राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर। बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ने के बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गोला के अधीक्षक डॉ. अमरेन्द्र नाथ ठाकुर ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीएचसी गोला में सर्पदंश के उपचार के लिए एंटीवेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। सोशल मीडिया पर अस्पताल में एंटीवेनम उपलब्ध नहीं होने संबंधी प्रसारित सूचनाओं को उन्होंने भ्रामक बताया है।
अधीक्षक ने लोगों से अपील की कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले तो घबराने के बजाय बिना समय गंवाए उसे नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है और उपचार में देरी मरीज के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
सीएचसी गोला में एंटीवेनम उपलब्ध होने की पुष्टि
सीएचसी गोला के अधीक्षक डॉ. अमरेन्द्र नाथ ठाकुर के अनुसार अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों के उपचार के लिए एंटीवेनम इंजेक्शन उपलब्ध है। उन्होंने लोगों से सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा नहीं करने की अपील की।
उन्होंने बताया कि सर्पदंश के मरीज के अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकीय जांच के बाद आवश्यक उपचार शुरू किया जाता है। यदि मरीज की स्थिति गंभीर होती है तो प्राथमिक उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल गोरखपुर या मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर किया जा सकता है।
दस दिनों में करीब पांच सर्पदंश के मरीज पहुंचे
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पिछले करीब दस दिनों के दौरान सर्पदंश से पीड़ित लगभग पांच मरीज इमरजेंसी में उपचार के लिए पहुंचे। इन मरीजों का अस्पताल में उपचार किया गया और उपचार के बाद उनके स्वस्थ होकर घर लौटने की जानकारी दी गई।
अधीक्षक ने कहा कि बरसात के मौसम में खेतों, झाड़ियों, जलभराव वाले क्षेत्रों, लकड़ी और ईंटों के ढेर तथा अंधेरे स्थानों पर विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।
झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें
सर्पदंश के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात समय पर चिकित्सा सहायता प्राप्त करना है। डॉ. ठाकुर ने लोगों से कहा कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या झोलाछाप उपचार के भरोसे समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
मरीज को जितनी जल्दी संभव हो अस्पताल पहुंचाना चाहिए, ताकि चिकित्सक उसकी स्थिति का आकलन कर आवश्यक उपचार शुरू कर सकें। देरी होने पर मरीज की हालत गंभीर हो सकती है।
102 या 108 एंबुलेंस सेवा की लें मदद
सर्पदंश की स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए 102 या 108 एंबुलेंस सेवा की मदद लेने की अपील की गई है। मरीज को अनावश्यक रूप से चलाने या दौड़ाने के बजाय शांत और स्थिर रखने की कोशिश करनी चाहिए।
मरीज को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। अस्पताल पहुंचने तक उसकी स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्यकर्मियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।
सर्पदंश के बाद दिखाई दे सकते हैं ये लक्षण
सर्पदंश के बाद हर मरीज में एक जैसे लक्षण दिखाई देना जरूरी नहीं है। लक्षण सांप की प्रजाति, विष की मात्रा, काटे जाने की जगह और मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
संभावित लक्षणों में काटे गए स्थान पर सूजन, रक्तस्राव, त्वचा का रंग बदलना, तेज कमजोरी, उल्टी, चक्कर, सांस लेने में परेशानी, निगलने में दिक्कत, पलकें झुकना और अत्यधिक नींद आना शामिल हो सकते हैं।
इनमें से कोई भी गंभीर लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता दिलाना जरूरी है। केवल लक्षण कम होने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
घाव को काटना या चूसना नुकसानदायक हो सकता है
सर्पदंश के बाद घाव पर किसी तरह का घरेलू प्रयोग करने से बचना चाहिए। घाव को काटना, उसमें से विष चूसने का प्रयास करना, घाव को जलाना या उस पर कोई पदार्थ लगाना नुकसानदायक हो सकता है।
इसी तरह हाथ या पैर को रस्सी अथवा कपड़े से बहुत कसकर बांधने से भी बचना चाहिए। मरीज को शांत रखना, उसकी अनावश्यक गतिविधि कम करना और जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए।
बारिश में घरों में भी घुस सकते हैं सांप
बरसात के मौसम में सांप सुरक्षित और सूखे स्थान की तलाश में घरों में भी प्रवेश कर सकते हैं। इसलिए घर के अंधेरे और कम इस्तेमाल होने वाले स्थानों को लेकर सावधानी जरूरी है।
बिस्तर, कपड़े और जूते इस्तेमाल करने से पहले उनकी जांच कर लेनी चाहिए। झाड़ियों, लकड़ी, ईंटों के ढेर, कबाड़ या अंधेरे स्थानों के पास जाते समय पर्याप्त रोशनी या टॉर्च का इस्तेमाल करना चाहिए।
सर्पदंश से बचाव के लिए सावधानी जरूरी
ग्रामीण और खेतिहर क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को बारिश के मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। रात में बिना रोशनी के खेत, झाड़ी या सुनसान स्थान पर जाने से बचना चाहिए।
घर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना और लकड़ी, ईंट तथा कबाड़ को व्यवस्थित तरीके से रखना भी जरूरी है।
जूते और कपड़े पहनने से पहले उन्हें अच्छी तरह जांच लेना उपयोगी सावधानी हो सकती है।
चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी ने भी की अपील
चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी ने भी लोगों से सर्पदंश को लेकर
सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गोला,
बड़हलगंज सहित क्षेत्र के संबंधित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटीवेनम उपलब्ध है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि सांप काटने की स्थिति में सोशल मीडिया पर चल रही
अपुष्ट जानकारी पर भरोसा करने के बजाय तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचें।
अफवाहों के बजाय चिकित्सकीय उपचार को दें प्राथमिकता
विधायक राजेश त्रिपाठी ने कहा कि सर्पदंश जैसी आपात स्थिति में समय
बेहद महत्वपूर्ण होता है। इसलिए झाड़-फूंक या अन्य गैर-चिकित्सकीय उपायों में
समय गंवाने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सकीय उपचार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
उन्होंने लोगों से किसी भी वायरल संदेश को आगे बढ़ाने से पहले
उसकी सत्यता की जांच करने की अपील की, क्योंकि एंटीवेनम उपलब्ध नहीं होने
जैसी गलत सूचना मरीज को समय पर उपचार मिलने में बाधा बन सकती है।
सर्पदंश को लेकर घबराएं नहीं
सांप काटने की घटना के बाद परिवार के लोगों में डर स्वाभाविक है,
लेकिन ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है।
मरीज को शांत रखें, उसकी गतिविधि कम करें और तत्काल अस्पताल पहुंचाएं।
किसी भी घरेलू प्रयोग या झाड़-फूंक में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
करैत, कोबरा और अन्य विषैले सांपों से सावधानी
डॉ. ठाकुर ने बताया कि मैदानी क्षेत्रों में करैत और
कोबरा जैसे विषैले सांप पाए जाते हैं। उन्होंने लोगों को सांप की
पहचान करने के बजाय सर्पदंश की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने पर जोर दिया।
सांप दिखाई देने पर उसे पकड़ने या मारने की कोशिश करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।
सुरक्षित दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी है।
कब तत्काल अस्पताल पहुंचना जरूरी है?
सांप के काटने की आशंका होने पर मरीज को तत्काल चिकित्सा केंद्र ले जाना चाहिए।
विशेष रूप से यदि काटे गए स्थान पर तेजी से सूजन बढ़ रही हो, सांस लेने में परेशानी हो,
उल्टी या चक्कर आ रहे हों, अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो या
मरीज असामान्य रूप से उनींदा हो रहा हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
समय पर अस्पताल पहुंचने से डॉक्टर मरीज की स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक उपचार का निर्णय ले सकते हैं।
सोशल मीडिया की अफवाहों से रहें सावधान
सर्पदंश के मामलों में गलत सूचना विशेष रूप से नुकसानदायक हो सकती है।
अस्पताल में एंटीवेनम उपलब्ध नहीं होने जैसी अफवाह से मरीज को अस्पताल पहुंचाने में देरी हो सकती है।
सीएचसी गोला के अधीक्षक ने ऐसी सूचनाओं को भ्रामक बताया है। इसलिए लोगों को आधिकारिक
स्वास्थ्य विभाग या अस्पताल से पुष्टि किए बिना किसी वायरल संदेश पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
सरकारी अस्पताल पहुंचना सबसे जरूरी
सर्पदंश के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम मरीज को जल्द से जल्द
चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराना है। नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में
डॉक्टर मरीज की स्थिति का आकलन कर आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय कर सकते हैं।
यदि मरीज की स्थिति गंभीर होती है तो उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया जा सकता है।
इसलिए प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंचने में भी अनावश्यक देरी नहीं करनी चाहिए।
निष्कर्ष
बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाओं को देखते हुए लोगों को
विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। सीएचसी गोला के अधीक्षक
डॉ. अमरेन्द्र नाथ ठाकुर के अनुसार अस्पताल में एंटीवेनम उपलब्ध है और
पिछले करीब दस दिनों में उपचार के लिए पहुंचे लगभग पांच सर्पदंश पीड़ितों का इलाज किया गया।
उन्होंने लोगों से झाड़-फूंक, अफवाह और झोलाछाप उपचार से दूर रहने की
अपील की है। सांप के काटने पर मरीज को शांत रखें,
उसकी अनावश्यक गतिविधि कम करें और बिना समय गंवाए अस्पताल पहुंचाएं।
चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी ने भी लोगों से अफवाहों से बचने और सरकारी
अस्पताल में चिकित्सकीय उपचार कराने की अपील की है। बरसात के दौरान सावधानी, जागरूकता और
समय पर चिकित्सा सहायता सर्पदंश की स्थिति में बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है।
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