प्रयागराज में भारी बारिश और लगातार बढ़ते जलस्तर ने शहर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। संगमनगरी के कई इलाकों में भीषण जलभराव की स्थिति बन गई है। जॉर्जटाउन, करेली, गंगानगर, राजरूपपुर और आनंदपुरम समेत कई क्षेत्रों में घरों और सड़कों पर कई फीट तक पानी जमा है। हालात इतने खराब हैं कि स्कूल, अस्पताल, सरकारी दफ्तर, पुलिस थाने और कोर्ट-कचहरी तक जलभराव की चपेट में आ गए हैं।
लगातार बारिश के कारण शहर के नाले और सीवर ओवरफ्लो हो गए हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के घरों में गंदा पानी घुसने से घरेलू सामान खराब हो रहा है। कई जगह बिजली आपूर्ति भी सुरक्षा कारणों से प्रभावित हुई है। दूसरी ओर गंगा और यमुना के जलस्तर में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे नदी किनारे के इलाकों में बाढ़ का खतरा और गहरा गया है।
चार से पांच फीट तक पहुंचा पानी
प्रयागराज के कई इलाकों में जलभराव सामान्य स्थिति से काफी आगे बढ़ गया है। कुछ मोहल्लों में सड़क और गलियों में चार से पांच फीट तक पानी जमा होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में पैदल निकलना तो मुश्किल है ही, दोपहिया और छोटे वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है।
जॉर्जटाउन, निरंजन डॉट पुल, सीएमपी डिग्री कॉलेज डॉट पुल और जाफरी कॉलोनी में हालात विशेष रूप से खराब बताए गए हैं। कई स्थानों पर पानी कमर के ऊपर तक पहुंच गया। जॉर्जटाउन थाना क्षेत्र और आसपास की सड़कों पर भी जलभराव के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी हुई।
स्कूल और अस्पताल भी प्रभावित
भारी जलभराव का सीधा असर रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ा है। स्कूलों में पानी भरने और लगातार बारिश के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कई स्थानों पर स्कूल बंद रहने की स्थिति बनी है। अस्पतालों तक मरीजों और उनके परिजनों के पहुंचने में भी कठिनाई सामने आई है।
इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। जलभराव वाले रास्तों से गुजरना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। घरों से निकलना मुश्किल होने के कारण कई परिवारों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
थाने और सरकारी कार्यालयों में भी घुसा पानी
प्रयागराज में जलभराव की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस थानों और सरकारी कार्यालयों के परिसर तक पानी पहुंच गया। जॉर्जटाउन थाने में भी बारिश का पानी भरने की तस्वीरें सामने आई हैं। नगर निगम परिसर में भी जलभराव दर्ज किया गया।
जब प्रशासनिक कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों तक पानी पहुंच जाता है, तो इसका असर जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है। कर्मचारियों और आम लोगों के लिए कार्यालयों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
कोर्ट परिसर तक पहुंची जलभराव की परेशानी
लगातार बारिश का असर न्यायिक गतिविधियों पर भी पड़ा। जलभराव के कारण अदालत पहुंचने में न्यायाधीशों को भी परेशानी हुई और न्यायिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति बनी। इसी गंभीर जलभराव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है।
हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और नगर निगम से जलभराव की स्थिति को लेकर जवाब मांगा है। अदालत ने अधिकारियों से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए पहले से उचित कदम क्यों नहीं उठाए गए।
करेली में घरों के अंदर घुसा पानी
करेली क्षेत्र के जेके आशियाना कॉलोनी, गड्ढा कॉलोनी और आसपास के इलाकों में भी जलभराव से लोग परेशान हैं। कई घरों में कमर तक पानी पहुंचने की बात सामने आई है। कुछ परिवारों को घर की छतों पर पन्नी लगाकर रात बिताने की नौबत आई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक कई दिनों से घरों में खाना बनाने तक में परेशानी हो रही है। परिवार के सदस्य लगातार घरों से पानी निकालने में जुटे हैं, लेकिन बारिश होने के बाद दोबारा पानी भर जाता है।
घरों का सामान और अनाज हुआ खराब
आनंदपुरम इलाके में सौ से अधिक घरों में घुटनों तक पानी भरे होने की जानकारी सामने आई है। जलभराव के कारण घरों में रखा अनाज खराब हो गया और बच्चों की कॉपी-किताबें भीग गईं। कई परिवारों को अस्थायी रूप से रिश्तेदारों के यहां ठिकाना तलाशना पड़ा।
गंदे पानी और कीचड़ की वजह से घरों में रहना भी मुश्किल हो गया है। पानी कम होने के बाद भी लोगों के सामने घरों की सफाई और खराब हुए सामान को संभालने की बड़ी चुनौती रहेगी।
सांप-बिच्छुओं का भी बढ़ा खतरा
घर और गलियां पानी में डूबने के कारण लोगों को जहरीले जीव-जंतुओं का डर भी सताने लगा है। जलभराव वाले इलाकों में सांप, बिच्छू और अन्य जीवों के निकलने की आशंका बढ़ जाती है। बिजली के करंट का खतरा भी लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
ऐसे हालात में लोगों से पानी में अनावश्यक रूप से जाने से बचने और बिजली के तारों या विद्युत उपकरणों से दूरी बनाए रखने की जरूरत है।
गंगा और यमुना का जलस्तर भी बढ़ा
प्रयागराज में सिर्फ बारिश ही चिंता का कारण नहीं है। गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने भी निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार सुबह आठ बजे से रात आठ बजे के बीच नैनी में यमुना का जलस्तर 79.09 मीटर से बढ़कर 79.35 मीटर पहुंच गया। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 79.95 मीटर से बढ़कर 80.11 मीटर और छतनाग में 78.74 मीटर से बढ़कर 78.92 मीटर दर्ज किया गया।
जलस्तर बढ़ने के साथ नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
घाटों की सीढ़ियां डूबने और तटवर्ती रास्तों पर पानी पहुंचने का खतरा भी बढ़ रहा है।
यातायात व्यवस्था भी प्रभावित
जलभराव के कारण शहर की यातायात व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई सड़कों और
पुलों के नीचे पानी भर जाने से वाहनों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। ऑटो और
ई-रिक्शा की उपलब्धता भी कई क्षेत्रों में प्रभावित हुई।
निरंजन डॉट पुल और सीएमपी डिग्री कॉलेज डॉट पुल जैसे स्थानों पर पानी जमा होने से
लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा।
ट्रेनों के संचालन में भी बदलाव
जलभराव की स्थिति का असर रेल परिचालन पर भी पड़ा। हालात को देखते हुए
रेल प्रशासन ने बनारस की तरफ जाने वाली पैसेंजर और मेमू ट्रेनों का
परिचालन रामबाग के बजाय झूंसी स्टेशन से कराने का फैसला किया।
इससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ सकती है।
जलभराव की स्थिति में रेल और सड़क दोनों मार्गों पर यात्रा से पहले ताजा जानकारी लेना जरूरी हो गया है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
प्रयागराज में मौजूदा स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। एक तरफ लगातार
बारिश से शहर के नाले और सीवर व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर गंगा और
यमुना के जलस्तर में वृद्धि ने स्थिति को और गंभीर बनाया है।
निचले इलाकों में पानी निकालना, लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, बिजली से
जुड़े खतरे को नियंत्रित करना और अस्पतालों जैसी आवश्यक
सेवाओं तक पहुंच बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक चुनौती बन गई है।
हाईकोर्ट ने भी लिया संज्ञान
प्रयागराज में जलभराव की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत ने
जिला मजिस्ट्रेट और नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया कि
निचले इलाकों में जलभराव रोकने के लिए समय रहते प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए।
अदालत ने शहरी विकास एवं नियोजन विभाग के सचिव से भी जलभराव रोकने की
योजनाओं को लेकर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
यह घटनाक्रम बताता है कि शहर में जलभराव अब केवल स्थानीय समस्या नहीं रह गया है,
बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और शहरी नियोजन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
लोगों की बढ़ी परेशानी
प्रयागराज के कई मोहल्लों में लोग बारिश रुकने का इंतजार कर रहे हैं ताकि
पानी धीरे-धीरे कम हो सके। लेकिन जिन इलाकों में घरों के अंदर पानी पहुंच चुका है, वहां लोगों के
सामने तत्काल राहत के साथ-साथ घरों की सफाई और नुकसान की भरपाई की चुनौती भी है।
कई परिवारों के खाद्यान्न, इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी सामग्री खराब होने की
बात सामने आई है। लगातार बारिश होने पर स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
अब राहत और जलनिकासी पर टिकी नजर
प्रयागराज में इस समय सबसे बड़ी जरूरत जलनिकासी व्यवस्था को तेजी से सक्रिय करने और
प्रभावित इलाकों में राहत पहुंचाने की है। निचले इलाकों में पानी निकालने के
साथ-साथ लोगों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासनिक निगरानी भी जरूरी है।
गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे के क्षेत्रों पर विशेष नजर रखना भी
महत्वपूर्ण होगा। आने वाले घंटों में बारिश और
नदियों के जलस्तर में होने वाला बदलाव शहर की स्थिति को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष
प्रयागराज में लगातार बारिश ने शहर की व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में चार से
पांच फीट तक जलभराव, घरों में घुसा पानी, स्कूल-अस्पतालों तक पहुंचने में परेशानी और
पुलिस थानों व सरकारी कार्यालयों में पानी भरने से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
गंगा और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने चिंता और बढ़ा दी है। वहीं जलभराव को लेकर
इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्वतः संज्ञान से यह मामला प्रशासनिक स्तर पर भी गंभीर हो गया है।
अब लोगों की नजर राहत और जलनिकासी व्यवस्था पर है। यदि बारिश का दौर जारी रहता है और
नदियों का जलस्तर भी बढ़ता है, तो निचले इलाकों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
ऐसे में प्रशासन के लिए प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने, जलनिकासी
तेज करने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।
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