नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल हॉर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। अमेरिका की ओर से ईरान पर नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखने की बात कही गई है, जबकि ईरान की ओर से भी इस जलमार्ग को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है। ऐसे में तेल की आपूर्ति, शिपिंग और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
हॉर्मुज में क्यों थम गई जहाजों की आवाजाही?
शिप ट्रैकिंग कंपनी Kpler के आंकड़ों के अनुसार शुक्रवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से केवल कुछ ही जहाज गुजर सके। रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को सिर्फ दो जहाजों के इस मार्ग से गुजरने की जानकारी मिली, जबकि किसी क्रूड ऑयल जहाज की आवाजाही दर्ज नहीं हुई।
युद्ध शुरू होने से पहले इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से रोजाना करीब 130 से अधिक जहाज गुजरते थे। अगस्त में औसतन करीब 12 जहाज प्रतिदिन इस रास्ते से गुजर रहे थे, लेकिन मौजूदा स्थिति में यह संख्या बेहद नीचे आ गई है। ट्रांसपोंडर बंद करके गुजरने वाले जहाजों के कारण वास्तविक संख्या कुछ अलग हो सकती है।
यूएई के दो जहाजों पर हमले से बढ़ा तनाव
हॉर्मुज संकट के बीच संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर अपने दो जहाजों पर हमला करने का आरोप लगाया है। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के अनुसार गुरुवार शाम हॉर्मुज से गुजर रहे उसके दो जहाजों को निशाना बनाया गया।
इस घटना के बाद खाड़ी क्षेत्र में समुद्री परिवहन को लेकर चिंता और बढ़ गई है। ईरान की ओर से इन आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
अमेरिका ने नाकाबंदी जारी रखने का संकेत दिया
अमेरिका ने संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी लंबे समय तक जारी रखी जा सकती है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के मुताबिक अमेरिकी नौसेना अपनी मौजूदगी बनाए रखने और नाकाबंदी को लागू करने में सक्षम है।
वहीं अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर अगले सप्ताह और आर्थिक दबाव डालने वाले कदमों की घोषणा के संकेत दिए हैं। इससे अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ने की आशंका है।
*ईरान ने भी अपनाया सख्त रुख
ईरान की संसद की एक समिति ने ऐसी योजना को मंजूरी दी है, जिसमें अमेरिका, इजरायल और अन्य कथित दुश्मन देशों के जहाजों और उपकरणों को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने से रोकने का प्रावधान है।
ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य को खोलने के लिए उसकी कुछ प्रमुख मांगों को पूरा करना होगा। इनमें आर्थिक प्रतिबंध हटाना और जब्त संपत्तियों को वापस करना जैसी मांगें शामिल हैं।
दुनिया के तेल बाजार पर बढ़ा दबाव
हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इस समुद्री मार्ग से गुजरता था। इसलिए यहां लंबे समय तक व्यवधान रहने पर तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
मौजूदा तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड करीब 87 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी क्रूड करीब 81 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा। बाजार में आगे आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है हॉर्मुज संकट?
हॉर्मुज संकट भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। समुद्री रास्तों में लंबे समय तक व्यवधान आने से भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति, परिवहन लागत और खरीद के विकल्पों पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची। ऐसे समय में रूस से कच्चे तेल की खरीद भारत के लिए वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में और महत्वपूर्ण हो सकती है।
एशियाई देश भी तलाश रहे वैकल्पिक सप्लाई
हॉर्मुज में संकट बढ़ने के साथ एशिया की रिफाइनरियां भी वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों पर नजर बनाए हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक एशियाई खरीदारों ने भविष्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी क्रूड की खरीद बढ़ाई है।
यदि समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहता है तो एशिया के ऊर्जा आयातकों को अधिक महंगी या लंबी दूरी वाली आपूर्ति पर निर्भर होना पड़ सकता है। इसका असर ईंधन की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है।
क्या दुनिया मंदी की ओर बढ़ सकती है?
हॉर्मुज संकट केवल तेल की कीमतों तक सीमित नहीं है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है और ऊर्जा आपूर्ति में बड़ा व्यवधान आता है, तो परिवहन, उत्पादन और उद्योगों की लागत बढ़ सकती है।
ऊंची ऊर्जा कीमतें पहले से कमजोर वैश्विक आर्थिक वृद्धि पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष लंबा चलने पर वैश्विक विकास दर में तेज गिरावट और कुछ क्षेत्रों में मंदी का जोखिम बढ़ सकता है।
हूती हमलों ने भी बढ़ाई चिंता
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब की ऊर्जा अवसंरचना पर ड्रोन हमले की खबरों ने भी क्षेत्रीय संकट को और गंभीर बना दिया है।
इससे आशंका बढ़ी है कि संघर्ष का दायरा और फैल सकता है।
यदि खाड़ी क्षेत्र के अन्य ऊर्जा केंद्र भी हमलों की चपेट में आते हैं तो
वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर और बड़ा असर पड़ सकता है।
ट्रंप की चेतावनी से भी बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर कड़ा बयान दिया है।
उन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने और जलमार्ग पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कही है।
हालांकि ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता और मांगों पर जोर दिया है।
ऐसे बयानों के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावना फिलहाल चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रही है।
आगे क्या होगा?
हॉर्मुज संकट का अगला चरण इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका और
ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए बातचीत कितनी आगे बढ़ती है। यदि समुद्री व्यापार बहाल होता है तो
तेल बाजार पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन नाकाबंदी और
हमलों का सिलसिला जारी रहा तो ऊर्जा कीमतों, वैश्विक व्यापार और महंगाई पर असर और गहरा सकता है।
भारत समेत एशियाई देशों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती वैकल्पिक
ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना और तेल की कीमतों में संभावित उतार-चढ़ाव से निपटना है।
निष्कर्ष
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही का लगभग ठप होना पूरी दुनिया के लिए
गंभीर आर्थिक संकेत है। अमेरिका की नाकाबंदी, ईरान का सख्त रुख और
जहाजों पर हमलों की घटनाओं ने पहले से जारी ऊर्जा संकट को और गहरा कर दिया है।
भारत के लिए रूसी कच्चे तेल की बढ़ती खरीद एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता बन सकती है,
लेकिन लंबे समय तक हॉर्मुज में व्यवधान रहने पर
वैश्विक तेल कीमतों और आयात लागत का दबाव भारत पर भी पड़ सकता है।
आने वाले दिनों में इस संकट का असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित रहेगा या
वैश्विक अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा, यह स्थिति के आगे के विकास पर निर्भर करेगा।
FAQ
1. हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
हॉर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार मार्गों में से एक है।
युद्ध से पहले वैश्विक तेल और गैस का करीब पांचवां हिस्सा इस मार्ग से गुजरता था।
2. हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही क्यों कम हुई?
अमेरिका-ईरान तनाव, नौसैनिक नाकाबंदी और जहाजों पर हमलों के कारण
समुद्री कंपनियां इस मार्ग से गुजरने में जोखिम महसूस कर रही हैं।
3. हॉर्मुज संकट का भारत पर क्या असर हो सकता है?
लंबे समय तक व्यवधान रहने पर कच्चे तेल की कीमत, शिपिंग लागत और
भारत की ऊर्जा आयात लागत पर दबाव बढ़ सकता है।
4. क्या भारत रूसी तेल खरीद रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार जुलाई में भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थी।
5. क्या हॉर्मुज संकट से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है?
अगर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं तो भारत समेत
कई देशों में ईंधन की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
6. अमेरिका ने ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाया है?
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी और अतिरिक्त आर्थिक दबाव की बात कही है।
7. ईरान की हॉर्मुज को लेकर क्या मांग है?
ईरान आर्थिक प्रतिबंध हटाने और जब्त संपत्तियां वापस करने समेत अपनी मांगों पर जोर दे रहा है।
8. क्या हॉर्मुज संकट से दुनिया में मंदी आ सकती है?
यदि संघर्ष लंबा चलता है और ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान रहता है, तो वैश्विक
आर्थिक वृद्धि पर दबाव बढ़ सकता है और कुछ क्षेत्रों में मंदी का जोखिम पैदा हो सकता है।
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