गोरखपुर से जारी एक बयान में फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद ने केंद्र और राज्य सरकारों के विभिन्न विभागों में कथित भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जवाबदेही की कमी को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जनता द्वारा चुने गए मंत्री यदि अपने विभागों की निगरानी और जनसेवा का दायित्व सही ढंग से नहीं निभा रहे हैं, तो उन्हें पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री जनता के सेवक हैं या फिर सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाने वाले अधिकारी? उनका कहना है कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने वाले मंत्रियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
बजरी माफिया और अवैध खनन पर उठाए सवाल
चंद्रभान निषाद ने आरोप लगाया कि कई क्षेत्रों में बजरी माफिया और अवैध खनन से जुड़े तत्व खुलेआम सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है और सरकार को राजस्व की भी हानि हो रही है।
उन्होंने मांग की कि अवैध खनन और माफिया तंत्र पर प्रभावी कार्रवाई की जाए तथा संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर चिंता
फिशरमैन आर्मी प्रमुख ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी, दवाओं की अनुपलब्धता और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण आम जनता परेशान है।
उनका कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री और विभागीय अधिकारी समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण करें ताकि जमीनी स्तर पर मौजूद समस्याओं का समाधान हो सके।
सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति पर नाराजगी
शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी चंद्रभान निषाद ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है, जबकि कागजों में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग को केवल आंकड़ों के बजाय वास्तविक सुधार पर ध्यान देना चाहिए
क्योंकि शिक्षा ही देश के भविष्य की नींव है।
“जनसेवा नहीं तो सुविधाएं भी नहीं”
फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि यदि कोई मंत्री अपने विभाग की
जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहा है, तो उसे सरकारी वेतन, भत्ता और
अन्य विशेष सुविधाओं का लाभ नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि
कामकाज की नियमित समीक्षा हो और लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को पद से हटाया जाए।
उनका कहना है कि जवाबदेही तय होने से सरकारी व्यवस्था में सुधार आएगा और जनता का विश्वास भी मजबूत होगा।
निजी संस्थानों और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल
चंद्रभान निषाद ने आरोप लगाया कि कई प्रभावशाली लोगों के परिवार निजी अस्पताल और
स्कूल संचालित कर रहे हैं, जबकि सरकारी संस्थानों की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
उन्होंने सरकारी फंड के उपयोग की स्वतंत्र जांच और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था की मांग की।
उनका मानना है कि यदि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो जाए तो शिक्षा,
स्वास्थ्य और बुनियादी सेवाओं की गुणवत्ता में बड़ा सुधार संभव है।
देशव्यापी जनआंदोलन की चेतावनी
फिशरमैन आर्मी प्रमुख ने कहा कि यदि विभागीय लापरवाही, भ्रष्टाचार और
जनसमस्याओं की अनदेखी जारी रही तो संगठन देशभर में जनजागरण अभियान और आंदोलन शुरू कर सकता है।
उन्होंने नागरिकों से लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील भी की।
फिशरमैन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रभान निषाद का यह बयान प्रशासनिक जवाबदेही, भ्रष्टाचार और
जनसेवा के मुद्दों को लेकर नई बहस छेड़ सकता है। स्वास्थ्य, शिक्षा, खनन और अन्य विभागों की कार्यप्रणाली पर
उठाए गए सवाल आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।
अब सभी की नजर सरकार और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया पर टिकी है।