इंडिगो की मोनोपोली कैसे बनी: एविएशन सेक्टर में 65% हिस्सेदारी, रोजाना 2,200 उड़ानें – ताकत के गलत इस्तेमाल का आरोप, CCI जांच शुरू

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की मोनोपोली पर अब सवाल उठने लगे हैं। कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया (CCI) ने इंडिगो पर ताकत के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए जांच शुरू कर दी है। 13 दिसंबर 2025 को CCI ने इंडिगो की 65% मार्केट शेयर और रोजाना 2,200 उड़ानों पर नजर डाली। आज तक और अमर उजाला की रिपोर्ट्स के अनुसार, इंडिगो की तेज वृद्धि ने अन्य एयरलाइंस को बाजार से बाहर कर दिया है। यह जांच एविएशन सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली हो सकती है। इस ब्लॉग में हम इंडिगो की मोनोपोली कैसे बनी, CCI जांच का कारण, मार्केट शेयर का प्रभाव और यात्रियों पर असर बताएंगे। यदि आप एविएशन या ट्रैवल से जुड़े हैं, तो ये अपडेट्स आपके लिए जरूरी हैं।

*इंडिगो की मोनोपोली कैसे बनी: 2006 से तेज वृद्धि

इंडिगो ने 2006 में अपनी पहली उड़ान भरी थी। आज यह भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन है। मुख्य कारण:

  • कम लागत मॉडल: सिंगल-क्लास कैबिन, कम खर्च।
  • फ्लीट विस्तार: 300+ विमान, रोजाना 2,200 उड़ानें।
  • मार्केट शेयर: 65% घरेलू उड़ानों पर कब्जा।
  • विस्तार: 100+ शहरों में सेवाएं, अंतरराष्ट्रीय रूट बढ़ाए।

इंडिगो ने स्पाइसजेट, गोएयर जैसी एयरलाइंस को पीछे छोड़ दिया। लेकिन CCI का कहना है कि यह मोनोपोली यात्रियों के लिए महंगे किराए का कारण बनी।

CCI जांच का कारण: ताकत के गलत इस्तेमाल का आरोप

CCI ने इंडिगो पर आरोप लगाया कि वह अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल कर रही है। मुख्य बिंदु:

  • किराया निर्धारण में एकाधिकार।
  • अन्य एयरलाइंस को बाजार से बाहर करने की रणनीति।
  • FDTL नियमों का उल्लंघन।
  • यात्रियों पर अतिरिक्त शुल्क।

*CCI ने कहा, “इंडिगो की 65% हिस्सेदारी प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रही है।” जांच में 6 महीने लग सकते हैं।

मार्केट शेयर का प्रभाव: यात्रियों पर बोझ

इंडिगो की मोनोपोली से:

  • किराए 20-30% बढ़े।
  • फ्लाइट कैंसलेशन बढ़े।
  • अन्य एयरलाइंस कमजोर