उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल: प्रसूता को खाट पर लिटाकर नदी पार कराने का वीडियो बना चर्चा का विषय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, भाजपा शासित राज्यों में विकास की तस्वीर आखिर जमीनी स्तर पर कब दिखाई देगी? उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में आज भी अगर किसी प्रसूता महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए खाट पर लिटाकर नदी पार करानी पड़े, तो यह केवल एक परिवार की मजबूरी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जिस उत्तर प्रदेश ने केंद्र की सत्ता तक पहुंचने में भाजपा को लंबे समय से मजबूत राजनीतिक आधार दिया है, उसी राज्य के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की ऐसी तस्वीर सामने आना बेहद चिंताजनक है। गर्भवती महिलाओं और प्रसूताओं के लिए समय पर एंबुलेंस, पक्की सड़क, पुल और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र जैसी सुविधाएं किसी भी विकसित व्यवस्था की बुनियादी जरूरत होनी चाहिए।

प्रसूता को खाट पर ले जाने की मजबूरी क्यों?

कल्पना कीजिए कि प्रसव के बाद एक महिला को अस्पताल से वापस घर ले जाना है, लेकिन रास्ते में नदी पड़ती है और वहां सुरक्षित पुल या आवागमन की सुविधा नहीं है। ऐसी परिस्थिति में परिवार के लोगों को महिला को खाट पर लिटाकर नदी पार कराने के लिए मजबूर होना पड़े, तो यह व्यवस्था की उस कमी को दिखाता है जिसका सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है।

स्वास्थ्य सुविधा केवल अस्पताल की चारदीवारी तक सीमित नहीं होती। अस्पताल तक पहुंचने के लिए सड़क, पुल, एंबुलेंस और सुरक्षित परिवहन भी उतने ही जरूरी हैं।

विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत का सवाल

सरकारें विकास की बड़ी-बड़ी परियोजनाओं और आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करती हैं। लेकिन ग्रामीण भारत में आज भी कई परिवारों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जरूरत पड़ने पर मरीज को अस्पताल तक सुरक्षित और समय पर कैसे पहुंचाया जाए।

खास तौर पर गर्भवती महिलाओं के मामले में देरी गंभीर समस्या पैदा कर सकती है। प्रसव के आसपास का समय संवेदनशील होता है और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी हो सकती है।

यह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं, बुनियादी ढांचे का मुद्दा भी है

ऐसी घटनाओं को केवल स्वास्थ्य विभाग की समस्या मानना पर्याप्त नहीं होगा। यदि किसी गांव से

अस्पताल जाने के रास्ते में नदी, खराब सड़क या पुल की कमी बाधा बन रही है, तो मामला ग्रामीण सड़क,

परिवहन, सिंचाई, पुल निर्माण और स्थानीय प्रशासन से भी जुड़ जाता है।

सरकार के सामने चुनौती यह है कि विकास का लाभ शहरों तक सीमित न रहे।

गांवों में रहने वाले लोगों को भी ऐसी बुनियादी सुविधाएं मिलें, जिनसे उन्हें बीमारी या प्रसव

जैसी आपात परिस्थितियों में जान जोखिम में डालकर रास्ता पार न करना पड़े।

मातृ स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान जरूरी

किसी भी राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल्यांकन इस बात से भी होना चाहिए कि

गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों तक जरूरी सेवाएं कितनी आसानी से पहुंच रही हैं।

समय पर जांच, संस्थागत प्रसव, एंबुलेंस सुविधा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और

अस्पताल तक सुरक्षित पहुंच—ये सभी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।

यदि किसी प्रसूता को अस्पताल पहुंचने या अस्पताल से घर लौटने के लिए खाट और

नदी का सहारा लेना पड़ रहा है, तो संबंधित प्रशासन को

यह जांचना चाहिए कि वहां स्थायी समाधान क्यों नहीं उपलब्ध कराया गया।

सवाल सरकार से है

इस तरह की घटना सामने आने के बाद कुछ सीधे सवाल उठना स्वाभाविक हैं—

  • संबंधित गांव में सुरक्षित सड़क और पुल की व्यवस्था क्यों नहीं है?
  • क्या वहां एंबुलेंस आसानी से पहुंच सकती है?
  • गर्भवती महिलाओं के लिए आपातकालीन परिवहन की क्या व्यवस्था है?
  • नदी पार करने वाले ग्रामीणों की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
  • क्या प्रशासन ने ऐसे गांवों और टोलों को चिन्हित किया है जहां बारिश के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होती हैं?

इन सवालों का जवाब केवल राजनीतिक बयान से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले स्थायी समाधान से मिलना चाहिए।

विकास का असली पैमाना गांवों की सुविधा है

किसी भी सरकार के लिए विकास का सबसे बड़ा पैमाना बड़े शहरों की चमक नहीं,

बल्कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले आम नागरिक की जिंदगी होनी चाहिए।

अगर किसी महिला को प्रसव के बाद अस्पताल से घर लौटने के लिए नदी पार करनी पड़े,

तो यह तस्वीर सरकार और प्रशासन दोनों के लिए आत्ममंथन का अवसर है।

विकास तब सार्थक होगा, जब गांव की गर्भवती महिला को भी वही सम्मान,

सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा मिले जिसकी उम्मीद शहर की महिला करती है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश में प्रसूता महिला को खाट पर लिटाकर नदी पार कराने की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में

स्वास्थ्य सुविधाओं, सड़क-पुल और आपातकालीन परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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