Emergency 1975: भारतीय लोकतंत्र का सबसे विवादित दौर
25 जून 1975 की रात भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे चर्चित और विवादित रातों में गिनी जाती है। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सलाह पर तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 तक यानी लगभग 21 महीनों तक लागू रहा। इस दौरान कई मौलिक अधिकारों पर रोक लगी, विपक्षी नेताओं को गिरफ्तार किया गया और प्रेस पर कड़ी सेंसरशिप लागू की गई।
आपातकाल को लेकर आज भी राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती है। कुछ लोग इसे प्रशासनिक अनुशासन का दौर बताते हैं, जबकि कई इतिहासकार इसे भारतीय लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला मानते हैं। आइए जानते हैं इस दौर से जुड़े सात ऐसे तथ्य, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।
1. आखिर क्यों लगाया गया था आपातकाल?
1970 के दशक में देश महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था। इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 12 जून 1975 को रायबरेली चुनाव मामले में इंदिरा गांधी के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई। जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में देशभर में बड़े आंदोलन शुरू हुए। इसी राजनीतिक संकट के बीच 25 जून 1975 को आपातकाल लागू कर दिया गया।
2. मौलिक अधिकारों पर लग गई थी रोक
आपातकाल लागू होते ही नागरिकों के कई मौलिक अधिकार प्रभावी रूप से निलंबित हो गए। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, विरोध प्रदर्शन और अदालत जाने जैसे अधिकारों पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए। संविधान के अनुच्छेद 358 और 359 के तहत कई संवैधानिक सुरक्षा उपाय स्थगित कर दिए गए थे।
3. हजारों विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं की हुई गिरफ्तारी
आपातकाल के दौरान विपक्षी दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया गया। जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, जॉर्ज फर्नांडिस, मोरारजी देसाई, चरण सिंह और कई अन्य प्रमुख नेता जेल भेजे गए। सरकार ने आंतरिक सुरक्षा कानूनों का इस्तेमाल कर बिना मुकदमे के भी कई लोगों को हिरासत में रखा।
4. प्रेस पर लगी थी कड़ी सेंसरशिप
आपातकाल के दौरान समाचार पत्रों और मीडिया पर कड़ी निगरानी रखी गई। कई अखबारों की बिजली तक काट दी गई ताकि वे अगले दिन का संस्करण प्रकाशित न कर सकें। सरकार की अनुमति के बिना कई समाचार प्रकाशित नहीं किए जा सकते थे। भारतीय प्रेस के इतिहास में इसे सबसे कठिन दौर माना जाता है।
5. जबरन नसबंदी अभियान बना सबसे बड़ा विवाद
आपातकाल के दौरान परिवार नियोजन अभियान को तेज किया गया। इस दौरान बड़े पैमाने पर नसबंदी अभियान चलाया गया, जिस पर बाद में जबरन कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप लगे। यह अभियान आज भी आपातकाल के सबसे विवादास्पद पहलुओं में गिना जाता है।
6. 1977 के चुनाव में बदल गई देश की राजनीति
जनवरी 1977 में चुनाव कराने की घोषणा हुई और मार्च 1977 में आपातकाल समाप्त कर दिया गया। आम चुनाव में कांग्रेस को बड़ी हार का सामना करना पड़ा और जनता पार्टी की सरकार बनी। यह पहली बार था जब केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार सत्ता में आई।
7. संविधान में किए गए बड़े बदलाव
आपातकाल समाप्त होने के बाद 44वें संविधान संशोधन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए। “आंतरिक अशांति (Internal Disturbance)” के स्थान पर “सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion)” को आपातकाल लगाने का आधार बनाया गया, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति का दुरुपयोग कठिन हो सके।
साथ ही न्यायिक समीक्षा और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा को भी मजबूत किया गया।
भारतीय लोकतंत्र के लिए क्या है इस दौर का संदेश?
1975 से 1977 तक का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का
एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह दौर बताता है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं, स्वतंत्र न्यायपालिका,
स्वतंत्र मीडिया और नागरिक अधिकारों का महत्व कितना अधिक है।
आज भी इस कालखंड का अध्ययन राजनीति,
कानून और इतिहास के विद्यार्थियों के लिए विशेष महत्व रखता है।
निष्कर्ष
आपातकाल भारतीय इतिहास की ऐसी घटना है जिसे अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जाता है,
लेकिन इस बात पर व्यापक सहमति है कि इसने भारतीय लोकतंत्र,
संविधान और नागरिक अधिकारों पर गहरा प्रभाव डाला।
यह इतिहास का वह अध्याय है जो लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के महत्व की लगातार याद दिलाता है।
FAQ
1. भारत में आपातकाल कब लगाया गया था?
25 जून 1975 को आपातकाल घोषित किया गया था और यह 21 मार्च 1977 तक लागू रहा।
2. आपातकाल कितने समय तक चला था?
लगभग 21 महीने तक।
3. आपातकाल के दौरान सबसे बड़ा बदलाव क्या हुआ था?
मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध, प्रेस सेंसरशिप और बड़े पैमाने पर राजनीतिक गिरफ्तारियां हुईं।
4. आपातकाल समाप्त होने के बाद क्या हुआ?
1977 के आम चुनाव में जनता पार्टी की सरकार बनी और बाद में
संविधान में संशोधन कर भविष्य के लिए अतिरिक्त सुरक्षा प्रावधान जोड़े गए।
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