राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर में लकड़ी कारोबार को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी
गोरखपुर। गोला थाना क्षेत्र में हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान और पड़ौली बाजार में लकड़ी के कारोबार को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं। वन विभाग की कार्रवाई और मुकदमा दर्ज होने के बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लकड़ी का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से हरे पेड़ों की कटाई कर उनकी लकड़ी की चिराई और बिक्री का कारोबार किया जा रहा है। सड़क किनारे बड़ी मात्रा में लकड़ी रखे जाने से यातायात व्यवस्था प्रभावित होने के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।
गोला-कौड़ीराम मार्ग के किनारे रखी जा रही लकड़ी
स्थानीय लोगों के अनुसार पेड़ों की कटाई के बाद उनकी लकड़ी की चिराई कर गोला-कौड़ीराम मार्ग के किनारे रख दी जाती है। ग्रामीणों का दावा है कि करीब एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक सड़क की पटरी पर लकड़ी रखे जाने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई जगह वाहन चालकों को सड़क की मुख्य पटरी पर ही चलना पड़ता है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे लकड़ी का जमाव केवल यातायात की समस्या नहीं है, बल्कि यह सड़क अतिक्रमण का भी गंभीर विषय है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से सड़क की पटरी को अतिक्रमण मुक्त कराने और यातायात व्यवस्था सुचारु कराने की मांग की है।
एक गांव में कई आरा मशीनें संचालित होने का दावा
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही गांव में करीब आठ आरा मशीनें संचालित हो रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन मशीनों पर दिन-रात लकड़ी की चिराई होती है। आरोप यह भी है कि आसपास के क्षेत्रों से काटे गए पेड़ों की लकड़ी यहां पहुंचाई जाती है और चिराई के बाद दूसरे स्थानों पर भेज दी जाती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने संबंधित विभागों से क्षेत्र में संचालित आरा मशीनों की जांच, उनके दस्तावेजों और लकड़ी के स्रोत की जांच कराने की मांग की है।
पीपल, बरगद, पाकड़ और महुआ जैसे पेड़ों को लेकर चिंता
ग्रामीणों ने पीपल, बरगद, पाकड़, महुआ और आम जैसे हरे पेड़ों की कथित कटाई पर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार पेड़ों की कटाई से क्षेत्र में हरियाली प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में पुराने और उपयोगी पेड़ों की संख्या लगातार कम हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से पेड़ों की कटाई के मामलों की जांच कराने तथा जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाए, उनमें नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
वन विभाग की टीम ने पकड़ी थी लकड़ी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली
ग्रामीणों के विरोध और शिकायतों के बीच बीते सोमवार को वन विभाग की टीम ने गोला थाना क्षेत्र के देवारीबारी गांव में लकड़ी लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली पकड़ी थी। वन विभाग की ओर से इस मामले में गोला थाने पर तहरीर दी गई थी।
बताया गया कि वन विभाग की टीम ने लकड़ी से संबंधित परमिट मांगा था। तहरीर के
अनुसार मौके पर मौजूद चार लोगों पर वन विभाग की टीम के साथ कथित तौर पर
अभद्रता करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया।
पुलिस के सहयोग से मौके से लकड़ी और ट्रैक्टर-ट्रॉली बरामद की गई।
चार आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
मामले में पुलिस ने देर रात चार आरोपितों के खिलाफ बीएनएस की धारा 132, 352, 351(3) तथा
वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1976 की धारा 4 और 10 के तहत मुकदमा दर्ज किया। मुकदमा दर्ज होने के बाद
अब ग्रामीणों की नजर आगे होने वाली पुलिस और वन विभाग की कार्रवाई पर है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल मुकदमा दर्ज करने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
यदि क्षेत्र में वास्तव में नियमों के विरुद्ध पेड़ों की कटाई और
लकड़ी का कारोबार हो रहा है तो उसकी पूरी श्रृंखला की जांच जरूरी है।
ग्रामीणों ने व्यापक जांच की मांग की
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से प
ड़ौली बाजार क्षेत्र में संचालित आरा मशीनों, लकड़ी के कारोबार और कथित अवैध कटान की व्यापक
जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि लकड़ी कहां से आती है,
किस अनुमति के आधार पर काटी जाती है और
कहां भेजी जाती है, इसकी जांच होने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने सड़क की पटरी पर रखी लकड़ी को हटवाने, सड़क को
अतिक्रमण मुक्त कराने और यातायात व्यवस्था बेहतर करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सड़क
किनारे लकड़ी रखे जाने से यदि कोई दुर्घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
वन क्षेत्राधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा दिया
अवैध कटान के आरोपों को लेकर वन क्षेत्राधिकारी सर्वजीत सिंह ने कहा कि
मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई व्यक्ति
अवैध कटान में संलिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब देखना यह होगा कि वन विभाग की जांच के बाद पड़ौली बाजार क्षेत्र में कथित अवैध
लकड़ी कारोबार और हरे पेड़ों की कटाई पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि
जांच के बाद वास्तविक स्थिति सामने आएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी।
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