वाराणसी, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वाराणसी दौरे के दौरान अपने चुनाव लड़ने को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह 2027 का विधानसभा चुनाव खुद नहीं लड़ेंगे और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासत में नई चर्चा शुरू कर दी है।
मंगलवार, 3 नवंबर को वाराणसी पहुंचे अखिलेश यादव से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह आगामी विधानसभा चुनाव में काशी की किसी सीट से चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने अपने अंदाज में जवाब दिया कि मुख्यमंत्री वह तब बने थे, जब उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। इसलिए वह इस बार भी वही करेंगे जो उनके लिए शुभ होगा।
अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी वह लोकसभा सांसद रहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। इस बार भी लोकसभा से ही सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की बात कही। उनके इस बयान को समाजवादी पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
2027 विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने पर अखिलेश यादव का बयान
वाराणसी में मीडिया से बातचीत के दौरान अखिलेश यादव से सवाल किया गया कि क्या वह 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी सीट से उम्मीदवार बनेंगे? इस पर उन्होंने कहा कि वह विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
उन्होंने अपने पुराने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2012 में भी वह लोकसभा सदस्य रहते हुए मुख्यमंत्री बने थे। इस बार भी वह उसी तरह की राजनीतिक राह अपनाएंगे।
दरअसल, वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बहुमत मिला था। उस समय अखिलेश यादव कन्नौज से लोकसभा सांसद थे। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था और बाद में विधान परिषद के सदस्य बने थे।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने मैनपुरी की करहल सीट से चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कन्नौज से जीत दर्ज की और संसद पहुंचे।
अब 2027 के चुनाव को लेकर उनके ताजा बयान से यह स्पष्ट हुआ है कि वह फिलहाल विधानसभा चुनाव लड़ने के बजाय मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी को राजनीतिक रूप से सामने रख रहे हैं।
वाराणसी में अखिलेश यादव ने BJP सरकार पर साधा निशाना
वाराणसी दौरे के दौरान अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। उन्होंने वाराणसी की शिक्षक और स्नातक विधान परिषद सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की जीत का उल्लेख किया।
उन्होंने इस जीत को काशी की जनता का समर्थन बताते हुए कहा कि बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद मिला है। अखिलेश यादव ने भाजपा की डबल इंजन सरकार पर तंज कसते हुए एमएलसी चुनाव के नतीजों को लेकर भी टिप्पणी की।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपने करीब 200 विधायकों के टिकट काट सकती है। उनके इस बयान को भाजपा के मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और पार्टी के अंदर संभावित चुनावी बदलावों पर राजनीतिक टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है।
अखिलेश यादव ने वाराणसी में भाजपा सरकार की विकास संबंधी घोषणाओं और स्थानीय समस्याओं को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि काशी में विकास के दावों के बावजूद कई बुनियादी मुद्दे अब भी मौजूद हैं।
दालमंडी और मणिकर्णिका घाट का मुद्दा भी उठाया
वाराणसी में बातचीत के दौरान अखिलेश यादव ने दालमंडी क्षेत्र में दुकानों और व्यापारियों से जुड़े मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर जिन व्यापारियों और दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ा है,
उनकी समस्याएं आगामी विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनेंगी।
उन्होंने मणिकर्णिका घाट की ऐतिहासिक विरासत और संस्कृति को लेकर भी
भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि विकास कार्यों के दौरान शहर की
पुरानी सांस्कृतिक पहचान और विरासत का ध्यान नहीं रखा गया।
अखिलेश यादव ने गंगा सफाई, बुनकरों, नाविकों और किसानों से जुड़े विषयों पर भी
सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि
वाराणसी के स्थानीय लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ये सभी मुद्दे उनके राजनीतिक बयान और विपक्ष की ओर से सरकार के
कामकाज पर उठाए गए सवालों का हिस्सा हैं।
समाजवादी सरकार बनने पर वाराणसी में मेट्रो चलाने का वादा
अखिलेश यादव ने वाराणसी के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की।
उन्होंने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो
वाराणसी में मेट्रो रेल परियोजना शुरू कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
वाराणसी जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यातायात और जाम की समस्या लंबे समय से चर्चा का विषय रही है।
ऐसे में मेट्रो परियोजना का मुद्दा
आगामी विधानसभा चुनाव में विकास और शहरी परिवहन से जुड़े वादों में शामिल हो सकता है।
उन्होंने भाजपा सरकार पर काशी को लेकर किए गए विकास के दावों पर भी सवाल उठाए।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की
सरकार बनने पर शहर के विकास के साथ स्थानीय नागरिकों के हितों का भी ध्यान रखा जाएगा।
हालांकि मेट्रो परियोजना को लेकर यह फिलहाल एक राजनीतिक घोषणा है।
इसके लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट, वित्तीय मंजूरी और सरकारी स्वीकृति जैसी प्रक्रियाएं आवश्यक होंगी।
क्या 2027 में मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में सामने रहेंगे अखिलेश यादव?
अखिलेश यादव के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में
एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा हो गया है कि क्या समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा
चुनाव में उन्हें मुख्यमंत्री पद के प्रमुख चेहरे के रूप में पेश करेगी?
समाजवादी पार्टी पहले से ही 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी हुई है।
पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में दोबारा सरकार बनाना है।
अखिलेश यादव लगातार भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और विभिन्न जिलों में
राजनीतिक गतिविधियों के जरिए पार्टी का आधार मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
वहीं, भाजपा की ओर से भी आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियां और
राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने की उम्मीद है।
अखिलेश यादव का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने और सीधे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाला बयान उनके
राजनीतिक आत्मविश्वास और चुनावी रणनीति का संकेत देता है। हालांकि मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की
स्थिति तभी बनेगी, जब चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी को विधानसभा में
आवश्यक बहुमत मिले और विधायक दल उन्हें अपना नेता चुने।
निष्कर्ष: वाराणसी से अखिलेश यादव के इस बयान ने उत्तर प्रदेश की 2027 की चुनावी राजनीति को
नई चर्चा दे दी है। एक ओर उन्होंने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर सीधे
मुख्यमंत्री बनने का दावा भी किया है। अब राजनीतिक नजरें समाजवादी पार्टी की आगामी रणनीति,
भाजपा की तैयारियों और प्रदेश की जनता के चुनावी फैसले पर रहेंगी।
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