भदोही MP-MLA कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व विधायक विजय मिश्रा समेत परिवार को सजा

Bhadohi News: 895 दिन चली सुनवाई के बाद आया बड़ा फैसला,

Bhadohi की एमपी-एमएलए कोर्ट ने चर्चित कब्जा और माइनिंग फर्म नियंत्रण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व विधायक Vijay Mishra, उनकी पत्नी पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा और बेटे विष्णु मिश्रा को 10-10 साल की सजा सुनाई है। वहीं बहू रूपा मिश्रा को चार साल की सजा दी गई है।

फैसला सुनते ही अदालत परिसर का माहौल भावुक हो गया। बताया जा रहा है कि सजा सुनाए जाने के बाद रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा कोर्ट में रोने लगीं। यह मामला लंबे समय से उत्तर प्रदेश की राजनीति और अपराध जगत में चर्चा का विषय बना हुआ था।

क्या है पूरा मामला,

यह मामला रिश्तेदार कृष्ण मोहन तिवारी की शिकायत पर दर्ज हुआ था। आरोप था कि पैतृक आवास पर कब्जा करने और माइनिंग फर्म को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश की गई।

शिकायत के आधार पर 4 अगस्त 2020 को मामला दर्ज किया गया था। पुलिस जांच के बाद 20 नवंबर 2023 को कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया गया। इसके बाद अदालत में लगातार सुनवाई चली।

895 दिनों तक चली कोर्ट में सुनवाई,

इस चर्चित केस में करीब 895 दिनों तक सुनवाई चली। मुकदमे के दौरान अदालत में कुल आठ गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान, दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने फैसला सुनाया।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला प्रदेश की चर्चित राजनीतिक और आपराधिक फाइलों में शामिल रहा है, जिस पर लंबे समय से लोगों की नजर थी।

गिरफ्तारी से लेकर सजा तक का सफर,

पूर्व विधायक विजय मिश्रा को 14 अगस्त 2020 को मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से वह जेल से बाहर नहीं आ सके।

उनके बेटे विष्णु मिश्रा को जुलाई 2022 में पुणे से गिरफ्तार किया गया था।

पुलिस ने उस समय उन पर इनाम भी घोषित किया था।

वहीं पूर्व एमएलसी रामलली मिश्रा को भी 2022 में गिरफ्तार किया गया था।

हालांकि बाद में उन्हें कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

अब दोषी ठहराए जाने के बाद उन्हें फिर जेल भेज दिया गया है।

जेल में बंद हैं विजय और विष्णु मिश्रा,

जानकारी के अनुसार विजय मिश्रा फिलहाल आगरा जेल में बंद हैं

जबकि उनका बेटा विष्णु मिश्रा लखीमपुर खीरी जेल में बंद है।

गुरुवार को कोर्ट द्वारा दोषी करार दिए जाने के बाद

रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा को भी जेल भेज दिया गया।

फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज,

इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है।

विजय मिश्रा का नाम लंबे समय से कई विवादित मामलों में सामने आता रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला प्रदेश की राजनीति में बड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है।

कोर्ट परिसर में भावुक हुआ माहौल,

फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट परिसर में भावुक माहौल देखने को मिला।

सजा का ऐलान होते ही रामलली मिश्रा और रूपा मिश्रा रोने लगीं।

वहीं सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए अदालत परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

कानून से ऊपर कोई नहीं,

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला दिखाता है कि कानून के सामने हर व्यक्ति बराबर है।

अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अपना फैसला सुनाया।

इस मामले ने एक बार फिर यह साबित किया कि लंबे समय तक चलने वाली

कानूनी प्रक्रिया के बाद भी न्यायिक व्यवस्था अपना काम करती है।