झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज, छात्रों ने कहा- अब ‘जेल भरो’ की तैयारी

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ राजधानी रांची में चल रहा प्रदर्शन रविवार को 23वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी अभ्यर्थी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और प्रभावित परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इसी बीच प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम नायक ने कहा है कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

23वें दिन भी जारी रहा छात्रों का प्रदर्शन

JPSC-JSSC से जुड़ी मांगों को लेकर छात्र लंबे समय से रांची में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के बीच छात्र नेता प्रेम नायक ने दावा किया कि रविवार को विरोध प्रदर्शन का 23वां दिन है, जबकि उनकी भूख हड़ताल 13वें दिन में पहुंच चुकी है।

उन्होंने सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाया। प्रेम नायक ने अपनी तबीयत का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी स्थिति खराब है और बुखार भी शुरू हो गया है। उनके मुताबिक इलाज के लिए ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने आंदोलन स्थल छोड़ने से इनकार कर दिया।

‘मुख्यमंत्री आवास घेरने से बेहतर जेल भरो आंदोलन’

आंदोलन के अगले चरण को लेकर भी छात्रों के बीच चर्चा तेज हो गई है। प्रेम नायक ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के बजाय उनके विचार से ‘जेल भरो आंदोलन’ ज्यादा प्रभावी विकल्प हो सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार छात्रों की बात नहीं सुनती है तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जा सकता है। स्कूल और कॉलेज बंद करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किए जाने की बात उन्होंने कही।

हालांकि ये आंदोलनकारियों की ओर से रखे गए प्रस्ताव हैं और इनके क्रियान्वयन को लेकर अंतिम स्थिति अलग हो सकती है।

20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव का ऐलान

JPSC-JSSC सुधार मंच ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की घोषणा की है। छात्रों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने और कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच की मांग शामिल है।

छात्र नेताओं का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि हजारों अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करने के बाद इन परीक्षाओं में शामिल होते हैं। परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने से अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर असमंजस पैदा होता है।

आंदोलन में अब इस्तीफे की मांग भी

प्रदर्शन के दौरान छात्रों की मांगें लगातार राजनीतिक रूप लेती दिखाई दे रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आंदोलनकारी समूह ने अब मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। इसके अलावा 16 अगस्त को विभिन्न जिलों में मुख्यमंत्री और राहुल गांधी के पुतले जलाने का कार्यक्रम घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई है।

इससे साफ है कि आंदोलन अब केवल परीक्षा संबंधी मांगों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की दिशा में भी बढ़ रहा है।

भूख हड़ताल कर रहे छात्रों की स्थिति चिंता का विषय

आंदोलन में भूख हड़ताल भी एक अहम मुद्दा बन गया है। प्रेम नायक के मुताबिक उनकी भूख हड़ताल 13वें दिन में पहुंच चुकी है और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को गंभीरता से नहीं ले रही। दूसरी ओर, प्रशासन के स्तर पर आंदोलनकारियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच बातचीत की संभावना महत्वपूर्ण हो सकती है।

देवेंद्र नाथ महतो को लेकर भी विवाद

आंदोलन से जुड़े नेता देवेंद्र नाथ महतो को लेकर भी विवाद सामने आया है। प्रेम नायक ने दावा किया कि देवेंद्र नाथ महतो को अस्पताल ले जाया गया और उन्हें वापस आंदोलन स्थल पर आने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उनके अनुसार इससे आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

दूसरी ओर, देवेंद्र नाथ महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन सोशल मीडिया पर पुलिस के साथ कथित धक्का-मुक्की का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि वह रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आयोजित ध्वजारोहण और तिरंगा यात्रा में शामिल होना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोका गया।

पहले भी पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ा था तनाव

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन पिछले दिनों उस समय और चर्चा में आया था,

जब रांची में विधानसभा की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान पुलिस ने लाठी,

आंसू गैस और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया था।

उस घटना के बाद आंदोलन और राजनीतिक रूप से भी तेज हुआ।

प्रदर्शनकारी कथित भर्ती अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।

इसके बाद सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार का भरोसा भी दिया गया है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में

पारदर्शिता बढ़ाने और व्यवस्था में सुधार की बात कही है।

सरकार और छात्रों के बीच टकराव बढ़ने की आशंका

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 20 अगस्त से पहले सरकार और

आंदोलनकारी छात्रों के बीच कोई ठोस बातचीत होती है या नहीं। यदि छात्रों की

मांगों पर सहमति नहीं बनती है तो मुख्यमंत्री आवास घेराव और

जेल भरो आंदोलन जैसे कार्यक्रमों के कारण रांची में सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

वहीं, सरकार के सामने भी चुनौती है कि परीक्षा संबंधी शिकायतों का समाधान

किस तरह किया जाए और हजारों अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कैसे कायम किया जाए।

अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा है मामला

सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए भर्ती परीक्षा केवल एक परीक्षा नहीं होती।

इसके पीछे वर्षों की तैयारी, आर्थिक खर्च और

करियर की उम्मीद जुड़ी होती है। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की

कथित अनियमितता सामने आने पर अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ना स्वाभाविक है।

JPSC और JSSC जैसी संस्थाओं से होने वाली भर्तियों में बड़ी संख्या में युवा शामिल होते हैं।

इसलिए छात्रों की मांगों का समाधान केवल तत्काल आंदोलन को रोकने तक सीमित नहीं होना चाहिए,

बल्कि परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना भी जरूरी होगा।

आगे क्या होगा?

फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है और 20 अगस्त को प्रस्तावित मुख्यमंत्री

आवास घेराव पर सभी की नजर है। आंदोलनकारी अपने रुख पर कायम हैं,

जबकि सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता का आश्वासन दिया गया है।

यदि बातचीत के जरिए समाधान नहीं निकलता है तो आंदोलन का अगला चरण कितना बड़ा होगा,

यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का

प्रदर्शन झारखंड की प्रमुख राजनीतिक और रोजगार संबंधी खबरों में शामिल हो गया है।

निष्कर्ष

झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार लंबा होता जा रहा है।

23वें दिन भी प्रदर्शन जारी रहने के बीच अब

‘जेल भरो आंदोलन’ का सुझाव सामने आया है। छात्र JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने,

कथित अनियमितताओं की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की घोषणा ने आंदोलन को नया मोड़ दे दिया है।

अब सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच बातचीत इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।

यदि जल्द समाधान नहीं निकलता है तो

आने वाले दिनों में प्रदर्शन और अधिक व्यापक होने की संभावना है।

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