मैनाठेर कांड: 15 साल बाद दोषियों को सजा आज संभव, डीआईजी पर हमले का मामला

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के चर्चित मैनाठेर कांड में आज एक अहम मोड़ आने जा रहा है। करीब 15 साल पुराने इस मामले में तत्कालीन डीआईजी पर जानलेवा हमले के दोषी ठहराए गए 16 आरोपियों को आज अदालत सजा सुना सकती है। एडीजे-दो कृष्ण कुमार की अदालत ने 23 मार्च 2026 को सुनवाई पूरी करते हुए सभी आरोपियों को दोषी करार दिया था।

क्या है मैनाठेर कांड?

यह मामला 6 जुलाई 2011 का है, जब मुरादाबाद के मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में पुलिस एक आरोपी की तलाश में दबिश देने पहुंची थी। इसी दौरान आरोपी के परिवार ने धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाकर विरोध शुरू कर दिया।

देखते ही देखते मामला बढ़ गया और लोगों ने मुरादाबाद-संभल रोड पर तीन स्थानों पर जाम लगाकर बवाल शुरू कर दिया।

थाने और पुलिस चौकी में लगाई गई थी आग

स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उग्र भीड़ ने मैनाठेर थाने और डींगरपुर पुलिस चौकी में आग लगा दी। इससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और पुलिस-प्रशासन के सामने हालात नियंत्रण में लाना बड़ी चुनौती बन गया।

डीआईजी पर जानलेवा हमला

घटना की सूचना मिलने पर तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार और डीएम राजशेखर मौके पर पहुंचे। लेकिन हालात बेहद खराब थे। डींगरपुर स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचते ही उग्र भीड़ ने दोनों अधिकारियों को घेर लिया।

बताया जाता है कि इस दौरान डीएम किसी तरह मौके से निकल गए, लेकिन डीआईजी भीड़ में फंस गए। भीड़ ने उन पर हमला कर दिया और उनकी पिस्टल तक छीन ली गई। यह घटना उस समय पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गई थी।

33 नामजद और 300 अज्ञात पर दर्ज हुआ था केस

इस मामले में पीआरओ रवि कुमार ने 33 नामजद और लगभग 300 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।

बाद में जांच के दौरान 25 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।

इनमें से छह आरोपी नाबालिग थे, जिनकी फाइल अलग कोर्ट में भेज दी गई।

वहीं सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है।

16 आरोपी हुए दोषी करार

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 23 मार्च 2026 को

एडीजे-दो कृष्ण कुमार की अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी करार दिया।

अब आज इन सभी दोषियों को सजा सुनाई जाएगी, जिस पर पूरे जिले की नजर टिकी हुई है।

न्याय की लंबी प्रक्रिया के बाद फैसला

करीब डेढ़ दशक तक चले इस मामले में अब न्याय की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

यह केस कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली की मजबूती का भी उदाहरण माना जा रहा है।

इस फैसले से यह संदेश जाएगा कि कानून के खिलाफ हिंसा करने वालों को देर-सवेर सजा जरूर मिलती है।

मैनाठेर कांड उत्तर प्रदेश के उन मामलों में से एक है, जिसने कानून व्यवस्था को चुनौती दी थी।

15 साल बाद दोषियों को सजा मिलना न्याय की जीत के रूप में देखा जा रहा है।

अब सभी की नजर अदालत के अंतिम फैसले पर है, जो इस मामले को पूरी तरह समाप्त करेगा