राकेश शर्मा की रिपोर्ट
धुरियापार, गोरखपुर | 30 अक्टूबर 202
गोरखपुर के धुरियापार में प्रस्तावित आयुर्वेदिक चिकित्सालय का निर्माण जमीन के सीमांकन और राजस्व रिपोर्ट के इंतजार में अटका हुआ है। ग्रामीणों ने हल्का लेखपाल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए एसडीएम गोला से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
मुख्य समाचार
गोरखपुर। जिले के धुरियापार क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित आयुर्वेदिक चिकित्सालय का निर्माण कार्य जमीन के सीमांकन में देरी के कारण अधर में लटका हुआ है। अस्पताल निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया काफी समय से चल रही है, लेकिन राजस्व विभाग की ओर से सीमांकन और रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इससे क्षेत्र के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, धुरियापार में आयुर्वेदिक चिकित्सालय के भवन निर्माण के लिए पंचायत भवन के बगल में जमीन प्रस्तावित की गई है। इस जमीन को अस्पताल निर्माण के लिए उपलब्ध कराने पर प्रशासक धुरियापार की ओर से सहमति भी दी जा चुकी है। हालांकि, भूमि की स्थिति स्पष्ट करने और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हल्का लेखपाल की रिपोर्ट आवश्यक है। इसी रिपोर्ट के अभाव में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया लंबित बताई जा रही है।
अधिकारियों के निर्देश के बाद भी नहीं हुआ सीमांकन
बताया जा रहा है कि खंड विकास अधिकारी उरुवा ने इस मामले को लेकर उप जिलाधिकारी गोला से कई बार बातचीत की है। इसके बाद उप जिलाधिकारी की ओर से संबंधित हल्का लेखपाल को प्रस्तावित जमीन का सीमांकन कर आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। इसके बावजूद अब तक सीमांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से अस्पताल निर्माण की योजना आगे नहीं बढ़ सकी है।
ग्रामीणों का आरोप है कि हल्का लेखपाल अमित शुक्ला मामले को लगातार टाल रहे हैं। प्रशासक धुरियापार की ओर से भी कई बार कहे जाने के बावजूद सीमांकन और रिपोर्ट देने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन उपलब्ध कराने पर सहमति बन चुकी है और अधिकारियों की ओर से निर्देश भी दिया जा चुका है, तो फिर आवश्यक प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों हो रही है?
भूमि हस्तांतरण के बाद ही आवंटित हो सकेगी निर्माण की धनराशि
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रस्तावित जमीन की सीमांकन रिपोर्ट मिलने के बाद ही भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। इसके बाद उप जिलाधिकारी गोला के हस्ताक्षर से संबंधित औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। भूमि हस्तांतरण होने के बाद क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह की ओर से अस्पताल भवन निर्माण के लिए धनराशि आवंटित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
ऐसे में जमीन का सीमांकन केवल राजस्व विभाग की एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे अस्पताल निर्माण की महत्वपूर्ण कड़ी है। जब तक जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी और संबंधित रिपोर्ट के आधार पर भूमि हस्तांतरण नहीं होगा, तब तक भवन निर्माण की दिशा में ठोस प्रगति होना मुश्किल है।
ग्रामीणों में बढ़ता जा रहा आक्रोश
अस्पताल निर्माण में हो रही देरी को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में काफी आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने की बात कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यवाही।
देरी के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक समय से नहीं पहुंच पा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, धुरियापार क्षेत्र में आयुर्वेदिक चिकित्सालय बनने से आसपास के गांवों के लोगों को उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
इसके लिए जमीन उपलब्ध कराने पर सहमति भी बन चुकी है।
इसके बावजूद सीमांकन की प्रक्रिया लंबित रहना चिंता का विषय है।
लोगों ने उप जिलाधिकारी गोला से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रस्तावित जमीन का जल्द सीमांकन कराया जाए।
साथ ही, यदि जांच में संबंधित कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए,
ताकि अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया में और देरी न हो।
लेखपाल ने क्या कहा?
इस संबंध में हल्का लेखपाल अमित शुक्ला का कहना है कि रिपोर्ट तैयार है और आज उप जिलाधिकारी गोला के हस्ताक्षर भी हो जाएंगे।
वहीं, जमीन की पैमाइश को लेकर उन्होंने कहा कि आदेश हो जाएगा तो पैमाइश भी कर दी जाएगी।
लेखपाल के इस बयान के बाद अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही सीमांकन और भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी होगी। हालांकि, अस्पताल निर्माण का रास्ता कब तक साफ होगा, यह संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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अधिकारियों के निर्देश के बाद भी नहीं हुआ सीमांकन
भूमि हस्तांतरण के बाद ही आवंटित हो सकेगी निर्माण की धनराशि
ग्रामीणों में बढ़ता जा रहा आक्रोश
लेखपाल ने क्या कहा?
Facts/Details:
- परियोजना: धुरियापार आयुर्वेदिक चिकित्सालय भवन निर्माण।
- स्थान: पंचायत भवन के बगल में प्रस्तावित जमीन।
- प्रशासनिक क्षेत्र: उरुवा विकासखंड, गोला तहसील, गोरखपुर।
- मुख्य बाधा: जमीन का सीमांकन और राजस्व रिपोर्ट।
- संबंधित अधिकारी: उप जिलाधिकारी गोला।
- संबंधित कर्मचारी: हल्का लेखपाल अमित शुक्ला।
- निर्माण से संबंधित अधिकारी: क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह।
- ग्रामीणों की मांग: जल्द सीमांकन, भूमि हस्तांतरण और अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाए।
Statement:
हल्का लेखपाल अमित शुक्ला के अनुसार, रिपोर्ट तैयार है और उप जिलाधिकारी गोला के हस्ताक्षर होने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
पैमाइश के संबंध में उनका कहना है कि आदेश होने पर पैमाइश भी कर दी जाएगी।
वहीं, ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर अस्पताल निर्माण का रास्ता साफ कराने की मांग की है।
FAQ:
1. धुरियापार आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण क्यों अटका है?
प्रस्तावित जमीन का सीमांकन और राजस्व रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
2. अस्पताल निर्माण के लिए जमीन कहां प्रस्तावित है?
धुरियापार में पंचायत भवन के बगल की जमीन अस्पताल निर्माण के लिए प्रस्तावित बताई गई है।
3. सीमांकन कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
प्रस्तावित जमीन के सीमांकन और राजस्व रिपोर्ट से संबंधित कार्य हल्का लेखपाल के स्तर पर लंबित बताया जा रहा है।
4. अस्पताल निर्माण के लिए धनराशि कौन आवंटित करेगा?
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. धर्मेंद्र सिंह की ओर से भवन निर्माण के लिए धनराशि आवंटित किए जाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
5. ग्रामीणों ने प्रशासन से क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने एसडीएम गोला से जल्द सीमांकन कराने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
Conclusion:
धुरियापार आयुर्वेदिक चिकित्सालय का निर्माण अब प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्भर है।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द सीमांकन पूरा होगा और क्षेत्र को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी।