समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को प्रदेश सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए। लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि सरकार की कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई मामलों में सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करने या घटनाओं को सामने लाने के बाद मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों का जिक्र किया और कहा कि श्रावस्ती, बलरामपुर, रायबरेली और संतकबीर नगर में सामने आई घटनाओं को लेकर उन्होंने सरकार से जवाब मांगा है। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है।
वीडियो शेयर करने पर कार्रवाई का लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने श्रावस्ती की एक घटना का उल्लेख करते हुए दावा किया कि एक पूर्व विधायक द्वारा वीडियो साझा किए जाने के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसी तरह उन्होंने बलरामपुर में जगराम पासवान का उदाहरण देते हुए कहा कि वीडियो साझा करने के मामले में उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वीडियो साझा करने पर मुकदमे दर्ज किए जाते रहे तो भविष्य में वीडियो देखने वाले लोगों को भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। यह टिप्पणी अखिलेश यादव का राजनीतिक आरोप है।
कई जिलों की घटनाओं का किया जिक्र
सपा अध्यक्ष ने अपनी प्रेस वार्ता में कई स्थानीय घटनाओं को भी उठाया। उन्होंने रायबरेली में छात्रसभा से जुड़े कार्यक्रम का उल्लेख किया और संतकबीर नगर में पप्पू निषाद पर हुए कथित हमले का मुद्दा उठाया।
अखिलेश यादव ने इन घटनाओं को प्रदेश में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक गतिविधियों से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।
सरकार पर पक्षपात का भी लगाया आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोगों के साथ व्यवहार उनकी जातीय पहचान के आधार पर अलग-अलग तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि प्रभावशाली या सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े लोगों को अलग तरह का व्यवहार मिलता है, जबकि अन्य लोगों पर दबाव बनाया जाता है।
इन आरोपों पर सरकार की ओर से इस बयान के संदर्भ में कोई विस्तृत प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
पहले भी सरकार पर कानूनों के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठा चुके हैं
अखिलेश यादव इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार पर कानूनों के कथित दुरुपयोग और विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के आरोप लगा चुके हैं। 14 सितंबर 2026 को उन्होंने कानूनों के इस्तेमाल और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए थे।
हाल के दिनों में उन्होंने प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक कार्यक्रमों से जुड़े मुद्दों पर भी
सरकार को घेरा है। 10 सितंबर को उन्होंने बुलंदशहर में सपा के कार्यक्रम से
जुड़े हेलीकॉप्टर लैंडिंग की अनुमति के मुद्दे पर सवाल उठाए थे।
महंगाई और रुपये की स्थिति पर भी निशाना
प्रेस वार्ता में अखिलेश यादव ने राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों के अलावा महंगाई और रुपये की
स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि
महंगाई के बीच रुपये की स्थिति पर भी चर्चा होनी चाहिए।
उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव का उदाहरण देते हुए उत्तर प्रदेश में भी
छात्र राजनीति से जुड़े चुनावों को लेकर सवाल उठाया।
पार्टी में नए नेताओं के शामिल होने का किया स्वागत
अखिलेश यादव ने कानपुर देहात के नेता जुनैद के समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर खुशी जताई।
उनके साथ मयंक द्विवेदी और विजय शंखवार के पार्टी में आने का भी उन्होंने उल्लेख किया।
क्या है पूरे विवाद का मुद्दा?
अखिलेश यादव की प्रेस वार्ता का मुख्य फोकस प्रदेश में विपक्षी नेताओं, कार्यकर्ताओं और राजनीतिक
गतिविधियों से जुड़े मामलों पर रहा। उन्होंने सोशल मीडिया वीडियो को लेकर कथित पुलिस कार्रवाई,
अलग-अलग जिलों की घटनाओं और प्रशासनिक फैसलों का हवाला देकर सरकार से जवाब मांगा।
फिलहाल उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। किसी आरोप की
अंतिम पुष्टि संबंधित जांच, आधिकारिक रिकॉर्ड या न्यायिक प्रक्रिया से ही हो सकती है।
निष्कर्ष
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 19 सितंबर 2026 को लखनऊ में
प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा।
उन्होंने वीडियो साझा करने पर मुकदमे, राजनीतिक कार्यक्रमों और
विभिन्न जिलों की घटनाओं का जिक्र किया। साथ ही महंगाई और रुपये की स्थिति पर भी सवाल उठाए।
इन बयानों को राजनीतिक दावों के रूप में देखा जाना चाहिए और संबंधित मामलों में
आधिकारिक पक्ष सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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