गोरखपुर के सीएचसी गोला में ऑक्सीजन प्लांट को पहुंचाया नुकसान, मरीजों की सुविधा प्रभावित, पुलिस ने दर्ज किया केस

राकेश शर्मा की रिपोर्ट

गोरखपुर जनपद के गोला स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में स्थापित पीएसए (Pressure Swing Adsorption) ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट में अज्ञात शरारती तत्वों द्वारा कथित रूप से तोड़फोड़ किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्लांट को नुकसान पहुंचने से ऑक्सीजन आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे मरीजों की चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए गोला पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।

देर रात प्लांट का ताला तोड़कर की गई कथित तोड़फोड़,

सीएचसी गोला के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमरेन्द्र नाथ ठाकुर द्वारा गोला थाने में दी गई तहरीर के अनुसार लगभग एक सप्ताह पहले देर रात अज्ञात लोगों ने ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट का ताला तोड़कर परिसर में प्रवेश किया। इसके बाद प्लांट के विभिन्न उपकरणों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

सुबह अस्पताल कर्मियों ने निरीक्षण के दौरान प्लांट के कई हिस्सों को टूटा हुआ पाया। इसके बाद तत्काल अधिकारियों को सूचना दी गई और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी गई।

ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभावित होने से मरीजों की सुविधा पर असर,

पीएसए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट कोविड-19 महामारी के दौरान अस्पतालों में ऑक्सीजन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए थे। ऐसे में इस महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण को नुकसान पहुंचने की घटना को बेहद गंभीर माना जा रहा है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि समय रहते घटना की जानकारी मिलने के बाद वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने का प्रयास किया गया, ताकि मरीजों के उपचार पर न्यूनतम प्रभाव पड़े। साथ ही प्लांट को हुए तकनीकी नुकसान का आकलन भी कराया जा रहा है।

अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज,

चिकित्सा अधीक्षक की तहरीर के आधार पर गोला पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 324(5) तथा सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 और 4 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की हो रही जांच,

घटना के खुलासे के लिए पुलिस अस्पताल परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा अस्पताल कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।

यदि जांच के दौरान किसी संगठित साजिश या अन्य आपराधिक उद्देश्य की पुष्टि होती है, तो उसी के

अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध,

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट

जैसी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना केवल सरकारी संपत्ति का नुकसान नहीं है,

बल्कि यह सीधे मरीजों की जान से जुड़ा गंभीर मामला है।

ऑक्सीजन प्लांट आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे उपकरणों के साथ

किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या तोड़फोड़ स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित कर सकती है।

इसलिए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई जरूरी है।

तकनीकी जांच के साथ प्लांट को सामान्य करने का प्रयास,

घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों की टीम प्लांट को हुए नुकसान का निरीक्षण कर रही है।

अस्पताल प्रशासन का प्रयास है कि ऑक्सीजन आपूर्ति व्यवस्था को जल्द से

जल्द सामान्य किया जाए ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस ने जल्द खुलासे का जताया भरोसा,

गोला पुलिस का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज,

तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त साक्ष्य मिलेंगे, आरोपियों के

खिलाफ गिरफ्तारी सहित आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष,

गोरखपुर के सीएचसी गोला में पीएसए ऑक्सीजन जनरेटर प्लांट में हुई

कथित तोड़फोड़ ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

यह घटना केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा और

स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़ा संवेदनशील विषय है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और

अस्पताल प्रशासन ऑक्सीजन व्यवस्था को जल्द से जल्द सामान्य करने में जुटा है।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी पर टिकी हुई है।

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