मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को गोरखपुर स्थित श्री गोरखनाथ मंदिर में आयोजित भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े कार्यक्रम में भारत के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपरा पर अपने विचार रखे। उन्होंने महमूद गजनवी के सोमनाथ मंदिर पर हमले का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणकारियों का उद्देश्य केवल भारत की संपत्ति हासिल करना नहीं था, बल्कि देश की ज्ञान परंपरा और सनातन विरासत को कमजोर करना भी था।
सोमनाथ मंदिर का उदाहरण देकर कही बात
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में महमूद गजनवी और सोमनाथ मंदिर से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि गजनवी का उद्देश्य केवल धन-संपत्ति लूटना नहीं था, बल्कि भारत की सनातन परंपरा को नुकसान पहुंचाना भी था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मंदिरों और ज्ञान के केंद्रों पर हुए हमलों को भारत की बौद्धिक विरासत को कमजोर करने के व्यापक प्रयास के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
भारत की पहचान ज्ञान परंपरा से रही
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा से अधिक उसकी ज्ञान परंपरा से जुड़ी रही है। उन्होंने भारत को प्राचीन समय में ‘विश्वगुरु’ कहे जाने का उल्लेख करते हुए तक्षशिला और नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों का उदाहरण दिया।
उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन काल से ही शिक्षा, शोध और ज्ञान के अनेक केंद्र विकसित हुए थे। काशी, उज्जैन और कांची जैसे स्थानों का भी उन्होंने ज्ञान एवं सांस्कृतिक परंपरा के केंद्र के रूप में उल्लेख किया।
ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा को प्रमाणों के साथ सामने लाने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विषयों को समझते समय तथ्यों की जांच करना जरूरी है।
उन्होंने लोगों से किसी भी विषय पर जानकारी साझा करने से पहले तथ्यों को सत्यापित करने और भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने का भी आह्वान किया।
रामायण काल का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रामायण काल से जुड़े प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में ज्ञान, संस्कृति और समाज की रक्षा को महत्वपूर्ण माना गया है।
उन्होंने इन ऐतिहासिक और धार्मिक संदर्भों को भारत की दीर्घकालिक ज्ञान परंपरा से जोड़ते हुए कहा कि
समाज को अपनी विरासत को समझने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की जरूरत है।
तक्षशिला और नालंदा का जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि
भारत में व्यवस्थित ज्ञान और शिक्षा की परंपरा बहुत पुरानी रही है।
उन्होंने काशी, उज्जैन और कांची सहित कई स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि
ये केंद्र लंबे समय तक अध्ययन और ज्ञान-विमर्श के महत्वपूर्ण स्थल रहे हैं।
सात दिवसीय कार्यक्रम में दिया संबोधन
मुख्यमंत्री का यह संबोधन गोरखनाथ मंदिर में आयोजित सात दिवसीय
पुण्यतिथि कार्यक्रम के तहत हुए भारतीय ज्ञान परंपरा विषयक सत्र में हुआ।
कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति, ज्ञान परंपरा और उसके वर्तमान संदर्भों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में ऐतिहासिक घटनाओं के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्रमुखता दी।
खबर के प्रमुख बिंदु
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में भारतीय ज्ञान परंपरा पर संबोधन दिया।
- उन्होंने महमूद गजनवी और सोमनाथ मंदिर का उदाहरण दिया।
- मुख्यमंत्री ने विदेशी आक्रमणों को केवल धन की लूट तक सीमित नहीं बताया।
- उन्होंने भारत की ज्ञान परंपरा को ‘विश्वगुरु’ की पहचान से जोड़ा।
- तक्षशिला, नालंदा, काशी, उज्जैन और कांची का उल्लेख किया।
- उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों की पुष्टि और भ्रामक सूचनाओं से सावधान रहने पर जोर दिया।
read this post :ओडिशा में भारी बारिश से मलकानगिरी बेहाल, कई पुल डूबे; NH-326 बंद, सैकड़ों वाहन फंसे