गोरखपुर: शहर में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे का खतरा एक बार फिर सामने आया है। बसंतपुर निवासी सैनिटरी और पाइप फिटिंग के थोक कारोबारी मनोज कुमार बरनवाल इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि वह सुबह हार्वर्ड बांध की ओर से अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में हवा में फैला मांझा उनकी गर्दन में फंस गया और त्वचा को बुरी तरह काट दिया।
हादसे के बाद उनकी गर्दन से तेज रक्तस्राव होने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल मदद करते हुए उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने गर्दन में हुए गहरे घाव का उपचार किया और जानकारी के मुताबिक उन्हें 8 से 10 टांके लगाए गए। समय पर इलाज मिलने के बाद उनकी हालत संभाली जा सकी।
अचानक गर्दन में फंसा जानलेवा मांझा
मनोज कुमार बरनवाल सामान्य रूप से अपने घर की ओर लौट रहे थे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि सड़क के रास्ते में मौजूद बेहद पतला मांझा उनके लिए गंभीर खतरा बन जाएगा। अचानक मांझा उनकी गर्दन से टकराया और कट लग गया।
चाइनीज मांझे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह कई बार दूर से दिखाई नहीं देता। दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए ऐसी स्थिति में अचानक सामने आया मांझा गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। गर्दन और चेहरे जैसे संवेदनशील हिस्सों पर कट लगने से स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
प्रतिबंध के बावजूद इस्तेमाल पर उठे सवाल
चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर रोक के बावजूद इसके उपलब्ध होने और इस्तेमाल किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। गोरखपुर की इस घटना ने एक बार फिर प्रतिबंधित मांझे की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर प्रभावी निगरानी की जरूरत को सामने ला दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल प्रतिबंध घोषित कर देना पर्याप्त नहीं है।
प्रतिबंधित मांझे की बिक्री करने वालों और इसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ नियमित जांच और
सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि सड़क पर निकलने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
राहगीरों और दोपहिया चालकों के लिए बढ़ा खतरा
सुबह और शाम के समय सड़कों पर बड़ी संख्या में लोग आवाजाही करते हैं।
ऐसे समय में यदि सड़क या उसके आसपास मांझा फैला हो तो दोपहिया वाहन चालक,
साइकिल सवार और पैदल लोग आसानी से इसकी चपेट में आ सकते हैं।
चाइनीज मांझे से केवल इंसानों को ही खतरा नहीं रहता, बल्कि पक्षियों और
अन्य जीवों के लिए भी यह गंभीर जोखिम पैदा करता है। यही वजह है कि
इसके इस्तेमाल पर रोक को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी माना जाता है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
मनोज कुमार बरनवाल के साथ हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
लोगों की मांग है कि शहर के संवेदनशील इलाकों में प्रतिबंधित
मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाए।
साथ ही ऐसे स्थानों की पहचान कर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है,
जहां पतंगबाजी के दौरान मांझे के सड़क पर फैलने की आशंका अधिक रहती है। लोगों का कहना है कि
किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
गोरखपुर में कारोबारी की गर्दन पर चाइनीज मांझे से लगी चोट यह याद दिलाती है कि प्रतिबंधित
मांझा केवल पतंग उड़ाने का सामान नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
समय रहते सख्ती और जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, ताकि आने वाले दिनों में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
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