अंतरराष्ट्रीय स्तर का फिश रिसर्च सेंटर
अंतरराष्ट्रीय स्तर का फिश रिसर्च सेंटर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर को जल्द ही मत्स्य पालन के क्षेत्र में वैश्विक पहचान मिलने वाली है। मत्स्य विभाग उत्तर प्रदेश और एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय NGO की संयुक्त टीम ने आज रामगढ़ ताल के किनारे 100 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय फिश रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर की जगह को पूरी तरह फाइनल कर दिया है।
जगह का चयन पूरा, अगले हफ्ते सीएम करेंगे शिलान्यास की घोषणा
मत्स्य विभाग के निदेशक और NGO की 12 सदस्यीय टीम ने पिछले तीन दिन तक गोरखपुर के अलग-अलग तालाबों और जलाशयों का दौरा किया। अंत में रामगढ़ ताल के उत्तरी-पूर्वी किनारे को सबसे उपयुक्त पाया गया। टीम ने आज दोपहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर औपचारिक रूप से घोषणा की कि “रामगढ़ ताल पर ही बनेगा उत्तर भारत का पहला अंतरराष्ट्रीय स्तर का फिश रिसर्च सेंटर।”
ये सुविधाएं होंगी इस सेंटर में
- 50 करोड़ लीटर क्षमता की आधुनिक हैचरी
- 200 रिसर्च पॉंड (देशी-विदेशी प्रजातियों के लिए अलग-अलग)
- बायोफ्लॉक, RAS और एक्वापोनिक्स रिसर्च यूनिट
- जेनेटिक लैबोरेट्री और कोल्ड चेन स्टोरेज
- 500 किसानों की एक साथ ठहरने की क्षमता वाला ट्रेनिंग हॉस्टल
- विदेशी विशेषज्ञों के लिए गेस्ट हाउस
- इको-टूरिज्म जोन और विजिटर गैलरी
मछुआरों के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी
- हर साल 8-10 करोड़ हाई क्वालिटी फिंगरलिंग्स (मछली के बच्चे) का उत्पादन
- पंगासियस, तिलापिया, अमूर, पाबदा जैसी हाई वैल्यू मछलियों का बीज बहुत सस्ते में
- मुफ्त ट्रेनिंग + सब्सिडी वाली किट
फंडिंग और टाइमलाइन
- कुल लागत: ₹280 करोड़ (पहला फेज)
- फंडिंग: केंद्र सरकार (PMMSY) + यूपी सरकार + नॉर्वे और वियतनाम की अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं
- पहला फेज: 18 महीने में पूरा
- पूरा प्रोजेक्ट: 2028 तक चालू
स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल
रामगढ़ ताल के मछुआरे रामप्रवेश निषाद ने कहा, “हमारे बच्चों को अब पटना-भुवनेश्वर नहीं जाना पड़ेगा। गोरखपुर में ही वर्ल्ड क्लास सेंटर आ रहा है। ये हमारे लिए दिवाली से भी बड़ी खुशी है।”
अगले सप्ताह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर दौरे के दौरान इस प्रोजेक्ट का औपचारिक शिलान्यास या घोषणा होने की पूरी संभावना है।
जारी रहिए हमारे साथ – जैसे ही शिलान्यास की तारीख आएगी, सबसे पहले आपको बताएंगे!
