LIC में हिस्सेदारी बेचने की तैयारी! सरकार जुटा सकती है ₹10,000 करोड़

भारत सरकार एक बार फिर Life Insurance Corporation of India यानी LIC में अपनी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में जुट गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार अगले महीने करीब 2% हिस्सेदारी बेच सकती है, जिससे लगभग ₹10,000 करोड़ जुटाने की संभावना है। इस खबर के सामने आने के बाद शेयर बाजार में LIC के शेयरों में गिरावट भी देखने को मिली।

अगले महीने आ सकता है बड़ा OFS

सूत्रों के अनुसार सरकार जून के अंत या जुलाई की शुरुआत में इस हिस्सेदारी बिक्री की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर सकती है। बताया जा रहा है कि यह बिक्री मुख्य रूप से संस्थागत निवेशकों के लिए लाई जाएगी।

इस प्रक्रिया को DIPAM यानी Department of Investment and Public Asset Management संभाल रहा है। खबर है कि Goldman Sachs, Motilal Oswal, BNP Paribas और IIFL Capital जैसी कंपनियां इस डील को मैनेज कर सकती हैं।

सरकार के पास अब भी 96.5% हिस्सेदारी

वर्तमान में भारत सरकार के पास Life Insurance Corporation of India में लगभग 96.5% हिस्सेदारी है। 2022 में LIC का ऐतिहासिक IPO आया था, जिसमें सरकार ने 3.5% हिस्सेदारी बेचकर करीब ₹21,000 करोड़ जुटाए थे।

अब सरकार को SEBI के न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी नियमों को

पूरा करने के लिए धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी और कम करनी होगी।

शेयर बाजार में दिखा असर

सरकार की संभावित हिस्सेदारी बिक्री की खबर सामने आने के बाद

LIC के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक शेयर करीब 4% तक टूट गए। निवेशकों में

यह चिंता देखी गई कि बड़ी हिस्सेदारी बिक्री से शेयर पर दबाव बढ़ सकता है।

हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय में

सार्वजनिक हिस्सेदारी बढ़ने से शेयर में लिक्विडिटी बेहतर हो सकती है।

क्यों जरूरी है हिस्सेदारी कम करना?

SEBI के नियमों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक हिस्सेदारी बनाए रखना जरूरी है।

LIC को इस नियम को पूरा करने के लिए समय दिया गया है और

सरकार चरणबद्ध तरीके से अपनी हिस्सेदारी घटाने की योजना पर काम कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धीरे-धीरे हिस्सेदारी बेचने से बाजार पर

ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा और सरकार को बेहतर मूल्य भी मिल सकता है।

निवेशकों की नजर बाजार पर

अब निवेशकों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार किस कीमत पर हिस्सेदारी बेचती है और

बाजार इस OFS को कैसे रिस्पॉन्स देता है। यदि बाजार की स्थिति अनुकूल रही तो

यह इस साल के सबसे बड़े सरकारी विनिवेश सौदों में शामिल हो सकता है।

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