अखिलेश यादव ने सहारनपुर से 2027 का बिगुल फूंका? जयंत चौधरी की रैली से पहले साधे सियासी समीकरण

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर पश्चिमी यूपी में सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहारनपुर पहुंचकर पार्टी संगठन के साथ-साथ अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने का संदेश दिया। उनका यह दौरा राष्ट्रीय लोकदल अध्यक्ष जयंत चौधरी की रामपुर मनिहारान में होने वाली स्वाभिमान रैली से ठीक पहले हुआ, इसलिए इसे चुनावी रणनीति के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।

अखिलेश यादव ने एक दिन में कई नेताओं से की मुलाकात

अखिलेश यादव ने सहारनपुर दौरे के दौरान पार्टी के प्रमुख नेताओं और सामाजिक प्रभाव रखने वाले लोगों से मुलाकात की। उन्होंने सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन और चौधरी इंद्रसैन के आवास पर पहुंचकर बातचीत की। इससे पहले उन्होंने स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित सिद्धि विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की।

इसके बाद अखिलेश यादव पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के आवास पर भी पहुंचे। उनके एक ही दिन में अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं से मिलने को सपा की व्यापक सामाजिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

हिंदू, किसान, पिछड़ा और मुस्लिम समीकरण पर फोकस

सहारनपुर में अखिलेश यादव के कार्यक्रमों में सामाजिक समीकरण खास तौर पर चर्चा में रहे। चौधरी रुद्रसैन और चौधरी इंद्रसैन के यहां पहुंचकर उन्होंने हिंदू, किसान और पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच का संकेत दिया, जबकि हाजी फजलुर्रहमान के आवास पर पहुंचकर मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपने आधार को मजबूत रखने का संदेश दिया।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी राजनीति के लिहाज से अलग-अलग सामाजिक समूहों को साथ रखना सपा के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में अखिलेश यादव का यह दौरा केवल संगठनात्मक बैठक तक सीमित नहीं दिखा, बल्कि इसे 2027 की तैयारियों की शुरुआत के तौर पर भी देखा जा रहा है।

सात विधानसभा सीटों पर टिकट के दावेदार सक्रिय

2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ सहारनपुर की सातों विधानसभा सीटों पर सपा के संभावित प्रत्याशियों की सक्रियता बढ़ गई है। अखिलेश यादव के दौरे के दौरान टिकट के दावेदारों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की।

शहर में कई जगह नेताओं के पोस्टर और होर्डिंग दिखाई दिए। इससे साफ है कि चुनाव से पहले पार्टी के भीतर भी टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।

जयंत चौधरी की रैली से पहले बढ़ी सियासी चर्चा

जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान में प्रस्तावित थी। रालोद की इस रैली को पश्चिमी यूपी में पार्टी के शक्ति प्रदर्शन और 2027 की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में इसके ठीक पहले अखिलेश यादव का सहारनपुर पहुंचना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सपा और रालोद के बीच भविष्य में सीटों के संभावित समीकरण भी पश्चिमी यूपी की राजनीति में अहम हो सकते हैं। ऐसे में दोनों दलों की गतिविधियों पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।

अखिलेश यादव ने रोजगार और किसानों को लेकर किए वादे

अखिलेश यादव ने अपने दौरे के दौरान युवाओं की शिक्षा और रोजगार को लेकर अपनी पार्टी की प्राथमिकताएं बताईं। उन्होंने सरकार बनने पर बिजली सस्ती करने और महंगाई पर नियंत्रण के लिए काम करने की बात कही।

किसानों के मुद्दे पर उन्होंने गन्ना भुगतान का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि सपा की सरकार बनने पर किसानों को गन्ने का भुगतान 24 घंटे के भीतर कराने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने सहारनपुर क्षेत्र में चीनी और एथनॉल से जुड़े कारोबार की संभावनाओं को भी उठाया।

अखिलेश बोले- सरकार बनाने में सहारनपुर की बड़ी भूमिका होगी

अखिलेश यादव ने दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में सहारनपुर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

उन्होंने पार्टी में आने वाले नेताओं और संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी संकेत दिए कि

चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले लोगों पर पार्टी विचार करेगी।

उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए पीडीए को राजनीतिक मुकाबले का

माध्यम बताया। साथ ही 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी

उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए और नकुड़ सीट का उदाहरण दिया।

रैली स्थगित होने पर भी अखिलेश ने दी प्रतिक्रिया

अखिलेश यादव की सहारनपुर में प्रस्तावित पिछली रैली स्थगित हो गई थी। पत्रकारों के

सवाल पर उन्होंने इसके पीछे मौसम विभाग की ओर से बारिश की संभावना को वजह बताया।

उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बाद में चुनाव के दौरान आयोजित किया जाएगा।

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को लगता है कि रैली उनके कारण स्थगित हुई है तो वह

अपनी रैली कर सकता है और दोनों कार्यक्रमों में जुटने वाली भीड़ की तुलना की जा सकती है।

2027 से पहले पश्चिमी यूपी में सियासी हलचल तेज

अखिलेश यादव के सहारनपुर दौरे और जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली ने

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को गर्म कर दिया है। एक ओर सपा अपने

सामाजिक आधार को मजबूत करने और संगठन को सक्रिय करने में जुटी है,

वहीं रालोद भी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश कर रहा है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी में बदलते सामाजिक और

राजनीतिक समीकरण आने वाले दिनों में और स्पष्ट हो सकते हैं।

FAQ

Q1. अखिलेश यादव सहारनपुर क्यों पहुंचे थे?
अखिलेश यादव ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से

मुलाकात के साथ विभिन्न प्रमुख नेताओं से संपर्क किया और

2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन को सक्रिय किया।

Q2. अखिलेश यादव के सहारनपुर दौरे को महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है?
उनका दौरा जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली से ठीक पहले हुआ। साथ ही

उन्होंने अलग-अलग सामाजिक वर्गों से जुड़े नेताओं से मुलाकात की,

इसलिए इसे चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

Q3. सहारनपुर में कितनी विधानसभा सीटें हैं?
सहारनपुर जिले में सात विधानसभा सीटें हैं और 2027 चुनाव को लेकर

इन सीटों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो रही हैं।

Q4. अखिलेश यादव ने किसानों को लेकर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर गन्ना किसानों का भुगतान

24 घंटे के भीतर कराने की दिशा में काम किया जाएगा।

Q5. जयंत चौधरी की रैली कहां आयोजित हो रही है?
जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली सहारनपुर के रामपुर मनिहारान में आयोजित की गई है।

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