देवरिया शहर में एक निजी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती महिला और उसके नवजात की मौत के बाद दुखद स्थिति पैदा हो गई। परिवार ने अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही बरतने का आरोप लगाया, जिसके बाद अस्पताल परिसर के बाहर विरोध और हंगामे की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को शांत कराने का प्रयास किया।
यह घटना 16 अक्टूबर 2026 को देवरिया शहर के गोरखपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में हुई। मां और बच्चे की मौत से परिवार में मातम छा गया। परिजन घटना के संबंध में अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांग रहे थे।
प्रसव के लिए सुबह अस्पताल पहुंची थीं सोनी देवी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरीबाजार थाना क्षेत्र के सुपरी बुजुर्ग गांव निवासी अमन गोंड की पत्नी सोनी देवी, उम्र करीब 30 वर्ष, गर्भवती थीं। परिजन शुक्रवार सुबह उन्हें प्रसव के लिए गोरखपुर रोड स्थित निजी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
परिजनों का कहना है कि डॉक्टर ने इलाज के लिए 50 हजार रुपये जमा करने को कहा था। परिवार के सदस्य पैसों की व्यवस्था करने में लगे थे। इसी बीच शाम को सोनी देवी की मौत हो गई। उनके नवजात बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका।
मां और बच्चे की मौत की खबर सुनते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। जिस घर में नए बच्चे के आगमन की उम्मीद थी, वहां मातम छा गया।
इलाज में देरी का आरोप, अस्पताल प्रबंधन पर उठे सवाल
महिला और नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में उपचार को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इलाज में देरी और लापरवाही की गई। परिवार के सदस्य घटना की परिस्थितियों को लेकर स्पष्टीकरण चाहते थे।
परिजनों के अनुसार, महिला की मौत के बाद उनके शव को अस्पताल के गेट के बाहर निकलवा दिया गया और मुख्य गेट बंद कर दिया गया। इस घटनाक्रम से परिजनों की नाराजगी बढ़ गई और अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी।
हालांकि, उपचार में लापरवाही के आरोपों की पुष्टि जांच के बिना नहीं की जा सकती। महिला और नवजात की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता
चिकित्सकीय रिकॉर्ड और जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही चल सकेगा।
सूचना पर पहुंची कोतवाली पुलिस और सीओ सिटी
अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची।
सीओ सिटी संजय कुमार रेड्डी भी घटनास्थल पर पहुंचे और नाराज परिजनों को समझाने का प्रयास किया।
परिजन मां और बच्चे की मौत को लेकर जवाब चाहते थे। घटना के
दौरान अस्पताल का मुख्य गेट बंद रहने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने स्थिति
संभालने की कोशिश की और मामले की जांच शुरू किए जाने की बात कही।
सीओ सिटी संजय कुमार रेड्डी के अनुसार, मामले की जांच की जा रही थी।
उन्होंने बताया कि जांच के बाद ही घटना के संबंध में स्पष्ट रूप से कुछ कहा जा सकेगा।
प्रसव के दौरान सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था क्यों जरूरी?
प्रसव के समय गर्भवती महिला और नवजात की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
कुछ मामलों में प्रसव के दौरान अचानक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं, जिनके लिए
तत्काल चिकित्सकीय निर्णय और उचित सुविधाओं की आवश्यकता होती है।
ऐसी परिस्थितियों में अस्पताल में प्रशिक्षित चिकित्सक, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, समय पर
उपचार और जरूरत पड़ने पर उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है।
देवरिया की इस घटना में भी यह स्पष्ट होना जरूरी है कि महिला की स्थिति कैसी थी,
उसे किस प्रकार का उपचार दिया गया और मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या रहा।
इन सवालों का जवाब जांच और चिकित्सकीय तथ्यों के आधार पर ही मिल सकता है।
निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए सच
सोनी देवी और उनके नवजात की मौत ने परिवार को गहरे दुख में डाल दिया है।
परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस ने मामले की जांच किए जाने की जानकारी दी थी।
अब जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। उपचार से जुड़े रिकॉर्ड, अस्पताल की व्यवस्थाओं और परिजनों की
शिकायतों की पड़ताल से घटना की परिस्थितियां स्पष्ट हो सकती हैं। यदि जांच में किसी तरह की चिकित्सकीय
लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
महत्वपूर्ण सूचना: इस खबर में इलाज में लापरवाही से संबंधित बातें परिजनों के आरोपों पर आधारित हैं।
जांच के अंतिम निष्कर्ष उपलब्ध हुए बिना किसी व्यक्ति या अस्पताल को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. देवरिया में जच्चा-बच्चा की मौत कब हुई?
यह घटना 16 अक्टूबर 2026 को सामने आई थी।
2. मृत महिला का नाम क्या था?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार महिला का नाम सोनी देवी था। उनकी उम्र लगभग 30 वर्ष बताई गई है।
3. घटना किस अस्पताल में हुई?
घटना देवरिया शहर के गोरखपुर रोड स्थित एक निजी अस्पताल में हुई। संबंधित खबर में अस्पताल की पहचान दयानंद उर्मिला हॉस्पिटल के रूप में भी बताई गई है
4. परिजनों ने क्या आरोप लगाया?
परिजनों ने उपचार में देरी और लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना था कि इलाज के लिए 50 हजार रुपये जमा करने को कहा गया था।
5. क्या अस्पताल की लापरवाही साबित हो चुकी है?
नहीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आरोपों की पुष्टि नहीं हुई थी। वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
6. पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
कोतवाली पुलिस और सीओ सिटी मौके पर पहुंचे थे। पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया और जांच किए जाने की जानकारी दी।
7. घटना की वास्तविक वजह क्या थी?
मौत का निश्चित कारण उपलब्ध जानकारी से स्थापित नहीं होता। इसके लिए चिकित्सकीय रिकॉर्ड और जांच के निष्कर्ष जरूरी हैं।
read this post :CKK रिटेल मार्ट के बोनस शेयर की घोषणा से एक सप्ताह में शेयरों में आई तूफानी तेजी