पीएम नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से पेट्रोलियम पदार्थों का कम उपयोग करने और सोने की खरीद टालने की अपील के बाद राजनीति गरमा गई है। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि देश में आर्थिक संकट और गहराने की आशंका है तथा सरकार को गरीबों और मेहनतकश लोगों को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
मायावती के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है। विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष वैश्विक परिस्थितियों को जिम्मेदार बता रहा है।
मायावती ने X पर जारी किया बयान
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के खिलाफ जारी तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण ऊर्जा संकट तथा विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील से साफ है कि भारत के सामने सिर्फ पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस का संकट ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी गहराने वाला है। मायावती के अनुसार इसका असर करोड़ों देशवासियों के जीवन पर पड़ रहा है और आगे भी स्थिति गंभीर बनी रह सकती है।
गरीबों को राहत देने की मांग
मायावती ने कहा कि देश की बड़ी आबादी पहले ही कोरोना महामारी के बाद रोजगार और रोजी-रोटी के संकट से जूझ रही है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 करोड़ लोग आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
बसपा प्रमुख ने केंद्र और राज्य सरकारों से गरीब और मेहनतकश परिवारों को राहत देने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे समय में सरकारों को जनता का सहारा बनना चाहिए। उन्होंने इसे जनहित और देशहित में जरूरी कदम बताया।
पीएम मोदी ने क्या की थी अपील?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से पेट्रोलियम पदार्थों के संयमित उपयोग और अनावश्यक खर्च से बचने की अपील की थी। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह अपील की गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने का
सीधा असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर पड़ता है।
राजनीतिक बयानबाजी हुई तेज
मायावती के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल
केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि
वैश्विक संकट के समय देश को संयम और सहयोग की जरूरत है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में महंगाई,
ईंधन कीमतों और आर्थिक हालात को लेकर राजनीति और तेज हो सकती है।
जनता पर बढ़ सकता है असर
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध और तनाव की स्थिति बनी रहती है तो
पेट्रोल-डीजल, गैस और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
इससे आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ने की संभावना है।
हालांकि सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और
ऊर्जा आपूर्ति को संतुलित रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर मायावती की प्रतिक्रिया ने आर्थिक मुद्दों को लेकर
नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। बसपा प्रमुख ने जहां आर्थिक संकट गहराने की आशंका जताई है,
वहीं सरकार वैश्विक परिस्थितियों के बीच जनता से संयम बरतने की अपील कर रही है।
अब सभी की नजर आने वाले समय में महंगाई, ईंधन कीमतों और सरकार के राहत कदमों पर टिकी हुई है।
