राकेश शर्मा की रिपोर्ट
श्रावण मास में शिव पूजन से दूर होते हैं दुःख-कष्ट: आचार्य विनोद
श्रावण मास भगवान शिव की आराधना और भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इसी धार्मिक भावना के बीच विकासखंड गोला के देवकली (कुड़वाआम) गांव स्थित पृथ्वी नाथ शिव मंदिर परिसर में शिव महापुराण कथा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में चल रहा है। कथा में अयोध्या से पधारे सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य विनोद जी महाराज व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा, शिव तत्व और सनातन परंपरा में रुद्राभिषेक के महत्व का वर्णन कर रहे हैं।
महादेव सर्व समर्थ, शिव आराधना से मिलता है आध्यात्मिक संबल
कथा के दौरान आचार्य विनोद जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव को सनातन परंपरा में सर्वसमर्थ देव के रूप में पूजा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव की आराधना मनुष्य को आध्यात्मिक शांति और मुक्ति की दिशा में ले जाती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को शिव भक्ति के महत्व को समझाते हुए कहा कि सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना गया है।
उन्होंने कहा कि श्रावण मास में शिवलिंग पर दूध की धारा से अभिषेक करने की परंपरा प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार भगवान शिव का जल, दूध तथा अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में इसे मनोरथ पूर्ति और संकटों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।
शिव वेद स्वरूप हैं, सनातन संस्कृति में वेदों की अनुपम महिमा
आचार्य विनोद ने कथा में भगवान शिव के स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि शिव को वेद स्वरूप माना गया है। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में वेदों की अनुपम महिमा है। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में वेदों को अनादि और अपौरुषेय माना जाता है।
कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों और उनके आध्यात्मिक महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि शिव और ब्रह्म के संबंध को समझना भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण आधार है।
रुद्र नाम का अर्थ और भगवान शिव की महिमा
आचार्य विनोद जी महाराज ने कहा कि भगवान शिव को रुद्र भी कहा जाता है। धार्मिक व्याख्या के अनुसार रुद्र नाम भगवान शिव के उस स्वरूप को दर्शाता है, जो दुःख और संकट के विनाश से जुड़ा हुआ है। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया कि शिव आराधना में रुद्राभिषेक की विशेष धार्मिक मान्यता है।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया रुद्राभिषेक भक्त के मन में सकारात्मक ऊर्जा, आध्यात्मिक शांति और भगवान शिव के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत करता है। कथा के दौरान उन्होंने रुद्राभिषेक से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए पुत्र प्राप्ति, धन-धान्य, संपन्नता और स्वास्थ्य की कामना से इसके किए जाने की परंपरा के बारे में भी बताया।
श्रावण में शिव भक्ति का विशेष महत्व
श्रावण मास आते ही देशभर में शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है। श्रद्धालु भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार पूजा-अर्चना करते हैं। गोरखपुर के देवकली स्थित पृथ्वी नाथ शिव मंदिर परिसर में भी शिव महापुराण कथा के कारण भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।
कथा में भगवान शिव की महिमा, सनातन परंपरा, शिव तत्व और धार्मिक जीवन में भक्ति के महत्व को सरल भाषा में श्रद्धालुओं के सामने रखा जा रहा है। कथा सुनने के लिए आसपास के गांवों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
आरती के साथ हुआ कथा का शुभारंभ
शनिवार को शिव महापुराण कथा का शुभारंभ ई. कृष्ण गोपाल दुबे द्वारा व्यास पीठ की
आरती करके किया गया। आरती के दौरान मंदिर परिसर में
श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कथा स्थल पर
धार्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान किया और भगवान शिव की महिमा का श्रवण किया।
कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी
देवकली (कुड़वाआम) स्थित पृथ्वी नाथ शिव मंदिर परिसर में चल रही शिव महापुराण कथा
श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। कथा के दौरान भगवान
शिव से जुड़े प्रसंगों को सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव में डूबे नजर आए।
आयोजन में प्रमुख रूप से अस्सी संगम दुबे, अमरचंद दुबे, भवानी प्रसाद दुबे,
डॉ. धरणीधर दुबे, विजय दुबे, श्याम देव यादव, दयाशंकर दुबे, अशोक दीक्षित,
राघवेंद्र दुबे और यमुना सिंह सहित तमाम श्रद्धालु मौजूद रहे।
शिव महापुराण कथा से भक्तिमय हुआ देवकली
शिव महापुराण कथा के आयोजन से देवकली और आसपास के क्षेत्र में
धार्मिक वातावरण बना हुआ है। श्रावण मास में भगवान शिव की कथा और
पूजा-अर्चना के इस आयोजन में श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिल रही है।
व्यास पीठ से आचार्य विनोद जी महाराज द्वारा भगवान शिव की महिमा का वर्णन किया जा रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए शिव महापुराण कथा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं,
बल्कि भगवान शिव के प्रति आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक
चिंतन का अवसर भी बन रही है। कथा के माध्यम से सनातन परंपरा,
वेदों की महिमा और शिव आराधना के धार्मिक महत्व को श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है।
