गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या पूरी तरह श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास में डूबी नजर आई। बुधवार तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही लाखों श्रद्धालु सरयू नदी के विभिन्न घाटों पर स्नान करने के लिए पहुंचने लगे। राम की पैड़ी, नया घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। पवित्र सरयू स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर अपने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूरे शहर में “जय श्रीराम” और वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई देती रही।
सरयू घाटों पर सुबह से उमड़ी भारी भीड़
गुरु पूर्णिमा पर सरयू स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसी कारण सुबह चार बजे से पहले ही श्रद्धालु घाटों पर पहुंचने लगे। उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य अर्जित किया। श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद दान-पुण्य किया तथा संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया। पूरे घाट क्षेत्र में भक्ति गीत, शंखध्वनि और घंटियों की आवाज से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
रामलला के दरबार में विशेष पूजा-अर्चना
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया। भगवान रामलला का पंचामृत अभिषेक, विशेष श्रृंगार, महाआरती और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन संपन्न हुआ। मंदिर परिसर के विभिन्न देवालयों में भी धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति की कामना की। संतों और महंतों ने गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रवचन भी दिए।
गुरु पूर्णिमा पर गुरु वंदना का विशेष महत्व
सनातन धर्म में गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने वेदों का संकलन किया और महाभारत जैसे महान ग्रंथ की रचना की। इसलिए इस दिन गुरु की पूजा, चरण वंदना और आशीर्वाद लेने की परंपरा है। शिष्य अपने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता प्रकट करते हैं। गुरु को ज्ञान का प्रकाश और जीवन का मार्गदर्शक माना जाता है।
सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। पुलिस, पीएसी, ट्रैफिक पुलिस, जल पुलिस और आपदा राहत दलों को घाटों और मंदिरों के आसपास तैनात किया गया। घाटों पर गोताखोरों की विशेष टीम मौजूद रही। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मेडिकल कैंप, पेयजल, मोबाइल शौचालय, बैरिकेडिंग और कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई। प्रशासन लगातार लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने और निर्धारित मार्गों का पालन करने की अपील करता रहा।
आश्रमों और मठों में हुए विशेष कार्यक्रम
अयोध्या के विभिन्न आश्रमों और मठों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अखंड रामचरितमानस पाठ, भजन-कीर्तन, सत्संग, गुरु पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। कई स्थानों पर गुरु दीक्षा कार्यक्रम भी आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। देश के विभिन्न राज्यों से आए संतों और महात्माओं ने
आध्यात्मिक प्रवचन देकर समाज में प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया।
धार्मिक पर्यटन को मिला बढ़ावा
राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या देश का सबसे बड़ा धार्मिक पर्यटन केंद्र बनकर उभरा है।
गुरु पूर्णिमा जैसे बड़े पर्वों पर लाखों श्रद्धालुओं के आगमन से स्थानीय होटल, धर्मशाला, परिवहन, भोजनालय और
व्यापारिक प्रतिष्ठानों में भी काफी रौनक देखने को मिली। स्थानीय व्यापारियों के
अनुसार इस बार श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में अधिक रही।
गुरु पूर्णिमा का संदेश
गुरु पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि यह गुरु के प्रति सम्मान,
ज्ञान के प्रति समर्पण और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संदेश देता है। यह पर्व हमें अपने जीवन में
उन सभी लोगों का सम्मान करना सिखाता है जिन्होंने हमें सही दिशा दिखाई है।
निष्कर्ष
गुरु पूर्णिमा 2026 के अवसर पर अयोध्या में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। सरयू स्नान,
रामलला के दर्शन, विशेष पूजा-अर्चना, गुरु वंदना और संतों के प्रवचनों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
प्रशासन की बेहतर व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण ढंग से धार्मिक
अनुष्ठानों में भाग लिया और गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया।
FAQ
Q1. गुरु पूर्णिमा 2026 कब मनाई गई?
उत्तर: गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026, बुधवार को मनाई गई।
Q2. अयोध्या में गुरु पूर्णिमा पर क्या विशेष हुआ?
उत्तर: लाखों श्रद्धालुओं ने सरयू स्नान किया और रामलला के दर्शन कर विशेष पूजा-अर्चना में भाग लिया।
Q3. गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?
उत्तर: क्योंकि इस दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म माना जाता है, जिन्होंने वेदों का संकलन किया।
Q4. सरयू स्नान का क्या महत्व है?
उत्तर: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन सरयू स्नान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और आध्यात्मिक शांति मिलती है।
Q5. प्रशासन ने कौन-कौन से इंतजाम किए?
उत्तर: सुरक्षा के लिए पुलिस, पीएसी, जल पुलिस, मेडिकल टीम, गोताखोर, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक व्यवस्था की गई
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