ट्रंप की खबर ने फिर खोला 2000 का राज
डिकॉय विमान से छिपाई गई थी अमेरिकी राष्ट्रपति की असली लोकेशन
डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी विमान अदला-बदली की चर्चाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़ा करीब ढाई दशक पुराना एक मामला फिर चर्चा में है। साल 2000 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के पाकिस्तान दौरे के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसी रणनीति अपनाई थी, जिसमें राष्ट्रपति की वास्तविक लोकेशन को छिपाने के लिए डिकॉय विमान का इस्तेमाल किया गया था।
पाकिस्तान पहुंचने से पहले बनाया गया था डिकॉय प्लान
बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा बेहद संवेदनशील दौर में हुई थी। उस समय अमेरिका के लिए राष्ट्रपति की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता थी। संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसा प्लान तैयार किया, जिससे राष्ट्रपति के वास्तविक विमान की पहचान करना आसान न हो।
एक विमान दिखा, लेकिन क्लिंटन उसमें थे ही नहीं
सुरक्षा रणनीति के तहत एक विमान को इस तरह इस्तेमाल किया गया कि देखने वालों को लगे कि अमेरिकी राष्ट्रपति उसी विमान से पाकिस्तान पहुंचे हैं। हालांकि, वास्तविकता में क्लिंटन दूसरे विमान से पाकिस्तान पहुंचे थे।
इस रणनीति का मूल उद्देश्य भ्रम पैदा करना था। जमीन पर मौजूद लोगों या संभावित हमलावरों के लिए यह पता लगाना मुश्किल बनाया गया कि राष्ट्रपति आखिर किस विमान में सवार हैं।
दूसरा विमान बना राष्ट्रपति की सुरक्षा की ढाल
जिस विमान से क्लिंटन वास्तव में पाकिस्तान पहुंचे, उसकी पहचान को सामान्य रखने की कोशिश की गई थी। इससे राष्ट्रपति की वास्तविक यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी रही और सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरे से निपटने में अतिरिक्त सुरक्षा कवच मिला।
क्यों जरूरी था सुरक्षा का यह तरीका?
साल 2000 में पाकिस्तान की राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति बेहद संवेदनशील थी। भारत-पाकिस्तान तनाव, कश्मीर विवाद, परमाणु हथियारों और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति का दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
ऐसे माहौल में राष्ट्रपति की यात्रा से जुड़ी जानकारी को सीमित रखना सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा था। डिकॉय विमान इसी व्यापक सुरक्षा व्यवस्था का एक हिस्सा था।
क्लिंटन का पाकिस्तान दौरा क्यों था बेहद अहम?
बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा केवल औपचारिक दौरा नहीं थी। दक्षिण एशिया में भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच अमेरिका की भूमिका, क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे इस यात्रा से जुड़े थे।
इसी वजह से राष्ट्रपति की यात्रा पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर थी और
सुरक्षा एजेंसियों को हर संभावित खतरे को ध्यान में रखकर योजना बनानी पड़ी।
पत्रकारों को भी मिली थी सुरक्षा योजना की जानकारी
इस ऑपरेशन की एक खास बात यह थी कि यात्रा को कवर कर रहे
कुछ वरिष्ठ पत्रकारों को सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानकारी दी गई थी। इससे पता चलता है कि
राष्ट्रपति की सुरक्षा और मीडिया कवरेज के बीच भी नियंत्रित स्तर पर समन्वय रखा गया था।
ढाई दशक बाद फिर क्यों चर्चा में आया यह मामला?
आज जब अमेरिकी राष्ट्रपति की विमान सुरक्षा और संभावित विमान अदला-बदली को लेकर चर्चाएं
सामने आ रही हैं, तब क्लिंटन का साल 2000 वाला पाकिस्तान दौरा भी याद किया जा रहा है।
यह घटना बताती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की विदेश यात्राओं में सुरक्षा एजेंसियां
लंबे समय से ऐसी रणनीतियों का इस्तेमाल करती रही हैं, जिनका मकसद राष्ट्रपति की
वास्तविक लोकेशन को छिपाना और संभावित खतरे को भ्रमित करना होता है।
राष्ट्रपति सुरक्षा में ‘भ्रम’ भी एक हथियार
डिकॉय विमान का इस्तेमाल महज दिखावे की रणनीति नहीं माना जाता।
इसका उद्देश्य संभावित हमलावर को गलत सूचना देना और वास्तविक लक्ष्य की पहचान को छिपाना होता है।
राष्ट्रपति जैसे अति-संवेदनशील व्यक्ति की सुरक्षा में ऐसी रणनीति सुरक्षा व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण परत बन सकती है।
क्लिंटन का 2000 का दौरा आज भी क्यों याद किया जाता है?
बिल क्लिंटन का पाकिस्तान दौरा उन चर्चित अमेरिकी राष्ट्रपति यात्राओं में शामिल है,
जहां सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली तस्वीर और पर्दे के पीछे चल रही सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा अंतर था।
डिकॉय विमान की कहानी इसी वजह से आज भी लोगों की दिलचस्पी का विषय बनी हुई है।
निष्कर्ष: दशकों पुरानी सुरक्षा रणनीति ने फिर खींचा ध्यान
बिल क्लिंटन के पाकिस्तान दौरे में अपनाई गई विमान रणनीति अमेरिकी
राष्ट्रपति सुरक्षा के जटिल स्वरूप को सामने लाती है। ट्रंप से जुड़ी मौजूदा चर्चाओं के बीच
यह पुराना मामला फिर सामने आना बताता है कि राष्ट्रपति की वास्तविक
लोकेशन छिपाने और संभावित खतरे को भ्रमित करने वाली रणनीतियां कोई नई बात नहीं हैं।
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