गोरखपुर ने रचा नया कीर्तिमान, मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा में प्रदेश में पहला स्थान, गांव-गांव पहुंच रही स्वास्थ्य सेवाएं
गोरखपुर। स्वास्थ्य सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में गोरखपुर ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की जून 2026 रैंकिंग में मोबाइल मेडिकल यूनिट (एमएमयू) सेवा के संचालन और प्रदर्शन में गोरखपुर पूरे उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर रहा है। यह उपलब्धि जिले में स्वास्थ्य विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली और दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाने के सफल प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
जिले में संचालित पांच मोबाइल मेडिकल यूनिट नियमित रूप से उन गांवों में पहुंच रही हैं, जहां जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। इन मोबाइल यूनिटों के माध्यम से ग्रामीणों को निशुल्क चिकित्सकीय परामर्श, दवाएं और आवश्यक जांच की सुविधा उनके गांव में ही मिल रही है।
जून महीने में 7 हजार से अधिक मरीजों को मिला उपचार
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जून महीने में जिले की पांच मोबाइल मेडिकल यूनिटों ने 50 आउटरीच मेडिकल कैंप आयोजित किए। इन शिविरों के माध्यम से 7,053 मरीजों का उपचार किया गया। साथ ही मौके पर ही 1,965 पैथोलॉजी जांचें की गईं, जिससे कई बीमारियों की समय रहते पहचान संभव हो सकी। जिन मरीजों को विशेष उपचार की आवश्यकता थी, उन्हें जिला अस्पताल और उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर किया गया।
गांवों तक पहुंच रही मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं
मोबाइल मेडिकल यूनिट का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। प्रत्येक यूनिट में एक डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट की टीम मौजूद रहती है। यह टीम मरीजों की जांच, परामर्श, दवाओं का वितरण और आवश्यक लैब परीक्षण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराती है।
इन सेवाओं से विशेष रूप से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को काफी राहत मिल रही है, क्योंकि उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती।
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड में मिला पहला स्थान
मुख्यमंत्री डैशबोर्ड के माध्यम से प्रदेश के सभी जिलों में मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवाओं की नियमित समीक्षा की जाती है। इसमें सेवाओं की गुणवत्ता, मरीजों की संख्या, जांच, दवा वितरण और यूनिटों की कार्यक्षमता जैसे विभिन्न मानकों का मूल्यांकन किया जाता है।
जून माह की रैंकिंग में गोरखपुर ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि जिले के स्वास्थ्य विभाग और मोबाइल मेडिकल यूनिट टीमों की समर्पित कार्यशैली को दर्शाती है।
सीएमओ ने दी सफलता का श्रेय टीमवर्क को
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह सफलता स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम के समर्पण और बेहतर समन्वय का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मोबाइल मेडिकल यूनिट ने दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और आगे भी इन सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों का भी रहा अच्छा प्रदर्शन
मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा की रैंकिंग में गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया। देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज को भी ग्रेड-ए रेटिंग मिली। जून महीने के दौरान इन जिलों की सभी मोबाइल मेडिकल
यूनिट पूरी क्षमता के साथ संचालित रहीं और हजारों मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।
निष्कर्ष
मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा में प्रदेश में पहला स्थान हासिल करना
गोरखपुर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य सेवाओं को
अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के सरकारी प्रयास प्रभावी साबित हो रहे हैं।
यदि इसी प्रकार नियमित रूप से गांव-गांव तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचती रहीं, तो
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और लोगों का जीवन स्तर दोनों बेहतर होंगे।
FAQ Schema
Q1. मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा में गोरखपुर को कौन-सा स्थान मिला है?
उत्तर: मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की जून 2026 रैंकिंग में गोरखपुर को उत्तर प्रदेश में पहला स्थान मिला है।
Q2. जिले में कितनी मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं?
उत्तर: गोरखपुर में वर्तमान में पांच मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं।
Q3. जून 2026 में कितने मरीजों को लाभ मिला?
उत्तर: जून महीने में 7,053 मरीजों का उपचार किया गया और 1,965 पैथोलॉजी जांचें की गईं।
Q4. मोबाइल मेडिकल यूनिट किन सेवाओं की सुविधा देती है?
उत्तर: निशुल्क चिकित्सकीय परामर्श, दवाएं, पैथोलॉजी जांच और
जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफरल सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
Q5. इस उपलब्धि पर क्या कहा गया है?
उत्तर: मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने इसे स्वास्थ्य विभाग की
टीम के सामूहिक प्रयास और बेहतर सेवा प्रबंधन का परिणाम बताया।
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