उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर चर्चा में हैं। वर्ष 2023 बैच के इस अधिकारी ने आईएएस सेवा से तकनीकी त्यागपत्र देकर एक बड़ा संदेश दिया है। उनका कहना है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ना चाहते हैं, भले ही इसके लिए उन्हें अपने पद से पीछे क्यों न हटना पड़े।
क्या होता है तकनीकी त्यागपत्र
तकनीकी त्यागपत्र वह प्रक्रिया होती है, जिसमें कोई अधिकारी एक सरकारी सेवा छोड़कर दूसरी सेवा में जाने के लिए इस्तीफा देता है। इस स्थिति में उसे अपनी पुरानी सेवा में वापस लौटने का विकल्प भी मिलता है।
रिंकू सिंह पहले पीसीएस सेवा में थे, इसलिए उनके पास दो साल के भीतर वापस उसी सेवा में लौटने का विकल्प खुला है। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि एक साल और बढ़ सकती है।
शाहजहांपुर में तीन दिन की तैनाती और बड़ा एक्शन
रिंकू सिंह की शाहजहांपुर में तैनाती महज तीन दिनों के लिए रही, लेकिन इस दौरान उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जिससे प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई।
पुवायां तहसील में एसडीएम के रूप में उन्होंने जमीन की पैमाइश में पारदर्शिता लाने, फर्जी प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
उन्होंने लेखपालों को दो सप्ताह में सरकारी जमीनों की सही रिपोर्ट देने के आदेश दिए और गड़बड़ी मिलने पर आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी।
पारदर्शिता के लिए नए प्रयोग
रिंकू सिंह ने प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई नए कदम उठाए। उन्होंने कर्मचारियों की उपस्थिति और कामकाज की निगरानी के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनवाया और सोशल ऑडिट की व्यवस्था शुरू की।
इसके अलावा भू-नक्शों में सिर्फ क्षेत्रफल ही नहीं, बल्कि सीमाओं की लंबाई दर्ज करने के
निर्देश दिए ताकि जमीन विवादों को रोका जा सके।
खुद को भी माना जिम्मेदार
अपने पत्र में रिंकू सिंह ने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने कुछ मामलों में खुद पर
कठोर कार्रवाई नहीं की, जो उनकी गलती थी। उन्होंने इसे एक नैतिक कमजोरी बताते हुए खुद को जिम्मेदार ठहराया।
यह उनकी कार्यशैली और आत्ममंथन की प्रवृत्ति को दर्शाता है, जो उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती है।
पहले भी झेल चुके हैं हमले
रिंकू सिंह का सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने अपने पत्र में बताया कि समाज कल्याण
विभाग में तैनाती के दौरान उन्हें ईमानदारी से काम करने पर जान से मारने की धमकी मिली थी।
मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान उन पर हमला भी हुआ, जिसमें उन्हें गोलियां लगीं और
वे स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए। इसके बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
सिस्टम से टकराव या बदलाव की कोशिश
रिंकू सिंह के कदम को कुछ लोग सिस्टम से टकराव मान रहे हैं, जबकि कई लोग
इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत आवाज के रूप में देख रहे हैं।
उनके फैसलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सिस्टम
ईमानदार अधिकारियों को काम करने की पूरी आजादी देता है या नहीं।
आगे क्या हो सकता है
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रिंकू सिंह पीसीएस सेवा में वापसी करते हैं या
फिर किसी अन्य तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखते हैं।
उनका मामला प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है।
आईएएस रिंकू सिंह का यह कदम केवल एक इस्तीफा नहीं बल्कि
एक संदेश है। यह संदेश है कि व्यवस्था के भीतर रहकर भी
बदलाव की कोशिश की जा सकती है, लेकिन इसके लिए साहस और ईमानदारी जरूरी है।
उनकी कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सिस्टम के भीतर रहकर बदलाव लाना चाहते हैं।