परिचय
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर और निफ्टी 383.70 अंक टूटकर 23,063.10 पर बंद हुआ। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, महंगे कच्चे तेल और वित्तीय शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया।
मुख्य खबर
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान निवेशकों के बीच वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी, जिसका असर घरेलू बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दिया। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी करीब 1.67 प्रतिशत गिरकर 73,580.54 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 383.70 अंक यानी करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 23,063.10 अंक पर बंद हुआ।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से बढ़ी चिंता
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में तेज वृद्धि रही। अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत के ऊपर पहुंच गई, जिससे वैश्विक निवेशकों के बीच ब्याज दरों और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की आकर्षकता बढ़ सकती है, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बन सकता है।
महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई परेशानी
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भारी बिकवाली
बाजार की गिरावट में बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों की बिकवाली का भी बड़ा योगदान रहा। सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 29 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि एक शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे।
ब्रॉडर मार्केट में भी दबाव दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 में करीब 2.3 प्रतिशत और स्मॉलकैप 100 में 1.5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बीएसई पर भी गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों से काफी अधिक रही। इससे संकेत मिला कि बिकवाली केवल चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही।
निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी
शेयर बाजार में तेज गिरावट के कारण निवेशकों की कुल संपत्ति में भी बड़ी कमी आई। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार गुरुवार की बिकवाली के दौरान भारतीय शेयर बाजार के कुल बाजार पूंजीकरण में करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। विदेशी निवेशकों की ओर से भी शेयरों में करीब 5,027 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली दर्ज की गई, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक शुद्ध खरीदार रहे।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार आगे की दिशा में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और ब्याज दरों से जुड़े संकेत महत्वपूर्ण रहेंगे। ऐसे माहौल में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि किसी एक कारोबारी दिन की गिरावट से आगे की बाजार दिशा निश्चित नहीं होती।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से बढ़ी चिंता
महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई परेशानी
बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भारी बिकवाली
निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी
Facts/Details
सेंसेक्स: 73,580.54 अंक
सेंसेक्स गिरावट: 1,247.71 अंक / 1.67%
निफ्टी: 23,063.10 अंक
निफ्टी गिरावट: 383.70 अंक / 1.64%
अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड: 5% से ऊपर
ब्रेंट क्रूड: 102 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में 29 गिरावट में बंद
विदेशी निवेशकों की शुद्ध बिकवाली: करीब ₹5,027 करोड़
विस्तार
बाजार में आई गिरावट को बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, महंगे कच्चे तेल और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। निवेशकों की नजर अब आने वाले वैश्विक आर्थिक संकेतों और घरेलू बाजार में संस्थागत निवेश की दिशा पर रहेगी।
FAQ
Q1. सेंसेक्स कितने अंक गिरा?
सेंसेक्स 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ।
Q2. निफ्टी कितने अंक टूटा?
निफ्टी 383.70 अंक गिरकर 23,063.10 पर बंद हुआ।
Q3. बाजार में गिरावट की प्रमुख वजह क्या रही?
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, महंगा कच्चा तेल और वित्तीय शेयरों में बिकवाली प्रमुख कारण रहे।
Q4. क्या बैंकिंग शेयरों पर भी दबाव रहा?
हां, बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में व्यापक बिकवाली देखी गई।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली।सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 1.6 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही।
आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेत बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।