गोरखपुर: एसजेपीयू व एएचटी की मासिक समीक्षा बैठक,-प्रतिशत रिपोर्टिंग और बच्चों की पहचान गोपनीय रखने पर जोर

गोरखपुर में आयोजित हुई महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक

बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम तथा किशोर न्याय प्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सोमवार को रिजर्व पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) एवं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHT) की मासिक समीक्षा एवं समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पुलिस अधीक्षक अपराध सुधीर जायसवाल ने की। इस दौरान जिले के सभी थाना प्रभारी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी (CWPO), विवेचक तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया और बच्चों की सुरक्षा एवं बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की।

बच्चों की पहचान सार्वजनिक न करने के दिए गए सख्त निर्देश

बैठक में किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा-74 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी ऐसे बच्चे की पहचान, फोटो, वीडियो, नाम, पता अथवा अन्य व्यक्तिगत जानकारी किसी भी माध्यम से सार्वजनिक न की जाए, जो किसी भी मामले में कानून की प्रक्रिया से जुड़ा हो।

पुलिस अधीक्षक अपराध ने कहा कि बच्चों की पहचान उजागर करना कानून का उल्लंघन है और ऐसा करने वाले संबंधित व्यक्ति या अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने सभी अधिकारियों को इस संबंध में पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।

पॉक्सो मामलों में शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने पर जोर

बैठक में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए पुलिस अधीक्षक अपराध ने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देशित किया कि बच्चों के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के यौन अपराध की सूचना मिलने पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और प्रत्येक मामले में शत-प्रतिशत रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों को कानून के अनुसार सभी आवश्यक सहायता, सुरक्षा और परामर्श उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी मामलों की निष्पक्ष, संवेदनशील और समयबद्ध विवेचना सुनिश्चित की जाए, ताकि दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई हो सके और पीड़ित बच्चों को शीघ्र न्याय मिल सके।

मानव तस्करी रोकने के लिए विभागीय समन्वय बढ़ाने के निर्देश

बैठक में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHT) की कार्यप्रणाली की भी विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मानव तस्करी की रोकथाम के लिए पुलिस, श्रम विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।

संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निगरानी, संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई, लापता बच्चों की शीघ्र खोज तथा बचाव एवं पुनर्वास की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारियों पर हुई चर्चा

बैठक के दौरान बाल कल्याण पुलिस अधिकारियों (CWPO) की भूमिका और जिम्मेदारियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि बच्चों से जुड़े मामलों में पूरी संवेदनशीलता के

साथ कार्रवाई करें तथा उनके अधिकारों और सम्मान की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

साथ ही यह भी कहा गया कि प्रत्येक मामले में कानून के निर्धारित प्रावधानों का पालन

सुनिश्चित किया जाए और बच्चों को भयमुक्त एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

किशोर न्याय अधिनियम के प्रभावी पालन पर दिया गया जोर

पुलिस अधीक्षक अपराध सुधीर जायसवाल ने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम और

पॉक्सो अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा का सबसे मजबूत माध्यम है।

उन्होंने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित समीक्षा करें, जागरूकता अभियान चलाएं और

यह सुनिश्चित करें कि किसी भी बच्चे के अधिकारों का उल्लंघन न हो।

उन्होंने कहा कि कानून के प्रति संवेदनशील, जवाबदेह और मानवीय दृष्टिकोण

अपनाने वाली पुलिस व्यवस्था ही सुरक्षित समाज की आधारशिला है।

बाल सुरक्षा को मजबूत बनाने पर अधिकारियों का संकल्प

बैठक में उपस्थित अधिकारियों ने बच्चों की सुरक्षा को

सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प दोहराया। सभी संबंधित विभागों ने बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक

प्रभावी बनाने, मानव तस्करी की रोकथाम के लिए समन्वित प्रयास करने तथा

बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानून का पूरी तरह पालन करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

निष्कर्ष

गोरखपुर में आयोजित स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) एवं एंटी

ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHT) की यह मासिक समीक्षा बैठक बच्चों की सुरक्षा, मानव तस्करी की रोकथाम और

पॉक्सो मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई।

बैठक में दिए गए स्पष्ट निर्देशों से बाल संरक्षण तंत्र को और अधिक

मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। बच्चों की पहचान गोपनीय रखना, प्रत्येक मामले में समय पर रिपोर्टिंग करना और

कानून का सख्ती से पालन करना ही सुरक्षित, संवेदनशील और जवाबदेह समाज की पहचान है।

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