राकेश शर्मा की रिपोर्ट
गोरखपुर, उत्तर प्रदेश | 2 नवंबर 2026
गोरखपुर के बेलघाट क्षेत्र में स्थित विद्युत उपकेंद्र चिल्लूपार का नाम बदलकर रतनपुर किए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय स्तर पर इसे निर्माण में कथित अनियमितताओं और पुरानी तकनीकी जांच रिपोर्ट से जुड़े सवालों को दबाने की कोशिश बताया जा रहा है। वहीं, क्षेत्रीय विधायक ने उपकेंद्र की बदहाल स्थिति सुधारने की बात कही है।
मुख्य समाचार
गोरखपुर। विद्युत विभाग के एक उपकेंद्र का नाम बदलने को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ महीने पहले विद्युत उपकेंद्र चिल्लूपार का नाम बदलकर विद्युत उपकेंद्र रतनपुर कर दिया गया। इस बदलाव के बाद उपकेंद्र के निर्माण स्थल, उसकी तकनीकी स्थिति और वर्षों तक बंद रहने के पीछे की परिस्थितियों को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाया जा रहा है कि नाम परिवर्तन के जरिए पुराने निर्माण से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
दरअसल, सपा सरकार के कार्यकाल में बड़हलगंज विकासखंड के चिल्लूपार क्षेत्र के लिए करोड़ों रुपये की लागत से विद्युत उपकेंद्र का निर्माण प्रस्तावित किया गया था। आरोप है कि तत्कालीन विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से उपकेंद्र का निर्माण उसके निर्धारित स्थान चिल्लूपार में कराने के बजाय लगभग 40 किलोमीटर दूर बेलघाट विकासखंड के रतनपुर गांव में करा दिया गया।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रतनपुर गांव घाघरा नदी के बाढ़ प्रभावित निचले क्षेत्र में स्थित है। ऐसे में उपकेंद्र के निर्माण के लिए इस स्थान का चयन किस आधार पर किया गया, इसको लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, उपकेंद्र का निर्माण होने के बाद भी यह लगभग सात वर्षों तक बंद पड़ा रहा। इस दौरान करोड़ों रुपये की लागत से तैयार विद्युत ढांचे का अपेक्षित उपयोग नहीं हो सका।
सात साल तक बंद रहने के बाद वर्ष 2022 में हुआ संचालन
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता रमेश श्रीवास्तव ने धुरियापार विद्युत उपकेंद्र के फीडर पर बढ़ते विद्युत भार की समस्या को कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई थी। इसके तहत धुरियापार उपकेंद्र के अहिरौली फीडर से जुड़े लगभग 10 से 12 गांवों को चिल्लूपार उपकेंद्र से जोड़कर विद्युत आपूर्ति शुरू कराई गई।
शुरुआत में यह व्यवस्था सीमित गांवों के लिए की गई थी, लेकिन वर्तमान समय में लगभग 20 से 22 गांवों को इस उपकेंद्र से बिजली आपूर्ति की जा रही है। इसके संचालन और देखरेख के लिए एक अवर अभियंता तथा लगभग एक दर्जन संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके बावजूद उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि संबंधित गांवों के उपभोक्ताओं को आज भी धुरियापार विद्युत उपकेंद्र की आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है।
जर्जर 33 हजार वोल्ट की लाइन से उपभोक्ता परेशान
उपकेंद्र के संचालन में सबसे बड़ी समस्या 33 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन की जर्जर स्थिति बताई जा रही है। स्थानीय स्तर पर शिकायत है कि लाइन की हालत खराब होने के कारण आए दिन फाल्ट होता रहता है। कई बार विद्युत आपूर्ति बहाल करने में कई घंटे लग जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में समस्या दूर करने में कई दिनों तक का समय लग जाता है।
इसका सीधा असर क्षेत्र के लगभग 20 से 22 गांवों के बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। किसानों, छोटे कारोबारियों और घरेलू उपभोक्ताओं को अनियमित बिजली आपूर्ति के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
वर्ष 2014 की तकनीकी जांच रिपोर्ट भी चर्चा में
इस पूरे मामले में वर्ष 2014 की एक तकनीकी जांच रिपोर्ट का भी उल्लेख किया जा रहा है। बताया जाता है कि लखनऊ से आई तकनीकी टीम ने अपनी रिपोर्ट में विद्युत उपकेंद्र चिल्लूपार को संचालन के योग्य नहीं माना था।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि इस रिपोर्ट के बावजूद उपकेंद्र को संचालित कराने की कोशिश की गई। इसके बाद पुराने नाम को बदलकर विद्युत उपकेंद्र रतनपुर किए जाने को लेकर यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं ऐसा तकनीकी जांच रिपोर्ट और पुराने निर्माण से जुड़े सवालों से बचने के लिए तो नहीं किया गया।
हालांकि, नाम परिवर्तन के पीछे विभाग का वास्तविक कारण क्या है और वर्ष 2014 की तकनीकी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष दिए गए थे, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आना आवश्यक है।
विधायक ने उपकेंद्र की स्थिति सुधारने की पहल की
क्षेत्रीय विधायक राजेश त्रिपाठी ने भी उपकेंद्र की स्थिति को लेकर अपनी चिंता जताई है। उनका मानना है कि विद्युत उपकेंद्र का निर्माण निचले क्षेत्र में हो जाने के कारण इसके संचालन में समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं।
विधायक के अनुसार, उन्होंने तत्काल अधिशासी अभियंता सिकरीगंज से बातचीत कर उपकेंद्र को बेहतर ढंग से संचालित कराने के लिए आवश्यक एस्टीमेट तैयार करके देने को कहा है। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि उपकेंद्र की तकनीकी कमियों को दूर करने और बिजली आपूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।
अब क्षेत्रीय उपभोक्ताओं की निगाहें विद्युत विभाग के अधिकारियों पर टिकी हैं।
लोगों की मांग है कि उपकेंद्र के निर्माण, स्थान चयन, तकनीकी जांच रिपोर्ट,
नाम परिवर्तन और वर्तमान संचालन व्यवस्था की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही समस्याओं का स्थायी समाधान हो सके।
Headings
सात साल तक बंद रहने के बाद वर्ष 2022 में हुआ संचालन
जर्जर 33 हजार वोल्ट की लाइन से उपभोक्ता परेशान
वर्ष 2014 की तकनीकी जांच रिपोर्ट भी चर्चा में
विधायक ने उपकेंद्र की स्थिति सुधारने की पहल की
Facts/Details
विद्युत उपकेंद्र चिल्लूपार-रतनपुर से जुड़े प्रमुख तथ्य:
- पुराना नाम: विद्युत उपकेंद्र चिल्लूपार।
- वर्तमान नाम: विद्युत उपकेंद्र रतनपुर।
- निर्माण क्षेत्र: रतनपुर गांव, विकासखंड बेलघाट, गोरखपुर।
- निर्धारित स्थान: चिल्लूपार, विकासखंड बड़हलगंज।
- स्थान परिवर्तन का आरोप: लगभग 40 किलोमीटर दूर निर्माण कराए जाने का दावा।
- निर्माण के बाद स्थिति: लगभग सात वर्षों तक बंद रहने की जानकारी।
- संचालन: वर्ष 2022 में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत शुरू हुआ।
- लाभान्वित गांव: वर्तमान में लगभग 20 से 22 गांव।
- मुख्य समस्या: 33 हजार वोल्ट की जर्जर विद्युत लाइन।
- तकनीकी रिपोर्ट: वर्ष 2014 में लखनऊ से आई टीम की जांच का उल्लेख।
- विधायक: राजेश त्रिपाठी।
- प्रस्तावित पहल: उपकेंद्र को बेहतर संचालित करने के लिए एस्टीमेट तैयार कराने की बात
Statement
क्षेत्रीय विधायक राजेश त्रिपाठी का कहना है कि विद्युत उपकेंद्र का निर्माण निचले क्षेत्र में हो गया है।
जिसके कारण इसके संचालन में समस्याएं आ रही हैं।
उन्होंने इस संबंध में अधिशासी अभियंता सिकरीगंज से बातचीत कर उपकेंद्र को अच्छी तरह संचालित कराने के लिए आवश्यक एस्टीमेट तैयार करके देने को कहा है।
क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि विभाग जल्द ही तकनीकी कमियों को दूर कर नियमित विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. चिल्लूपार विद्युत उपकेंद्र का नया नाम क्या है?
इसका नाम बदलकर विद्युत उपकेंद्र रतनपुर कर दिया गया है।
Q2. विद्युत उपकेंद्र रतनपुर कहां स्थित है?
यह गोरखपुर जिले के बेलघाट विकासखंड के रतनपुर गांव में स्थित है।
Q3. उपकेंद्र का संचालन कब शुरू हुआ था?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022 में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत इसका संचालन शुरू कराया गया था।
Q4. उपकेंद्र से कितने गांवों को बिजली मिलती है?
वर्तमान में लगभग 20 से 22 गांवों को इससे विद्युत आपूर्ति की जाती है।
Q5. उपकेंद्र की सबसे बड़ी समस्या क्या है?
33 हजार वोल्ट की जर्जर विद्युत लाइन और बार-बार होने वाले फाल्ट इसकी प्रमुख समस्याएं बताई जा रही हैं।
Conclusion
चिल्लूपार से रतनपुर हुए विद्युत उपकेंद्र का मामला केवल नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं है।
निर्माण स्थल, तकनीकी जांच और बिजली आपूर्ति की समस्याओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है,
ताकि क्षेत्र के उपभोक्ताओं को स्थायी समाधान और निर्बाध बिजली मिल सके।