Deoria Cyber Fraud: नौकरी का झांसा देकर युवतियों को बनाते थे बंधक, फिर कराते थे साइबर ठगी; गिरोह का पर्दाफाश

Deoria Cyber Fraud: नौकरी दिलाने के नाम पर युवतियों को बनाते थे बंधक, फिर कराते थे साइबर ठगी

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक संगठित गिरोह पर आरोप है कि वह युवतियों को अच्छी नौकरी का लालच देकर अपने जाल में फंसाता था। नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उन्हें अपने ठिकाने पर बुलाया जाता और फिर उन्हें बंधक बनाकर जबरन साइबर ठगी के काम में लगाया जाता था। मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस और साइबर सेल ने जांच तेज कर दी है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, गिरोह युवतियों से सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनवाता था। विरोध करने पर उन्हें डराया-धमकाया जाता और बाहर जाने की अनुमति नहीं दी जाती थी। पीड़िताओं से लंबे समय तक साइबर अपराध करवाने के आरोप सामने आए हैं।

नौकरी के नाम पर रची जाती थी साजिश

जांच में सामने आया कि आरोपी पहले बेरोजगार युवतियों को बेहतर वेतन वाली नौकरी का लालच देते थे। जब युवतियां उनके संपर्क में आ जातीं, तो उन्हें अपने ठिकाने पर बुलाकर मोबाइल और अन्य संपर्क के साधनों पर नियंत्रण कर लिया जाता था।

इसके बाद उन्हें विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों से संपर्क करने, फर्जी निवेश योजनाएं बताने और अन्य साइबर ठगी के तरीकों में शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता था। विरोध करने पर मानसिक दबाव और धमकियों का इस्तेमाल किया जाता था।

पुलिस ने शुरू की गहन जांच

मामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के नेटवर्क, उसके अन्य सदस्यों और साइबर ठगी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को नौकरी का झांसा देकर फंसाया और कितने लोग साइबर ठगी का शिकार हुए। मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं।

साइबर अपराध का बदलता तरीका

हाल के वर्षों में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी आई है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी जॉब पोर्टल का इस्तेमाल कर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले कंपनी, एजेंसी और ऑफर की पूरी जांच करना जरूरी है। यदि कोई संस्था पहले पैसे मांगे या संदिग्ध शर्तें रखे, तो सतर्क हो जाना चाहिए।

कैसे रहें सुरक्षित?

  • केवल विश्वसनीय जॉब पोर्टल पर ही आवेदन करें।
  • नौकरी के नाम पर एडवांस फीस या सिक्योरिटी मनी जमा न करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति को अपने आधार, पैन या बैंक विवरण साझा न करें।
  • संदिग्ध गतिविधि दिखने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या स्थानीय पुलिस से संपर्क करें।
  • परिवार या दोस्तों को अपनी लोकेशन और इंटरव्यू की जानकारी अवश्य दें।

निष्कर्ष

देवरिया का यह मामला बताता है कि साइबर अपराधी अब नौकरी की तलाश कर रहे

युवाओं को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता, जानकारी की पुष्टि और

समय रहते पुलिस को सूचना देना ही सबसे बड़ा बचाव है।

पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल जारी है।

FAQ

1. देवरिया में क्या मामला सामने आया है?

नौकरी का झांसा देकर युवतियों को बंधक बनाकर उनसे कथित तौर पर

साइबर ठगी करवाने वाले गिरोह का मामला सामने आया है।

2. आरोपी युवतियों को कैसे फंसाते थे?

वे अच्छी नौकरी और अधिक वेतन का लालच देकर युवतियों को अपने संपर्क में लाते थे।

3. पुलिस क्या जांच कर रही है?

पुलिस गिरोह के सदस्यों, साइबर ठगी के नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।

4. साइबर ठगी से कैसे बचें?

केवल विश्वसनीय जॉब पोर्टल का उपयोग करें, किसी को पैसे या निजी

दस्तावेज बिना जांच के न दें और संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।

5. शिकायत कहां करें?

साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है।

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