उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि मोर्चरी में पोस्टमार्टम से जुड़े लगभग हर काम के लिए मृतकों के परिजनों से पैसे वसूले जा रहे थे। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन हरकत में आ गया है तथा पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी गई है।
परिजनों का आरोप है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान शव को अंदर ले जाने, बाहर लाने, सिलाई, पैकिंग और अन्य सेवाओं के नाम पर अलग-अलग रकम मांगी जाती थी। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन होगा बल्कि शोकग्रस्त परिवारों के साथ गंभीर संवेदनहीनता का मामला भी माना जाएगा।
क्या हैं पूरे आरोप?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कई परिजनों ने आरोप लगाया कि मोर्चरी में बिना पैसे दिए कार्य समय पर नहीं किए जाते थे। उनका कहना है कि पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़े लगभग हर चरण के लिए कथित रूप से अलग-अलग राशि मांगी जाती थी।
आरोपों में यह भी कहा गया कि कई परिवार मजबूरी में भुगतान करने को विवश हो गए क्योंकि उन्हें जल्द से जल्द अपने परिजन का शव अंतिम संस्कार के लिए चाहिए था। फिलहाल इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
जांच के दायरे में मोर्चरी की व्यवस्था
मामला सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मोर्चरी की कार्यप्रणाली की जांच शुरू कर दी है। प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि यदि अवैध वसूली हुई है तो इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और यह व्यवस्था कब से चल रही थी।
जांच के दौरान कर्मचारियों से पूछताछ, रिकॉर्ड की जांच तथा परिजनों के बयान भी लिए जा सकते हैं।
पोस्टमार्टम सेवा पूरी तरह निशुल्क होती है
विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी अस्पतालों में पुलिस या मजिस्ट्रेट के निर्देश पर होने वाला पोस्टमार्टम सामान्यतः निशुल्क सरकारी सेवा है। यदि किसी कर्मचारी द्वारा अनधिकृत रूप से धन की मांग की जाती है तो वह नियमों के विरुद्ध माना जाता है।
ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी से शिकायत की जा सकती है और जांच के बाद दोषियों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई संभव है।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि शोक में डूबे परिवारों से कथित वसूली
जैसी शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो
दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोर्चरी जैसी संवेदनशील जगहों पर निगरानी व्यवस्था और
शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल मामला जांच के अधीन है। स्वास्थ्य विभाग की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए
आरोप कितने सही हैं और क्या किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी तय होती है।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
कानपुर की मोर्चरी में पोस्टमार्टम सेवाओं के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप बेहद गंभीर हैं।
हालांकि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही
यह तय होगा कि आरोप सही हैं या नहीं तथा किस स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।
FAQ
प्रश्न 1: मामला कहां का है?
यह मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक सरकारी मोर्चरी से जुड़ा है।
प्रश्न 2: क्या आरोप लगाए गए हैं?
परिजनों ने पोस्टमार्टम प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न सेवाओं के लिए कथित रूप से अवैध धन वसूली का आरोप लगाया है।
प्रश्न 3: क्या आरोप साबित हो चुके हैं?
नहीं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा।
प्रश्न 4: क्या पोस्टमार्टम सरकारी अस्पताल में निशुल्क होता है?
सामान्य परिस्थितियों में सरकारी अस्पतालों में विधिक प्रक्रिया के तहत किया जाने वाला पोस्टमार्टम निशुल्क सेवा होती है।
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