सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: Order XXI Rule 22 का नोटिस नहीं देने से DRT Auction Sale पर असर नहीं

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने Debt Recovery Tribunal (DRT) के जरिए होने वाली संपत्ति नीलामी को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। अदालत ने कहा है कि सिर्फ Order XXI Rule 22 CPC के तहत नोटिस की सेवा नहीं होने के आधार पर DRT की नीलामी बिक्री को अमान्य नहीं माना जा सकता।

Order XXI Rule 22 सामान्य सिविल कोर्ट की निष्पादन कार्यवाही में कुछ परिस्थितियों में डिक्री के निष्पादन से पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस देने से जुड़ा प्रावधान है।

क्या था पूरा मामला?

मामला ऐसी निष्पादन कार्यवाही से जुड़ा था, जो शुरुआत में सिविल कोर्ट के समक्ष चल रही थी। बाद में कानून के तहत इसे Debt Recovery Tribunal (DRT) के समक्ष स्थानांतरित कर दिया गया। बकाया ऋण की वसूली के लिए DRT की प्रक्रिया के तहत संपत्ति की नीलामी की गई।

नीलामी के बाद संपत्ति से जुड़े पक्षों ने बिक्री की वैधता पर सवाल उठाया। उनका मुख्य तर्क था कि उन्हें Order XXI Rule 22 CPC के तहत आवश्यक नोटिस नहीं दिया गया था, इसलिए नीलामी बिक्री को रद्द किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?

शीर्ष अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि DRT के समक्ष स्थानांतरित वसूली कार्यवाही को सामान्य सिविल कोर्ट की निष्पादन प्रक्रिया के बिल्कुल समान नहीं माना जा सकता।

DRT की कार्यवाही संबंधित विशेष कानून और उसके तहत बनाए गए नियमों से संचालित होती है। इसलिए केवल CPC के Order XXI Rule 22 के नोटिस की अनुपस्थिति को आधार बनाकर नीलामी बिक्री को स्वतः अमान्य नहीं किया जा सकता।

DRT की विशेष वसूली प्रक्रिया महत्वपूर्ण

बैंकों और वित्तीय संस्थानों के बकाया ऋण की वसूली के लिए DRT व्यवस्था बनाई गई है। इस प्रक्रिया में Recovery Officer को कानून के तहत संपत्ति की कुर्की और बिक्री सहित विभिन्न कदम उठाने के अधिकार प्राप्त होते हैं।

इसलिए जब कोई मामला विशेष कानून के तहत DRT की प्रक्रिया में पहुंच जाता है, तो उसकी वैधता का परीक्षण करते समय संबंधित विशेष कानून, नियमों और पूरी वसूली प्रक्रिया को ध्यान में रखना आवश्यक होता है।

क्या हर DRT Auction Sale अब चुनौती से बाहर होगी?

नहीं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अर्थ यह नहीं है कि DRT द्वारा की गई हर नीलामी को कभी चुनौती नहीं दी जा सकती।

यदि किसी मामले में कानून के अनिवार्य प्रावधानों का उल्लंघन, गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितता, धोखाधड़ी या किसी अन्य वैध कानूनी आधार का सवाल हो, तो संबंधित पक्ष उपलब्ध कानूनी उपाय अपना सकता है।

फैसले का मुख्य बिंदु केवल यह है कि Order XXI Rule 22 CPC के नोटिस की गैर-सेवा मात्र को DRT Auction Sale रद्द करने का स्वतः आधार नहीं बनाया जा सकता।

बैंक और वित्तीय संस्थानों के लिए अहम

यह निर्णय बैंकिंग और ऋण वसूली से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण हो सकता है। बकाया ऋण की वसूली के दौरान संपत्ति की नीलामी कई मामलों में अंतिम चरणों में से एक होती है।

यदि प्रत्येक नीलामी को केवल सामान्य सिविल प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी आधार पर चुनौती देकर रोक दिया जाए, तो

ऋण वसूली की प्रक्रिया लंबी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से DRT की विशेष प्रक्रिया और

CPC के सामान्य प्रावधानों के बीच अंतर को समझने में मदद मिलती है।

Auction Purchasers के लिए भी महत्वपूर्ण

DRT की नीलामी में संपत्ति खरीदने वाले लोगों के लिए भी यह फैसला महत्वपूर्ण है।

नीलामी खरीददार आम तौर पर इस उम्मीद में बोली लगाते हैं कि

कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें संपत्ति का अधिकार मिलेगा।

ऐसे में केवल Order XXI Rule 22 के नोटिस से जुड़े आधार पर बिक्री को चुनौती दिए

जाने की स्थिति में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितता को यह फैसला सीमित करता है।

हालांकि, खरीददारों को किसी भी DRT नीलामी में बोली लगाने से

पहले संपत्ति के रिकॉर्ड और लंबित कानूनी विवादों की जांच करना फिर भी जरूरी है।

Order XXI Rule 22 और DRT में अंतर क्यों अहम?

सामान्य सिविल निष्पादन प्रक्रिया में Order XXI Rule 22 कुछ निर्धारित

परिस्थितियों में नोटिस से संबंधित है। CPC के अनुसार, उदाहरण के लिए,

जब निष्पादन आवेदन डिक्री की तारीख से दो वर्ष से अधिक समय बाद किया जाता है, तो

संबंधित परिस्थितियों में नोटिस का प्रावधान लागू होता है।

लेकिन DRT की ऋण वसूली कार्यवाही विशेष कानून के तहत संचालित होती है।

इसलिए अदालत ने इस अंतर को महत्वपूर्ण माना है।

पुराने मामलों से अलग है DRT की स्थिति

सिविल कोर्ट की नीलामी में Order XXI के विभिन्न प्रावधानों के अनुपालन को

लेकर सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों में गंभीरता दिखाई गई है।

सामान्य सिविल निष्पादन में नोटिस और बिक्री की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों का

उल्लंघन कुछ परिस्थितियों में बिक्री की वैधता को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन DRT के सामने आने वाले मामलों में यह देखना जरूरी है कि

संबंधित वसूली कार्यवाही किस विशेष कानून और नियमों के तहत संचालित हुई है।

फैसले का व्यापक असर

इस फैसले से बैंक, वित्तीय संस्थान, ऋणदाता, DRT में मुकदमे लड़ने वाले पक्ष और

नीलामी में संपत्ति खरीदने वाले लोगों के लिए कानूनी स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, किसी विशेष मामले में नीलामी बिक्री वैध है या नहीं, इसका फैसला केवल

इस एक आधार से नहीं किया जा सकता। संबंधित DRT आदेश, नीलामी नोटिस, बिक्री प्रमाणपत्र,

वसूली प्रक्रिया और लागू कानूनों की पूरी जांच आवश्यक होगी।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का प्रमुख संदेश यह है कि DRT Auction Sale को केवल

इस आधार पर अमान्य नहीं किया जा सकता कि

Order XXI Rule 22 CPC का नोटिस नहीं दिया गया था। DRT की विशेष वसूली प्रक्रिया और

उसके लिए लागू कानूनों को ध्यान में रखकर नीलामी की वैधता का परीक्षण किया जाएगा।

यह फैसला बैंकिंग, ऋण वसूली और DRT से जुड़ी संपत्ति नीलामियों के लिए महत्वपूर्ण

कानूनी स्पष्टीकरण के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, किसी खास संपत्ति या नीलामी विवाद में

अंतिम कानूनी स्थिति तथ्यों और लागू प्रावधानों पर निर्भर करेगी।

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