गोरखपुर में जमीन घोटाले का बड़ा खुलासा, 1979 में मृत महिला के नाम पर हुई रजिस्ट्री

गोरखपुर में फर्जी विरासत और जमीन रजिस्ट्री का चौंकाने वाला मामला

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के हरनही थाना क्षेत्र के डोहरिया प्राणनाथ गांव से जमीन हड़पने का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और दस्तावेजी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि करीब 46 साल पहले मृत हो चुकी महिला को सरकारी अभिलेखों में जीवित दर्शाकर पहले उसकी विरासत दर्ज कराई गई और फिर कुछ ही दिनों के भीतर जमीन की रजिस्ट्री भी करा दी गई। मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैंसर पीड़ित व्यक्ति की जमीन पर नजर

जानकारी के अनुसार गांव निवासी विंध्याचल निषाद कैंसर से पीड़ित हैं। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। उनके बड़े भाई निडूरी निषाद की वर्ष 1979 में हत्या हो गई थी, जबकि उनकी पत्नी प्रभावती देवी का निधन वर्ष 1981 में हो चुका था। चूंकि निडूरी और प्रभावती की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उनकी संपत्ति का नामांतरण बाद में विंध्याचल निषाद के नाम दर्ज किया गया था।

मृत महिला को दस्तावेजों में दिखाया गया जिंदा

आरोप है कि कुछ लोगों ने विंध्याचल निषाद की बीमारी और कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के जरिए वर्षों पहले मृत हो चुकी भानमती देवी को जीवित दिखाया गया और उसका नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज करा दिया गया। इस खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।

तीन दिन में विरासत से रजिस्ट्री तक पूरा खेल

सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पहले विरासत दर्ज कराई गई और उसके मात्र तीन दिन बाद जमीन की रजिस्ट्री भी पूरी कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी तेजी से पूरी प्रक्रिया का संपन्न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह संगठित जमीन घोटाले का मामला माना जा सकता है।

पांच लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। जांच एजेंसियां अब विरासत, नामांतरण और रजिस्ट्री से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की गहन जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जालसाजी और धोखाधड़ी की धाराएं लग सकती हैं

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि जांच में यह साबित होता है कि मृत महिला को जानबूझकर जीवित दिखाकर दस्तावेज तैयार किए गए, तो आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में कठोर सजा का भी प्रावधान है।

जमीन फर्जीवाड़े के बढ़ते मामलों ने बढ़ाई चिंता

उत्तर प्रदेश समेत देश के कई राज्यों में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े लगातार सामने आ रहे हैं। मृत व्यक्तियों को जीवित दिखाना, फर्जी वारिस तैयार करना और नकली दस्तावेजों के आधार पर

संपत्ति का हस्तांतरण करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण और

आधार आधारित सत्यापन को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

ग्रामीणों में आक्रोश, जांच पर टिकी नजरें

घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि

यदि समय रहते इस फर्जीवाड़े का खुलासा नहीं होता तो

असली हकदारों को अपनी जमीन से हाथ धोना पड़ सकता था।

अब सभी की नजर पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हुई है।

गोरखपुर के डोहरिया प्राणनाथ गांव में सामने आया यह कथित जमीन घोटाला

प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

46 साल पहले मृत महिला को जिंदा दिखाकर विरासत और

रजिस्ट्री कराने के आरोप बेहद गंभीर हैं। पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी,

लेकिन इस घटना ने जमीन संबंधी फर्जीवाड़े को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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