रोहतास। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर भगवान कृष्ण का रूप धारण कर घर में खुशियां बिखेर रहा महज दो साल का मासूम आर्यन अब इस दुनिया में नहीं है। रोहतास जिले के कोचस थाना क्षेत्र के भगीरथा गांव में जन्माष्टमी के दिन हुए दर्दनाक हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। बताया जा रहा है कि कृष्ण वेशभूषा में तैयार आर्यन के गले में पड़ी मोतियों की माला का एक मोती उसके मुंह में चला गया, जो कथित तौर पर सांस की नली में फंस गया। इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई।
जन्माष्टमी पर कान्हा बना था आर्यन
जानकारी के अनुसार भगीरथा गांव निवासी विमलेश यादव का दो वर्षीय बेटा आर्यन जन्माष्टमी के मौके पर कान्हा के रूप में तैयार हुआ था। उसके माथे पर मोरपंख, हाथ में छोटी बांसुरी और गले में मोतियों की माला थी।
मासूम की कृष्ण वेशभूषा देखकर परिवार में उत्सव जैसा माहौल था और परिजन उसकी मासूम अदाओं को देखकर खुश हो रहे थे।
खेलते समय माला का मोती मुंह में चला गया
बताया जा रहा है कि घर के आंगन में खेलते समय आर्यन ने अपने गले में पड़ी माला को खींच दिया। इसी दौरान माला का एक मोती टूटकर उसके हाथ में आ गया।
मासूम ने कथित तौर पर उसे खाने की वस्तु समझकर मुंह में डाल लिया।
इसके कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।
सांस की नली में फंस गया था मोती
परिजनों ने बच्चे की हालत बिगड़ते देख तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया।
चिकित्सकों के अनुसार मोती सांस की नली में फंस गया था। डॉक्टरों ने बच्चे को
बचाने का प्रयास किया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
कृष्ण की वेशभूषा घर में रह गई, मासूम कान्हा चला गया
आर्यन की मौत के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जिस घर में जन्माष्टमी की
तैयारियों और बच्चे के कान्हा बनने से खुशी का माहौल था, वहीं कुछ समय बाद मातम छा गया।
मासूम की मोरपंख वाली वेशभूषा, छोटी बांसुरी और अन्य सामान घर में रह गए,
लेकिन परिवार का नन्हा आर्यन हमेशा के लिए चला गया।
बच्चों को सजाते समय इन बातों का रखें ध्यान
यह घटना बच्चों को सजाने-संवारने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत भी बताती है।
छोटे बच्चे किसी भी छोटी वस्तु को मुंह में डाल सकते हैं। इसलिए मोतियों की माला, छोटे खिलौने, सिक्के, बटन या
अन्य छोटे हिस्सों वाली सजावटी वस्तुओं को बच्चों की पहुंच से दूर रखना जरूरी है।
बच्चों को धार्मिक या सांस्कृतिक वेशभूषा पहनाते समय भी उनकी सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।
खासकर छोटे बच्चों के आसपास ऐसी वस्तुएं नहीं रखनी चाहिए जिन्हें वे आसानी से मुंह में डाल सकें।
नोट: घटना से जुड़ी चिकित्सकीय और कानूनी जानकारी स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विवरण के आधार पर दी गई है। बच्चे की मौत को किसी धार्मिक आस्था या समुदाय से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा; उपलब्ध विवरण इसे एक दुखद दुर्घटना के रूप में दर्शाते हैं।
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