तमिलनाडु के थूथुकुडी में रविवार शाम एक ऐसा दुर्लभ मौसमीय नजारा देखने को मिला जिसने लोगों को हैरान कर दिया। आसमान में धूल और बादलों का एक विशाल घूमता हुआ स्तंभ दिखाई दिया, जिसे देखकर कई लोगों ने इसे टॉरनेडो समझ लिया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए और देखते ही देखते पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार अचानक मौसम बदला, तेज हवाएं चलने लगीं और फिर धूल का एक विशाल घुमावदार स्तंभ आसमान तक उठता दिखाई दिया। कई स्थानों पर तेज हवाओं के कारण दुकानों, टोल प्लाजा और कुछ निजी परिसरों को नुकसान पहुंचने की भी खबरें सामने आई हैं।
क्या यह वास्तव में टॉरनेडो था?
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखकर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे टॉरनेडो बताया, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों ने इस दावे को पूरी तरह सही नहीं माना। भारतीय मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना वास्तविक टॉरनेडो नहीं बल्कि एक शक्तिशाली थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट थी, जो क्यूमुलोनिम्बस बादलों के प्रभाव से उत्पन्न हुई।
विशेषज्ञों ने बताया कि जब तेज गर्जन वाले बादलों के भीतर हवा बहुत तेजी से ऊपर उठती है, तब वह आसपास की धूल और मिट्टी को भी ऊपर खींच लेती है। इसी प्रक्रिया के कारण जमीन से आसमान तक पहुंचने वाला घूमता हुआ धूल का स्तंभ बन जाता है, जो देखने में टॉरनेडो जैसा लगता है।
कैसे बनता है थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट?
क्यूमुलोनिम्बस बादल तेज आंधी, बिजली, भारी बारिश और तेज हवाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन बादलों के भीतर गर्म और नम हवा अत्यधिक गति से ऊपर उठती है। इस ऊपर उठती हुई हवा को अपड्राफ्ट कहा जाता है।
जब अपड्राफ्ट की ताकत बहुत अधिक होती है और आसपास का क्षेत्र धूलभरा या सूखा होता है, तब मिट्टी और धूल भी हवा के साथ ऊपर उठ जाती है। परिणामस्वरूप एक विशाल घूमता हुआ धूल स्तंभ दिखाई देता है, जिसे लोग अक्सर टॉरनेडो समझ लेते हैं।
टॉरनेडो और अपड्राफ्ट में क्या अंतर है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार वास्तविक टॉरनेडो बनने के लिए विशेष प्रकार की वायुमंडलीय परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। इसमें हवा की दिशा और गति में ऊंचाई के साथ तेज बदलाव (विंड शियर) होना जरूरी होता है।
वहीं थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट अपेक्षाकृत कम समय तक रहता है और इसका प्रभाव सीमित क्षेत्र में दिखाई देता है। थूथुकुडी में दिखाई दिया दृश्य इसी श्रेणी का माना जा रहा है। हालांकि कुछ मौसम पर्यवेक्षकों ने इसे दुर्लभ टॉरनेडो जैसी घटना भी बताया है, लेकिन आधिकारिक स्तर पर इसे अपड्राफ्ट से जुड़ी मौसमीय घटना माना गया है।
भारत में इतनी दुर्लभ क्यों हैं ऐसी घटनाएं?
भारत में अमेरिका जैसे शक्तिशाली टॉरनेडो बहुत कम देखने को मिलते हैं। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की भौगोलिक स्थिति और मानसूनी प्रणाली टॉरनेडो बनने के लिए उतनी अनुकूल नहीं होती जितनी अमेरिका के मैदानी इलाकों में होती है।
हालांकि समय-समय पर बंगाल, ओडिशा और कुछ तटीय क्षेत्रों में टॉरनेडो जैसी घटनाएं दर्ज की गई हैं। दक्षिण भारत में ऐसी घटनाएं बेहद दुर्लभ मानी जाती हैं, इसलिए थूथुकुडी का यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल और आश्चर्य का विषय बन गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो
घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गए। वीडियो में धूल और बादलों का
विशाल घूमता हुआ स्तंभ साफ दिखाई दे रहा है। लोगों ने इसे प्रकृति का अद्भुत और डरावना नजारा बताया।
मौसम विशेषज्ञों और मौसम प्रेमियों ने भी वीडियो का विश्लेषण किया और
इस घटना को दक्षिण भारत में देखी गई सबसे दुर्लभ मौसमीय घटनाओं में से एक बताया।
क्या भविष्य में बढ़ सकती हैं ऐसी घटनाएं?
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण चरम मौसमीय
घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। तापमान में वृद्धि, नमी में बदलाव और असामान्य वायुमंडलीय
परिस्थितियां भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि किसी
एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं माना जाता।
निष्कर्ष
तमिलनाडु के थूथुकुडी में दिखाई दिया विशाल बवंडर जैसा दृश्य लोगों के लिए रोमांच और
भय दोनों का कारण बना। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि
यह वास्तविक टॉरनेडो नहीं बल्कि एक शक्तिशाली थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट था।
इसके बावजूद यह घटना भारत में देखे गए सबसे दुर्लभ मौसमीय दृश्यों में से एक मानी जा रही है और
आने वाले दिनों में मौसम विज्ञानियों के अध्ययन का विषय भी बन सकती
1. क्या थूथुकुडी में वास्तव में टॉरनेडो आया था?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह वास्तविक टॉरनेडो नहीं बल्कि थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट से उत्पन्न धूल का स्तंभ था।
2. यह घटना कब हुई?
यह घटना 21 जून 2026 की शाम को तमिलनाडु के थूथुकुडी क्षेत्र में देखी गई।
3. थंडरस्टॉर्म अपड्राफ्ट क्या होता है?
यह तेज गर्जन वाले बादलों के भीतर ऊपर उठने वाली शक्तिशाली हवा होती है,
जो धूल और मिट्टी को भी ऊपर उठा सकती है।
4. क्या इस घटना से नुकसान हुआ?
रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ दुकानों, टोल प्लाजा और निजी परिसरों को सीमित नुकसान पहुंचा है।
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