कुशीनगर न्यूज: थाईलैंड की रानी ने बुद्ध की लेटी प्रतिमा पर चढ़ाया चीवर, विश्व शांति की कामना की

थाईलैंड की रानी का भावुक कुशीनगर दौरा

कुशीनगर, भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल, आज एक ऐतिहासिक और भावुक पल का साक्षी बना। थाईलैंड की रानी सुजातिनी ने महापरिनिर्वाण मंदिर में भगवान बुद्ध की लेटी प्रतिमा पर स्वयं चीवर चढ़ाया और विश्व शांति की कामना की। इसके बाद रानी अपने शाही दल के साथ रामभार स्तूप पहुंचीं, जहां उन्होंने करीब आधे घंटे से अधिक समय बिताया। यह दौरा थाईलैंड और भारत के बीच बौद्ध सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।

महापरिनिर्वाण मंदिर में चीवर चढ़ाने का पवित्र क्षण

महापरिनिर्वाण मंदिर में रानी सुजातिनी ने गहरी श्रद्धा के साथ भगवान बुद्ध की 6.1 मीटर लंबी लेटी हुई प्रतिमा पर पारंपरिक थाई चीवर अर्पित किया। इस दौरान रानी ने मौनपूर्वक ध्यान लगाया और बुद्ध के महापरिनिर्वाण स्थल पर विश्व शांति, करुणा और अहिंसा की प्रार्थना की। मंदिर परिसर में मौजूद भिक्षु और तीर्थयात्री इस क्षण को भावुकता से देखते रहे।

मंदिर के पुजारी ने बताया कि थाईलैंड की रानी का यह दौरा कुशीनगर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि थाईलैंड में बौद्ध धर्म की गहरी आस्था है और कुशीनगर को बौद्धों का सबसे पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है।

रामभार स्तूप पर स्वागत और करीब आधे घंटे का समय

महापरिनिर्वाण मंदिर से रानी अपने शाही दल के साथ रामभार स्तूप पहुंचीं। यहां एसडीएम कसया डॉ. संतराज सिंह बघेल ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। तहसीलदार कसया धर्मवीर सिंह और राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद रही।

रानी ने रामभार स्तूप परिसर में करीब 30-35 मिनट बिताए। उन्होंने स्तूप का परिक्रमा किया, ध्यान लगाया और बुद्ध के अंतिम उपदेश स्थल पर शांति की प्रार्थना की। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे और परिसर को पूरी तरह सजाया गया था।

कुशीनगर का महत्व और थाईलैंड के साथ संबंध

कुशीनगर वह पवित्र स्थल है जहां भगवान बुद्ध ने 80 वर्ष की आयु में महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।

रामभार स्तूप को बुद्ध के अंतिम संस्कार स्थल के रूप में जाना जाता है।

थाईलैंड में बौद्ध धर्म थेरवाद संप्रदाय का अनुसरण करता है और

कुशीनगर थाई बौद्धों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

थाईलैंड की रानी का यह दौरा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को और गहरा करने वाला है।

पिछले वर्षों में थाईलैंड सरकार ने कुशीनगर में कई बौद्ध मठों और ध्यान केंद्रों को सहयोग दिया है।

स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था

कुशीनगर जिला प्रशासन ने रानी के दौरे के लिए विशेष इंतजाम किए थे।

मंदिर और स्तूप परिसर को फूलों से सजाया गया था।

यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी बल तैनात रहे।

एसडीएम कसया डॉ. संतराज सिंह बघेल ने बताया कि पूरा दौरा शांतिपूर्ण और सफल रहा।

विश्व शांति की प्रार्थना के साथ रानी का संदेश

थाईलैंड की रानी सुजातिनी का कुशीनगर दौरा सिर्फ एक राजकीय यात्रा नहीं,

बल्कि बौद्ध धर्म के प्रति गहरी श्रद्धा और विश्व शांति की कामना का प्रतीक है।

चीवर चढ़ाने और रामभार स्तूप पर ध्यान लगाने का यह क्षण लाखों बौद्ध अनुयायियों के लिए

प्रेरणादायक रहा। कुशीनगर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र साबित हुआ है।

उम्मीद है कि ऐसे दौरे से कुशीनगर का पर्यटन और बौद्ध सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी।