51 संभावित कोहोर्ट अध्ययनों को शामिल किया गया। इन अध्ययनों में कुल 8,819,894 वयस्क शामिल थे। प्रतिभागियों से भोजन की जानकारी फूड फ्रिक्वेंसी प्रश्नावली, 24 घंटे के डाइट रिकॉर्ड या अन्य आहार संबंधी तरीकों से जुटाई गई थी। अलग-अलग अध्ययनों में फॉलो-अप अवधि 2 से 32 वर्ष तक रही।

रोज 100 ग्राम अतिरिक्त सेवन का क्या असर?

अध्ययन के डोज-रिस्पॉन्स विश्लेषण में पाया गया कि रोजाना अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा में प्रत्येक अतिरिक्त 100 ग्राम बढ़ोतरी हृदय संबंधी घटनाओं के 14% अधिक जोखिम से जुड़ी थी। इसी मात्रा की बढ़ोतरी कैंसर के 4%, सभी कारणों से मृत्यु के 3% और मेटाबोलिक सिंड्रोम या डायबिटीज के 2% अधिक जोखिम से भी जुड़ी पाई गई।

हालांकि, इन आंकड़ों को इस तरह नहीं समझना चाहिए कि 100 ग्राम खाना खाने से किसी व्यक्ति को निश्चित रूप से हृदय रोग हो जाएगा। यह अध्ययन मुख्य रूप से पहले किए गए अवलोकनात्मक अध्ययनों के आंकड़ों का मेटा-विश्लेषण है। शोधकर्ताओं ने भी माना कि भोजन की जानकारी प्रतिभागियों द्वारा दी गई थी और अलग-अलग अध्ययनों में भोजन के आकलन तथा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की श्रेणी तय करने के तरीकों में अंतर था। इसलिए यह संबंध बताता है, सीधे कारण और प्रभाव को साबित नहीं करता।

किन स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा पाया गया जोखिम?

पूरे विश्लेषण में अधिक अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड सेवन का संबंध कई स्वास्थ्य समस्याओं से पाया गया। अधिक सेवन करने वाले समूह में हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम 24%, कैंसर का 12%, अधिक वजन या मोटापे का 23%, मेटाबोलिक सिंड्रोम या डायबिटीज का 24%, अवसाद या चिंता का 27%, पाचन संबंधी बीमारियों का 31% और सभी कारणों से मृत्यु का 18% अधिक जोखिम देखा गया।

शोधकर्ताओं के अनुसार, अत्यधिक प्रोसेसिंग के दौरान बनने वाले कुछ यौगिक और कई एडिटिव्स स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकते हैं।

प्रयोगशाला अध्ययनों में आंतों के माइक्रोबायोम, सूजन और इंसुलिन प्रतिरोध पर संभावित प्रभावों की ओर भी संकेत मिला है।

हालांकि, इन संभावित जैविक प्रक्रियाओं को पूरी तरह समझने के लिए अभी और शोध की आवश्यकता है।

डाइट में किन चीजों पर ध्यान देना जरूरी?

अध्ययन के निष्कर्षों के बीच विशेषज्ञों का मुख्य संदेश यह है कि भोजन की गुणवत्ता और संतुलित आहार पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। रोजमर्रा के भोजन में ताजे फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, मेवे और कम प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना तथा अत्यधिक पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड विकल्पों की मात्रा कम करना व्यावहारिक कदम हो सकता है।

हालांकि, सभी अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का पोषण प्रभाव एक जैसा नहीं माना जा सकता है।

वैज्ञानिक साहित्य में इस बात पर भी चर्चा है कि NOVA जैसी श्रेणी भोजन के पोषण मूल्य के बजाय मुख्य रूप से उसके प्रोसेसिंग स्तर को देखती है।भविष्य के अध्ययनों में अलग-अलग खाद्य पदार्थों, उनके पोषक तत्वों और सेवन की मात्रा का अधिक बारीकी से मूल्यांकन जरूरी माना जा रहा है।

88 लाख से ज्यादा लोगों पर हुआ अध्ययन।                     रोज 100 ग्राम अतिरिक्त सेवन से 14% अधिक हृदय जोखिम।                                                               अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य चिंताएं।        अध्ययन की सीमाएं और जरूरी सावधानी

Facts/Details

अध्ययन में 51 संभावित कोहोर्ट अध्ययन शामिल किए गए।

कुल 8,819,894 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण हुआ।

रोज अतिरिक्त 100 ग्राम UPF से हृदय संबंधी घटनाओं का जोखिम 14% अधिक जुड़ा पाया गया।

इसी मात्रा से कैंसर का जोखिम 4% और सभी कारणों से मृत्यु का जोखिम 3% अधिक जुड़ा था।

अध्ययन 22 सितंबर 2026 को प्रकाशित हुआ।

विस्तार

शोधकर्ताओं के अनुसार, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम करना और उसकी जगह कम प्रोसेस किए गए खाद्य पदार्थों को शामिल करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए प्रासंगिक हो सकता है।

हालांकि, अध्ययन के निष्कर्षों को कारण-परिणाम के अंतिम प्रमाण के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

FAQ

Q1. अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड क्या है?

ऐसे खाद्य पदार्थ जिन्हें औद्योगिक प्रक्रिया से काफी अधिक तैयार किया जाता है और जिनमें कई एडिटिव्स या औद्योगिक सामग्री का इस्तेमाल हो सकता है।

Q2. रोज 100 ग्राम अतिरिक्त UPF खाने से कितना जोखिम बढ़ा?

अध्ययन में हृदय संबंधी घटनाओं के जोखिम से 14% अधिक संबंध पाया गया।

Q3. क्या इससे निश्चित रूप से हृदय रोग होता है?

नहीं। यह मेटा-विश्लेषण मुख्य रूप से अवलोकनात्मक अध्ययनों पर आधारित है, इसलिए इससे सीधे कारण-परिणाम साबित नहीं होता।

Q4. किन चीजों को कम किया जा सकता है?

अत्यधिक पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और अत्यधिक प्रोसेस्ड तैयार खाद्य पदार्थों की मात्रा सीमित की जा सकती है।

Q5. क्या सभी प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ समान हैं?

नहीं। खाद्य पदार्थों की प्रोसेसिंग, पोषण संरचना और सेवन की मात्रा अलग-अलग होती है।

नए बड़े मेटा-विश्लेषण ने अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंध को फिर रेखांकित किया है।

रोजाना अतिरिक्त 100 ग्राम सेवन हृदय संबंधी घटनाओं के 14% अधिक जोखिम से जुड़ा पाया गया है।

हालांकि, निष्कर्षों को सावधानी से समझना और संतुलित आहार पर ध्यान देना जरूरी है।