गोरखपुर। ऑनलाइन गेमिंग पोर्टल ‘रेडी अन्ना’ के जरिए कथित तौर पर सट्टे का नेटवर्क संचालित करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का शाहपुर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सेमरा नंबर-2 में पानी की टंकी के पास स्थित एक मकान में छापा मारकर पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपित अलग-अलग लोगों के नाम पर खुलवाए गए बैंक खातों को म्यूल अकाउंट के तौर पर इस्तेमाल कर सट्टे की रकम का डिपॉजिट और विड्रॉल कराते थे।
पुलिस की कार्रवाई के बाद सामने आया है कि इस नेटवर्क में बड़ी संख्या में बैंक खाते, मोबाइल फोन, लैपटाप, टैबलेट, एटीएम कार्ड और बैंक पासबुक का इस्तेमाल किया जा रहा था। पुलिस के मुताबिक गिरोह के माध्यम से रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन किया जाता था। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के जरिए पुलिस अब पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
मुखबिर की सूचना पर शाहपुर पुलिस ने की छापेमारी
पुलिस को सूचना मिली थी कि सेमरा नंबर-2 इलाके में एक मकान से ऑनलाइन सट्टे से जुड़े लेन-देन का संचालन किया जा रहा है। सूचना के आधार पर शाहपुर पुलिस की टीम ने मकान पर दबिश दी। पुलिस के पहुंचने पर वहां पांच लोग मौजूद मिले। तलाशी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बैंकिंग से जुड़े दस्तावेज मिले।
पुलिस ने जब आरोपितों से इन सामानों और बैंक खातों के संबंध में जानकारी मांगी तो वे संतोषजनक अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सके। पुलिस के अनुसार, बरामद बैंक खातों के वास्तविक खाताधारकों के बारे में भी आरोपित स्पष्ट जानकारी नहीं दे पाए।
म्यूल खातों के जरिए होती थी रकम की आवाजाही
पूछताछ में आरोपितों ने कथित तौर पर बताया कि वे ‘रेडी अन्ना’ पोर्टल का पैनल खरीदकर उसकी एक ब्रांच के रूप में अपना कार्यालय चला रहे थे। सट्टे से आने वाली रकम को सीधे अपने खातों में लेने के बजाय अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे।
इन खातों का इस्तेमाल सट्टे की रकम जमा कराने और निकालने के लिए किया जाता था। ऐसे बैंक खातों को आमतौर पर म्यूल अकाउंट कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या नेटवर्क की रकम को इधर-उधर करने के लिए किया जाता है।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य खाताधारकों को अलग-अलग तरीके से जोड़ते थे और उनके बैंकिंग दस्तावेजों का इस्तेमाल लेन-देन के लिए करते थे। रकम आने और निकासी के बाद गिरोह के सदस्यों के बीच हिस्सेदारी बांटे जाने की बात भी पूछताछ में सामने आई है।
23 मोबाइल और कई लैपटाप बरामद
शाहपुर पुलिस की कार्रवाई में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, मौके से 23 मोबाइल फोन, तीन लैपटाप, एक मिनी लैपटाप और तीन टैबलेट बरामद किए गए।
इसके अलावा पुलिस को 11 एटीएम कार्ड और 16 बैंक पासबुक भी मिली हैं। एक बायोमेट्रिक डिवाइस, राउटर, पावर बैंक, स्पाई कार्ड, चार्जर और डेटा केबल समेत अन्य सामान भी बरामद हुआ है।
पुलिस अब इन उपकरणों की तकनीकी जांच कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनसे किन-किन लोगों से संपर्क किया गया और किन बैंक खातों में रकम भेजी या निकाली गई।
दो पैन कार्ड और पहचान से जुड़े दस्तावेज भी मिले
छापेमारी के दौरान पुलिस को बैंकिंग और पहचान से जुड़े कई दस्तावेज भी मिले हैं। बरामद सामान में दो पैन कार्ड, दो आधार कार्ड और निर्वाचन कार्ड शामिल हैं। पुलिस इन दस्तावेजों की जांच कर रही है।
जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि जिन लोगों के नाम पर बैंक खाते संचालित किए जा रहे थे, वे वास्तव में इस नेटवर्क से जुड़े थे या उनके दस्तावेजों का किसी अन्य तरीके से इस्तेमाल किया गया। पुलिस खाताधारकों और आरोपितों के बीच संबंधों की भी जांच कर रही है।
पांच आरोपित गिरफ्तार
शाहपुर पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान नितीश सिंह निवासी बासोपट्टी, देवरिया, अभय कुमार सिंह निवासी बंगरुआ, देवरिया, वजीद चौधरी और साहिल चौधरी निवासी अरसौली, मुजफ्फरनगर तथा मुन्ना कुमार निवासी नारायनपुर, सिवान, बिहार के रूप में हुई है।
पुलिस ने सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क से जुड़े बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है।
तीन आरोपित अभी पुलिस की पकड़ से बाहर
पुलिस जांच में तीन अन्य नाम भी सामने आए हैं। इनमें नितिश प्रताप सिंह, संजीव सिंह और सुनीश कुमार सिंह शामिल हैं। पुलिस ने इन्हें वांछित किया है। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
साथ ही पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह का नेटवर्क केवल गोरखपुर तक सीमित था या इसके तार उत्तर प्रदेश के दूसरे जिलों और अन्य राज्यों तक भी जुड़े हुए हैं।
रोजाना लाखों रुपये के लेन-देन की जांच
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू बैंक खातों के जरिए होने वाला वित्तीय लेन-देन है। पुलिस के अनुसार, गिरोह के माध्यम से रोजाना लाखों रुपये की रकम का लेन-देन किया जाता था।
अब जांच एजेंसियां बरामद बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आधार पर लेन-देन का पूरा ब्योरा जुटाने में लगी हैं। किन खातों में रकम आई, किन खातों से निकली, रकम किस व्यक्ति या नेटवर्क तक पहुंची और इस प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे—इन सभी बिंदुओं पर जांच की जा रही है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से खुल सकता है पूरा नेटवर्क
पुलिस को बरामद 23 मोबाइल फोन, लैपटाप और टैबलेट से महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।
इन उपकरणों में मौजूद चैट, कॉल रिकॉर्ड, संपर्क नंबर,
बैंकिंग संबंधी जानकारी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।
जांच के दौरान यदि दूसरे लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ऑनलाइन सट्टे के
इस नेटवर्क में रकम जमा करने और निकालने के लिए कितने बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया।
पोर्टल का पैनल लेकर चला रहे थे ब्रांच
पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार आरोपितों ने कथित तौर पर ‘रेडी अन्ना’
पोर्टल का पैनल खरीदकर एक ब्रांच के रूप में कार्यालय संचालित किया था। पुलिस अब इस दावे और
पोर्टल से जुड़े तकनीकी तथा वित्तीय कनेक्शन की जांच कर रही है।
जांच का उद्देश्य यह पता लगाना भी है कि स्थानीय स्तर पर संचालित इस नेटवर्क का
संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे अन्य कौन-कौन से लोग या संस्थाएं जुड़ी थीं।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा
शाहपुर थाने में इस मामले में मुकदमा अपराध संख्या 401/2026 दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मुकदमा बीएनएस की धारा 112(2), 318(4) और 61(2) के तहत दर्ज किया गया है।
मामले में गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस बरामद सामान को जांच का हिस्सा बनाकर डिजिटल और बैंकिंग साक्ष्यों को खंगाल रही है।
*पुलिस की जांच में सामने आ सकते हैं और नाम
पुलिस का कहना है कि अभी जांच शुरुआती चरण में है।
बरामद मोबाइल फोन, लैपटाप, टैबलेट, बैंक पासबुक और
एटीएम कार्ड की जांच से गिरोह के नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जिन लोगों के नाम पर
बैंक खाते खोले गए, उन्हें इसके बदले पैसे दिए गए थे या
उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल किया गया। बैंक खातों के वास्तविक
खाताधारकों से पूछताछ के बाद इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सट्टे के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई
गोरखपुर में ऑनलाइन सट्टे के नेटवर्क के खिलाफ शाहपुर पुलिस की
यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पुलिस की कार्रवाई से यह संकेत मिलता है कि
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चलने वाले सट्टे के नेटवर्क में केवल डिजिटल माध्यम ही नहीं,
बल्कि बैंक खातों और पहचान दस्तावेजों का भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के
मुख्य संचालकों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। तीन वांछित आरोपितों की गिरफ्तारी और
बैंकिंग लेन-देन की जांच के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना है।
क्या-क्या हुआ बरामद?
पुलिस के अनुसार कार्रवाई में 23 मोबाइल फोन, तीन लैपटाप, एक मिनी लैपटाप, तीन टैबलेट, 11 एटीएम कार्ड
16 बैंक पासबुक, एक बायोमेट्रिक डिवाइस, राउटर, पावर बैंक, स्पाई कार्ड, दो पैन कार्ड,
दो आधार कार्ड, निर्वाचन कार्ड, चार्जर, डेटा केबल और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।
इन सामानों को पुलिस ने जांच में शामिल कर लिया है। डिजिटल उपकरणों और
बैंकिंग दस्तावेजों से मिलने वाली जानकारी इस मामले की आगे की जांच में अहम भूमिका निभा सकती है।
गोरखपुर ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क मामले में आगे क्या?
फिलहाल पुलिस का फोकस गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ, फरार
आरोपितों की गिरफ्तारी और बैंक खातों की जांच पर है। इसके साथ ही
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में कितने लोग सक्रिय थे और
रोजाना होने वाला कथित लाखों रुपये का लेन-देन किन-किन खातों के माध्यम से किया जाता था।
मामले की जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क की वास्तविक आर्थिक गतिविधियों और
इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकेगी।
read this post :बड़हलगंज में महिला से मंगलसूत्र झपटने वाला आरोपी गिरफ्तार, कुशीनगर से चोरी बाइक बरामद