गोरखपुर में अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह पकड़ा गया, 34 बैंक खातों से जुड़ीं शिकायतें

परिचय

गोरखपुर में साइबर ठगी की रकम को बैंक खातों के माध्यम से निकालकर क्रिप्टोकरेंसी में बदलने वाले कथित अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस की संयुक्त टीम ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, 34 म्यूल बैंक खातों से जुड़े मामलों में 4.09 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं।

मुख्य खबर

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में साइबर अपराध से जुड़ी बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कथित अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में 34 म्यूल बैंक खातों से संबंधित 4 करोड़ 9 लाख 11 हजार 738 रुपये की साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें सामने आई हैं। आरोप है कि गिरोह के सदस्य ठगी से प्राप्त रकम को अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाते थे, फिर एटीएम कार्ड और चेक के जरिए नकदी निकालकर उसे यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलवाते थे।

पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई को साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल थाने की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया।

पुलिस लाइन स्थित व्हाइट हाउस सभागार में अधिकारियों ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि गिरोह के सदस्य ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर हुई साइबर धोखाधड़ी की रकम को आगे भेजने के लिए बैंक खातों का इस्तेमाल करते थे।

पांच आरोपियों की गिरफ्तारी

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महराजगंज जिले के नौतनवा क्षेत्र निवासी नवनीत पाण्डेय उर्फ आदेश पाण्डेय, चंदौली निवासी आदर्श सिंह उर्फ थायनोस, गोरखपुर के राजघाट क्षेत्र निवासी रवि वर्मा, एम्स थाना क्षेत्र के कूड़ाघाट स्थित आवास विकास कॉलोनी निवासी प्रज्ञा रतन और चिलुआताल क्षेत्र के करीमनगर निवासी मकसूद आलम खान के रूप में हुई है।

पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले लोगों को कमीशन देने का लालच देते थे। इसके बाद खाताधारकों की पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक अपने कब्जे में लेकर खातों का कथित रूप से साइबर अपराध की रकम प्राप्त करने में इस्तेमाल किया जाता था।

नकदी निकालकर यूएसडीटी में बदलते थे रकम

पुलिस के मुताबिक, खातों में रकम आने के बाद एटीएम कार्ड और चेक के जरिए नकदी निकाली जाती थी।

निर्धारित कमीशन काटने के बाद शेष धनराशि को विदेशी एजेंटों की मदद से यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर डिजिटल वॉलेट में भेजने का आरोप है।

जांच एजेंसियां इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और विदेशों से जुड़े संपर्कों की भूमिका का पता लगा रही हैं।

यूएसडीटी एक ऐसी क्रिप्टोकरेंसी है, जिसका मूल्य अमेरिकी डॉलर से जुड़ा रखने का प्रयास किया जाता है।

डिजिटल वॉलेट के जरिए रकम स्थानांतरित होने से जांच में धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम गंतव्य का पता लगाना महत्वपूर्ण हो जाता ह

14 राज्यों से जुड़ीं साइबर ठगी की शिकायतें

प्रारंभिक जांच के अनुसार, संबंधित बैंक खातों से जुड़ी शिकायतें उत्तर प्रदेश समेत 14 राज्यों से सामने आई हैं।

इनमें बिहार, गुजरात, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तराखंड शामिल हैं।

हालांकि, पुलिस ने जिन शिकायतों में 4.09 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का उल्लेख किया है,

उसे वास्तविक रूप से बरामद या जब्त की गई रकम नहीं माना जाना चाहिए।

जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाना बाकी है

खातों से कुल कितनी धनराशि का लेन-देन हुआ और उसमें से कितनी रकम आरोपियों तक पहुंची।

13.76 लाख रुपये नकद समेत सामान बरामद

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 लाख 76 हजार 700 रुपये नकद, 22 एटीएम कार्ड, पांच मोबाइल फोन,

एक लैपटॉप, तीन चेकबुक, तीन पासबुक, दो फर्जी मुहर, एक कैश काउंटिंग मशीन, 4,710 रुपये नेपाली मुद्रा,

एक चार पहिया वाहन और एक मोटरसाइकिल बरामद करने की जानकारी दी है।

मामले में चिलुआताल थाने में मुकदमा अपराध संख्या 792/2026 दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 317(4), 317(5), 338 और 336(3) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 66सी और 66डी के तहत कार्रवाई की गई है।

अन्य संदिग्धों की तलाश जारी

पुलिस ने कृष्णा शर्मा, दिव्यांशु शेखर शुक्ल, आदर्श द्विवेदी, विदित और गोविंद वर्मा को मामले में वांछित बताया है।

अधिकारियों के अनुसार, इन लोगों के साथ कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और विदेशी एजेंटों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। फिलहाल, साइबर ठगी की रकम के स्रोत, बैंक खातों के वास्तविक उपयोग और डिजिटल वॉलेट तक पहुंची धनराशि का पता लगाने की प्रक्रिया जारी है।

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे कमीशन के लालच में किसी दूसरे व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक या चेकबुक इस्तेमाल करने के लिए न दें।

ऐसा करने से व्यक्ति अनजाने में भी साइबर अपराध से जुड़े लेन-देन की जांच के दायरे में आ सकता है।

  • Headings
  • गोरखपुर में साइबर ठगी के आरोप में पांच गिरफ्तार
  • 34 म्यूल खातों से 14 राज्यों की शिकायतें
  • 13.76 लाख नकद और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद
  • विदेशी एजेंटों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच

Facts/Details

  • कार्रवाई: साइबर क्राइम सेल और चिलुआताल पुलिस की संयुक्त टीम।
  • गिरफ्तार आरोपी: पांच।
  • शिकायतों में दर्ज कथित धोखाधड़ी: 4,09,11,738 रुपये।
  • संबंधित बैंक खाते: 34 म्यूल खाते।
  • शिकायतों का भौगोलिक दायरा: 14 राज्य।
  • बरामद नकदी: 13,76,700 रुपये।
  • अन्य बरामदगी: 22 एटीएम कार्ड, पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, तीन चेकबुक, तीन पासबुक, दो फर्जी मुहर, कैश काउंटिंग मशीन, नेपाली मुद्रा, एक चार पहिया वाहन और एक मोटरसाइकिल।
  • थाना: चिलुआताल, गोरखपुर।
  • मुकदमा संख्या: 792/2026।
  • जांच की स्थिति: अन्य संदिग्धों, बैंक खातों के लेन-देन और कथित विदेशी संपर्कों की जांच जारी।

ध्यान दें: शिकायतों में बताई गई रकम, बरामद नकदी और वास्तविक वित्तीय नुकसान अलग-अलग आंकड़े हैं।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरोह के सदस्य कथित रूप से म्यूल बैंक खातों के जरिए साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे।

रकम निकालने के बाद उसे यूएसडीटी में बदलकर डिजिटल वॉलेट तक पहुंचाने का आरोप है।

मामले में पांच आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।

आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: गोरखपुर में साइबर ठगी मामले में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?

उत्तर: पुलिस के अनुसार, इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

प्रश्न 2: 4.09 करोड़ रुपये की रकम क्या बरामद हुई है?

उत्तर: नहीं। यह रकम 34 म्यूल बैंक खातों से जुड़े मामलों में सामने आई साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों का कुल आंकड़ा है। पुलिस ने 13,76,700 रुपये नकद बरामद करने की जानकारी दी है।

प्रश्न 3: म्यूल बैंक खाता क्या होता है?

उत्तर: ऐसा बैंक खाता जिसका इस्तेमाल किसी दूसरे व्यक्ति या गिरोह द्वारा अवैध धन प्राप्त करने अथवा आगे भेजने के लिए किया जाता है। खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है।

प्रश्न 4: आरोपी ठगी की रकम कैसे आगे भेजते थे?

उत्तर: पुलिस के मुताबिक, रकम बैंक खातों में मंगाई जाती थी, नकदी निकाली जाती थी और फिर कथित तौर पर यूएसडीटी में बदलकर डिजिटल वॉलेट में भेजी जाती थी।

प्रश्न 5: साइबर ठगी होने पर शिकायत कहां करें?

उत्तर: भारत में साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।

गोरखपुर में हुई यह कार्रवाई साइबर ठगी में बैंक खातों के दुरुपयोग और डिजिटल लेन-देन की जांच को लेकर महत्वपूर्ण है।

पुलिस अब कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, धनराशि के स्रोत और अंतिम गंतव्य का पता लगा रही है।

नागरिकों को अपने बैंकिंग दस्तावेज सुरक्षित रखने चाहिए।