नोएडा इंजीनियर आर्यन की मौत पर बढ़ा विवाद, बिजली निगम और प्राधिकरण आमने-सामने; चार दिन बाद भी FIR नहीं

नोएडा के सेक्टर-58 में बारिश के दौरान 27 वर्षीय इंजीनियर आर्यन की मौत का मामला अब प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। घटना के कई दिन बाद भी मौत की असली वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। एक ओर नोएडा प्राधिकरण का दावा है कि सड़क पर भरे पानी में करंट उतरने से आर्यन की जान गई, जबकि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम इस दावे को पूरी तरह खारिज कर रहा है। इस बीच पुलिस का कहना है कि उसे अब तक कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय लोगों में नाराजगी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मौत की वजह पर दो विभागों के अलग-अलग दावे

घटना के बाद वायरल हुए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि सड़क पर जमा पानी में बिजली का करंट उतर आया था। उनका दावा है कि आर्यन उसी करंट की चपेट में आने के बाद नाले के पास गिर गए, जिससे उनकी मौत हुई।

वहीं पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारियों का कहना है कि मौके पर लगे बिजली के खंभे में किसी प्रकार का करंट नहीं था। उनका तर्क है कि घटना के बाद भी बिजली व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया और न ही वहां करंट फैलने जैसी कोई स्थिति सामने आई। विभाग का कहना है कि केवल सीसीटीवी फुटेज के आधार पर करंट लगने का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

सीसीटीवी फुटेज बना जांच का अहम आधार

घटना के समय का सीसीटीवी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। फुटेज में आर्यन बारिश के बीच जलभराव वाली सड़क पर चलते दिखाई देते हैं। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ता है और वे सड़क किनारे बने नाले में गिर जाते हैं। आसपास मौजूद लोग उन्हें बाहर निकालने का प्रयास करते हैं।

कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि बचाने पहुंचे एक व्यक्ति को भी झटके जैसा महसूस हुआ, जिससे करंट लगने की आशंका और गहरा गई। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज को जांच के लिए अपने कब्जे में ले लिया है और तकनीकी विश्लेषण कराया जा रहा है।

चार दिन बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि हादसे के कई दिन बीत जाने के बावजूद अब तक कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक पीड़ित परिवार की ओर से औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दूसरी ओर मृतक के परिजन और स्थानीय लोग प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि खुले नाले, जलभराव या बिजली व्यवस्था में लापरवाही रही है तो जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

इस मामले में स्पष्ट जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

नोएडा में यह पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में खुले नालों, जलभराव और

सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद शहर में

कई स्थानों पर खुले नाले और अधूरी सुरक्षा व्यवस्था अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में जलभराव वाले क्षेत्रों में बिजली के खंभों,

खुले नालों और खराब ड्रेनेज की नियमित जांच बेहद जरूरी है। यदि समय रहते सुरक्षा

उपाय लागू नहीं किए गए तो भविष्य में भी ऐसे हादसों की आशंका बनी रहेगी।

निष्कर्ष

इंजीनियर आर्यन की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली

घटना बन गई है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, मौत की वास्तविक वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होगी।

लेकिन यह तय है कि यदि किसी विभाग की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करना और

भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।

FAQ

1. इंजीनियर आर्यन की मौत कहां हुई थी?
नोएडा के सेक्टर-58 में बारिश के दौरान सड़क किनारे नाले के पास यह हादसा हुआ।

2. मौत की वजह को लेकर विवाद क्यों है?
नोएडा प्राधिकरण करंट लगने की बात कह रहा है, जबकि बिजली निगम ने इससे इनकार किया है।

3. क्या इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई है?
नहीं, समाचार प्रकाशित होने तक पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली थी, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी।

4. क्या घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है?
हाँ, घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है और पुलिस उसकी जांच कर रही है।

5. इस मामले में आगे क्या होगा?
पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और

जांच के आधार पर मौत की वास्तविक वजह तय की जाएगी।

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