दिल्ली SIR में बड़े नामों को नोटिस, आडवाणी-जयशंकर समेत कई हस्तियां सूची में

दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। इस सूची में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू समेत कई प्रमुख व्यक्तियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं। निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार नोटिस का उद्देश्य मतदाता का नाम हटाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड और दस्तावेजों का सत्यापन करना है।

31 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस

दिल्ली की मसौदा मतदाता सूची में करीब 97 लाख मतदाताओं को शामिल किया गया है। SIR के दौरान गणना प्रपत्रों और पिछली मतदाता सूची के रिकॉर्ड का मिलान किया गया। अधिकारियों के अनुसार करीब 33.13 लाख मतदाताओं के विवरण में ऐसी विसंगतियां मिलीं, जिनके आधार पर नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई। इनमें से 31.63 लाख से अधिक नोटिस तैयार/जारी किए जा चुके हैं।

नोटिस पाने वालों में कई जाने-पहचाने नाम शामिल होने की बात सामने आई है। इनमें पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू तथा विदेश सचिव विक्रम मिस्री जैसे नाम बताए गए हैं। इसके अलावा कई वरिष्ठ अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सूची में हैं।

आडवाणी परिवार के सदस्यों को भी नोटिस

SIR की प्रक्रिया में पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के परिवार के कुछ सदस्यों के रिकॉर्ड में भी मिलान संबंधी समस्या सामने आने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक परिवार के तीन सदस्यों को नोटिस जारी किया गया। इनमें एक मामले में पिछली SIR सूची से रिकॉर्ड का मिलान नहीं हो पाया, जबकि दूसरे सदस्य का रिकॉर्ड सही तरीके से मैप होने की बात सामने आई है।

यह प्रक्रिया केवल किसी एक व्यक्ति या वर्ग तक सीमित नहीं है। जिन मतदाताओं के पुराने रिकॉर्ड से वर्तमान विवरण का मिलान नहीं हो पाया या नाम, जन्मतिथि अथवा अन्य जानकारी में अंतर मिला, उन्हें सत्यापन के लिए नोटिस भेजा जा रहा है।

नोटिस मिलने का मतलब नाम कटना नहीं

निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि नोटिस मिलना अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का अंतिम निर्णय नहीं है। संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर दिया जा रहा है। जवाब और दस्तावेजों की जांच के बाद पात्रता के आधार पर रिकॉर्ड को अंतिम रूप दिया जाएगा।

मतदाताओं को अपने विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। SIR के दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया में मतदाताओं को अपनी जानकारी सही कराने का अवसर दिया गया है।

29 अक्टूबर तक हो सकता है नोटिस का निपटारा

उपलब्ध जानकारी के अनुसार नोटिस पाने वाले मतदाताओं से जवाब और आवश्यक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।

दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलनी है, जबकि दस्तावेजों एवं तथ्यों के सत्यापन के बाद पात्र मामलों का निपटारा 29 अक्टूबर तक किए जाने की प्रक्रिया बताई गई है।

जरूरी तथ्य

दिल्ली में SIR के तहत मतदाता विवरण का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है।

करीब 97 लाख मतदाताओं वाली मसौदा सूची में विसंगतियों वाले मामलों की पहचान की गई।

33.13 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस के लिए चिन्हित किया गया।

31.63 लाख से अधिक नोटिस तैयार/जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग न होना भी नोटिस का एक कारण है।

नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरण में अंतर मिलने पर भी सत्यापन के लिए नोटिस दिया जा सकता है।

नोटिस मिलने का अर्थ सीधे तौर पर मतदाता सूची से नाम हटना नहीं है।

अधिकारियों का पक्ष

निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के अनुसार SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज विवरणों का सत्यापन और विसंगतियों को दूर करना है।

जिन मतदाताओं को नोटिस दिया गया है।

निर्धारित प्रक्रिया के तहत जवाब और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।

सत्यापन के बाद ही संबंधित प्रविष्टि को अंतिम रूप दिया जाएगा।

FAQ

1. SIR नोटिस क्यों भेजा जा रहा है?

पुरानी मतदाता सूची से रिकॉर्ड का मिलान नहीं होने या नाम, जन्मतिथि आदि में विसंगति मिलने पर सत्यापन के लिए नोटिस भेजा जा रहा है।

2. क्या नोटिस मिलने से वोटर का नाम कट गया है?

नहीं। नोटिस सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है। संबंधित मतदाता को जवाब देने का अवसर दिया जा रहा है।

3. किन प्रमुख लोगों को नोटिस मिला है?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार लालकृष्ण आडवाणी, एस. जयशंकर और एस.एस. संधू समेत कई प्रमुख लोगों के नाम सूची में बताए गए हैं।

4. जवाब कहां देना होगा?

संबंधित विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के समक्ष आवश्यक दस्तावेजों के साथ जवाब देना होगा।

5. प्रक्रिया कब तक पूरी होगी?

दावों और आपत्तियों का चरण 30 सितंबर तक है।

दस्तावेजी सत्यापन के बाद मामलों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर तक चलने की जानकारी दी गई है।

निष्कर्ष

दिल्ली में SIR के तहत मतदाता विवरणों की व्यापक जांच चल रही है।

मुख्य रूप से सार्वजनिक व्यक्तियों के नाम सामने आए है

प्रक्रिया चर्चा में जरूर है, लेकिन नोटिस का मूल उद्देश्य रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों का सत्यापन करना है।

अंतिम स्थिति दस्तावेजों की जांच और निर्धारित निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।