उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में चिलुआताल थाना क्षेत्र के बरगदवा गांव में 17 मार्च 2026 को हुए सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। 26 मार्च 2026 को पुलिस टीम और एसओजी/स्वाट टीम की संयुक्त कार्रवाई में हत्या के मामले में हथियार उपलब्ध कराने और छिपाने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनीष यादव (बरगदवा निवासी) और सचिन यादव (गोरखनाथ क्षेत्र के लच्छीपुर निवासी) के रूप में हुई है।
पुलिस ने दोनों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त अवैध .32 बोर पिस्टल, मैगजीन, जिंदा कारतूस, आलाकत्ल चाकू और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। जांच में पता चला कि मनीष यादव ने हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्टल मुख्य आरोपी को पहले ही उपलब्ध कराई थी, जबकि सचिन यादव ने घटना के बाद हथियार छिपाने में सक्रिय मदद की। यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गोरखपुर के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान का हिस्सा थी।
घटना का विवरण
17 मार्च 2026 की सुबह करीब 6:15 बजे चिलुआताल क्षेत्र के बरगदवा गांव में प्रॉपर्टी डीलर और पूर्व भाजपा नेता राजकुमार चौहान अपनी मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। अचानक हमलावरों ने उन पर गोली चलाई और फिर चाकू से बेरहमी से गोदकर उनकी हत्या कर दी। गंभीर रूप से घायल चौहान को इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना ने पूरे गोरखपुर में सनसनी फैला दी थी।
मृतक राजकुमार चौहान स्थानीय स्तर पर काफी चर्चित व्यक्ति थे। उनकी हत्या पुरानी रंजिश का नतीजा बताई जा रही है। पुलिस ने मृतक के परिजनों की तहरीर पर तुरंत मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी। घटनास्थल का निरीक्षण, आसपास के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के विश्लेषण से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
पुलिस ने मामले में पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था, जिनमें राज चौहान उर्फ निरहू, विपिन यादव, दीपक गौड़, लालजी यादव, शेषनाथ यादव, अंकित यादव, देवव्रत यादव शामिल हैं। एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया था। अब मनीष यादव और सचिन यादव की गिरफ्तारी के साथ कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ गई है।
पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर मनीष यादव की भूमिका हथियार सप्लायर के रूप में और सचिन यादव की भूमिका हथियार छिपाने में सामने आई। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। एसओजी/स्वाट टीम की मदद से 26 मार्च को उन्हें सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया गया। बरामद पिस्टल, चाकू और कारतूस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि घटना से उनका सीधा संबंध साबित किया जा सके।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे में शामिल किए गए हैं और आगे की
कानूनी कार्रवाई चल रही है। इस हत्याकांड की साजिश करीब एक साल से रची जा रही थी और
इसमें परिवार के कई सदस्यों की संलिप्तता सामने आई है।
रंजिश की जड़ें पुरानी बताई जा रही हैं, जिसमें संपत्ति विवाद और व्यक्तिगत दुश्मनी शामिल हो सकती है।
जांच की प्रक्रिया
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल्स और गवाहों के बयानों पर भरोसा करते हुए जांच को गति दी।
तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को आरोपियों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के
मार्गदर्शन में टीम ने दिन-रात मेहनत की और अब मामले का बड़ा खुलासा हो गया है।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश था। कई जगहों पर कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन भी हुए।
पुलिस ने आश्वासन दिया है कि सभी आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया जाएगा और न्याय की प्रक्रिया पूरी होगी।
यह सफलता उत्तर प्रदेश पुलिस की कुशलता और तकनीकी जांच की ताकत को दर्शाती है।
गोरखपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत
ऐसे अभियान जारी रहेंगे। पुलिस अन्य फरार आरोपियों की तलाश में भी जुटी हुई है।
निष्कर्ष गोरखपुर चिलुआताल हत्याकांड अब तेजी से सुलझ रहा है। मनीष यादव और सचिन यादव की गिरफ्तारी के साथ
हथियारों का बरामदगी मामले को मजबूत सबूत प्रदान करती है। परिजनों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
पुलिस की यह कार्रवाई पूरे क्षेत्र में कानून व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश देती है।