भारत-जॉर्डन का एकजुट प्रस्ताव: आतंकवाद के खिलाफ मजबूत साझेदारी का ऐलान

नई दिल्ली। भारत और जॉर्डन ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत साझेदारी का ऐलान किया है। 16 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठक में दोनों देशों ने एकजुट प्रस्ताव पारित किया। अमर उजाला और दैनिक भास्कर की रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत के विदेश मंत्री और जॉर्डन के प्रतिनिधि ने आतंकवाद, रक्षा सहयोग और व्यापार बढ़ाने पर सहमति जताई। यह बैठक मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत की सक्रिय कूटनीति का हिस्सा है। जॉर्डन के साथ भारत के संबंध लंबे समय से मजबूत हैं, और यह प्रस्ताव दोनों देशों की साझा रणनीति को दर्शाता है। बैठक में आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा की गई और संयुक्त अभियान पर जोर दिया गया।

बैठक की मुख्य बातें: आतंकवाद के खिलाफ एकजुट

नई दिल्ली में हुई बैठक में भारत और जॉर्डन ने आतंकवाद के खिलाफ मजबूत साझेदारी का ऐलान किया। मुख्य बिंदु:

  • आतंकवाद के सभी रूपों की निंदा।
  • खुफिया जानकारी साझा करना।
  • संयुक्त सैन्य अभ्यास और ट्रेनिंग।
  • सीमा सुरक्षा और साइबर आतंकवाद पर सहयोग।
  • व्यापार और निवेश बढ़ाने का प्रस्ताव।

भारत ने जॉर्डन को रक्षा उपकरण और तकनीक देने की पेशकश की।

भारत-जॉर्डन संबंध: लंबी साझेदारी

भारत और जॉर्डन के संबंध ऐतिहासिक हैं। मुख्य बातें:

  • जॉर्डन भारत का मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण सहयोगी।
  • व्यापार: फॉस्फेट और पोटाश आयात।
  • रक्षा: संयुक्त अभ्यास।
  • संस्कृति: दोनों देशों में सद्भाव।
  • आतंकवाद: ISIS और अन्य संगठनों के खिलाफ साझा लड़ाई।

यह प्रस्ताव संबंधों को नई ऊंचाई देगा।

आतंकवाद के खिलाफ साझेदारी: वैश्विक महत्व

बैठक में आतंकवाद को वैश्विक खतरा बताया गया। मुख्य सहमति:

  • क्रॉस-बॉर्डर आतंकवाद रोकना।
  • फंडिंग और प्रोपेगैंडा पर रोक।
  • UN में संयुक्त प्रस्ताव।
  • क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सहयोग।

यह साझेदारी मध्य पूर्व शांति में भारत की भूमिका बढ़ाएगी।

व्यापार और निवेश: नई संभावनाएं

बैठक में व्यापार बढ़ाने पर जोर:

  • भारत से IT और फार्मा निर्यात।
  • जॉर्डन से खनिज आयात।
  • निवेश: टूरिज्म और एनर्जी सेक्टर।
  • द्विपक्षीय व्यापार 2 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य।

राजनीतिक और वैश्विक प्रभाव: भारत की मजबूत कूटनीति

यह प्रस्ताव भारत की विदेश नीति को मजबूत करेगा। मुख्य प्रभाव:

  • मध्य पूर्व में भारत की भूमिका।
  • आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक गठबंधन।
  • जॉर्डन के साथ रक्षा सहयोग।
  • क्षेत्रीय स्थिरता।