Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मौके पर विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापित परिवारों को याद किया। उन्होंने कहा कि देश के इतिहास के इस दर्दनाक अध्याय को भुलाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इससे सीख लेनी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक निकाले गए मौन मार्च में भी हिस्सा लिया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केशव प्रसाद मौर्य और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
1947 का विभाजन आज भी इतिहास का दर्दनाक अध्याय
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हर साल 14 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य 1947 में देश के विभाजन के दौरान मारे गए लोगों, विस्थापित परिवारों और उस दौर में भारी पीड़ा झेलने वाले लोगों को याद करना है।
भारत के विभाजन के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को अपना घर, जमीन और पैतृक स्थान छोड़कर दूसरी जगह जाना पड़ा था। इस दौरान हिंसा और अव्यवस्था में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। लाखों परिवारों को नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा।
इसी ऐतिहासिक पीड़ा को याद रखने के लिए 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस की घोषणा वर्ष 2021 में की गई थी।
CM योगी ने कांग्रेस पर साधा निशाना
लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 के विभाजन को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने विभाजन को देश के इतिहास की बड़ी त्रासदी बताते हुए तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों और फैसलों पर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की पीड़ा को केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। इसके पीछे जिन परिवारों ने अपने लोगों को खोया और जिन लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा, उनकी पीड़ा को भी याद रखना जरूरी है।
योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर यह भी कहा कि इतिहास के ऐसे अध्यायों को याद करने का उद्देश्य समाज में वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सबक लेना होना चाहिए।
मौन मार्च में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर लखनऊ में आयोजित मौन मार्च कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक मार्च का नेतृत्व किया।
मौन मार्च में बड़ी संख्या में भाजपा नेता और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। इस दौरान विभाजन की त्रासदी में प्रभावित हुए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम में देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का संदेश भी दिया गया।
योगी बोले- इतिहास से सीख लेना जरूरी
मुख्यमंत्री के संबोधन का एक प्रमुख संदेश यह रहा कि देश के अतीत से सीख लेकर भविष्य को मजबूत किया जाना चाहिए। विभाजन के दौरान जिस तरह बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन और हिंसा का सामना करना पड़ा, वह आज भी भारतीय इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में शामिल है।
योगी आदित्यनाथ ने इस घटना को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता और अखंडता को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका कहना था कि इतिहास को याद करने का मकसद समाज को बांटना नहीं, बल्कि देश की एकता को और मजबूत करना होना चाहिए।
देशभर में मनाया जा रहा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
14 अगस्त को केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस दौरान विभाजन से प्रभावित परिवारों की कहानियों, तस्वीरों और ऐतिहासिक घटनाओं को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
स्कूल, कॉलेज, सामाजिक संस्थाएं और सरकारी स्तर पर भी इस दिन विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसका उद्देश्य युवाओं को इतिहास के उस दौर से परिचित कराना और उन लोगों के संघर्ष को याद करना है जिन्होंने विस्थापन और हिंसा के बीच अपना जीवन दोबारा खड़ा किया।
यूपी में स्कूलों तक पहुंचाया जा रहा देशभक्ति का संदेश
उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर हर घर तिरंगा अभियान और विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने की तैयारी की है। प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय लोगों की भागीदारी से देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के सम्मान से जुड़े कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
इस अभियान के जरिए बच्चों और युवाओं तक स्वतंत्रता आंदोलन, विभाजन और देश की एकता से जुड़े विषयों को पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
विभाजन की पीड़ा को याद करने का क्या उद्देश्य है?
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य केवल पुरानी घटनाओं को दोहराना नहीं है। इसका एक बड़ा उद्देश्य उन लोगों को सम्मान देना है जिन्होंने विभाजन के दौरान अपना घर, परिवार और संपत्ति खोई।
इसके साथ ही यह दिन इस बात की याद दिलाता है कि सामाजिक सद्भाव और
राष्ट्रीय एकता कितनी महत्वपूर्ण है। इतिहास में हुई बड़ी त्रासदियों से सबक लेकर समाज को हिंसा,
नफरत और विभाजनकारी सोच से दूर रखने की आवश्यकता है।
15 अगस्त से एक दिन पहले क्यों मनाया जाता है यह दिवस?
भारत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है, जबकि 14 अगस्त को विभाजन
विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है। दोनों दिनों के बीच का
यह अंतर इतिहास के एक महत्वपूर्ण विरोधाभास को सामने लाता है।
एक तरफ देश स्वतंत्रता की उपलब्धि का उत्सव मनाता है,
वहीं उससे ठीक पहले विभाजन के दौरान हुई
मानवीय त्रासदी और लाखों लोगों के विस्थापन को याद किया जाता है।
इसीलिए 14 अगस्त को पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने और इतिहास से सीख लेने का दिन माना जाता है।
राष्ट्रीय एकता पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय एकता और अखंडता को
मजबूत करने पर जोर दिया। उनका संदेश था कि देश को मजबूत बनाने के लिए समाज में एकता,
भाईचारा और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना आवश्यक है।
विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए यह भी जरूरी है कि आज की पीढ़ी इतिहास को समझे और
यह जाने कि सामाजिक तनाव और हिंसा का असर आम नागरिकों पर कितना गंभीर हो सकता है।
लखनऊ कार्यक्रम का राजनीतिक महत्व
लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में आयोजित कार्यक्रम को
राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 1947 के विभाजन और
तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा।
ऐसे में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का कार्यक्रम इतिहास की स्मृति के
साथ-साथ वर्तमान राजनीतिक विमर्श का हिस्सा भी बना। हालांकि कार्यक्रम का
आधिकारिक उद्देश्य विभाजन के पीड़ितों को याद करना और श्रद्धांजलि देना रहा।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026: क्या है बड़ा संदेश?
14 अगस्त 2026 को लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम से तीन महत्वपूर्ण संदेश सामने आए—
पहला, विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को याद करना; दूसरा,
विस्थापित परिवारों के संघर्ष और योगदान को सम्मान देना; और
तीसरा, आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से सीख लेने के लिए प्रेरित करना।
देश की आजादी के 80वें वर्ष की ओर बढ़ते भारत के लिए इतिहास को समझना और
राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना महत्वपूर्ण है। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर
विभाजन की पीड़ा को याद करना इसी ऐतिहासिक चेतना का हिस्सा है।
FAQ: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस 2026
सवाल 1: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: हर साल 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया जाता है।
सवाल 2: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: 1947 के विभाजन के दौरान मारे गए लोगों, विस्थापित परिवारों और
उस त्रासदी से प्रभावित लोगों की पीड़ा और संघर्ष को याद करने के लिए यह दिवस मनाया जाता है।
सवाल 3: लखनऊ में 14 अगस्त 2026 को क्या कार्यक्रम हुआ?
उत्तर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर कार्यक्रम में हिस्सा लिया
और सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा से लोकभवन तक मौन मार्च का नेतृत्व किया।
सवाल 4: कार्यक्रम में कौन-कौन शामिल हुए?
उत्तर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और
केशव प्रसाद मौर्य सहित कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौन मार्च में शामिल हुए।
सवाल 5: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की घोषणा कब हुई थी?
उत्तर: 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की घोषणा वर्ष 2021 में की गई थी।
सवाल 6: इस दिवस का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और
देश की अखंडता को मजबूत करना इसका प्रमुख संदेश है।
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