नोएडा/हरिद्वार: करीब दो दशक पहले देश को झकझोर देने वाला निठारी कांड एक बार फिर चर्चा में है। इस मामले में लंबे समय तक आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की 18 सितंबर 2026 को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक उसका शव एक चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की आशंका जताई गई है और पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
कोली का नाम 2006 में नोएडा के निठारी इलाके से महिलाओं और बच्चों के लापता होने तथा एक मकान के पीछे नाले से मानव अवशेष मिलने के बाद सामने आया था। हालांकि, बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उसके खिलाफ चलाए गए मामलों में गंभीर कानूनी सवाल उठे और अंततः उसे सभी निठारी मामलों में बरी कर दिया गया।
आखिर क्या था निठारी कांड?
निठारी नोएडा का एक इलाका है। वर्ष 2005-06 के दौरान यहां से महिलाओं और बच्चों के लापता होने की शिकायतें सामने आने लगी थीं। शुरुआती स्तर पर इन मामलों की जांच को लेकर सवाल उठे।
मामले में बड़ा मोड़ दिसंबर 2006 में आया। सेक्टर-31 स्थित डी-5 मकान के आसपास नाले से मानव अवशेष और कुछ सामान बरामद किए गए। यह मकान कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर का था और सुरेंद्र कोली वहां घरेलू सहायक के तौर पर काम करता था। इसके बाद जांच तेजी से आगे बढ़ी और मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया।
पंढेर की कोठी से कैसे खुला मामला?
जांच के दौरान पुलिस ने मकान और उसके आसपास के क्षेत्र की तलाशी ली। नाले तथा आसपास से मानव अवशेष मिलने के बाद लापता लोगों के मामलों को इस स्थान से जोड़कर देखा गया।
पुलिस ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को गिरफ्तार किया। इसके बाद कई अलग-अलग मामलों में जांच आगे बढ़ी। जनवरी 2007 में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। कुल 19 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से 16 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए।
सुरेंद्र कोली को कैसे मिली थी मौत की सजा?
निठारी से जुड़े मामलों में सुरेंद्र कोली को अलग-अलग अदालतों में दोषी ठहराया गया और कई मामलों में उसे मृत्युदंड सुनाया गया। वर्ष 2009 में रिम्पा हलधर की हत्या से जुड़े मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने कोली और पंढेर को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
इसके बाद कई अन्य मामलों में भी कोली को दोषी ठहराया गया। उसकी फांसी की तारीख भी तय हुई थी, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के दौरान राहत मिलती रही। 2015 में एक मामले में उसकी मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदला गया।
फिर अदालत में मामला क्यों बदल गया?
निठारी मामलों में बाद की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांच, साक्ष्यों और कबूलनामे से जुड़े कई सवाल उठे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में कोली को 12 मामलों में बरी कर दिया। पंढेर को भी उसके खिलाफ चले दो मामलों में राहत मिली।
इन फैसलों को चुनौती दी गई, लेकिन जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अपीलों को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
इसके बाद निठारी से जुड़े अंतिम मामले में भी नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली को बरी कर दिया।
इस तरह वह लंबे समय तक जेल में रहने के बाद कानूनी रूप से इन मामलों में दोषमुक्त हो गया।
करीब 19 साल जेल में रहा सुरेंद्र कोली
निठारी कांड सामने आने के बाद कोली ने लगभग 19 वर्ष जेल में बिताए। अलग-अलग
मुकदमों में दोषसिद्धि और मृत्युदंड के बाद उसकी कानूनी लड़ाई लंबे समय तक चली।
सभी मामलों में राहत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आया। इसके बाद वह
हरिद्वार में रहने लगा और वहां चाय की छोटी दुकान चलाने लगा था।
हरिद्वार में कैसे हुई मौत?
पुलिस के अनुसार, 18 सितंबर को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय की
दुकान के अंदर सुरेंद्र कोली का शव मिला। उसकी उम्र 53 वर्ष बताई गई है।
एक परिचित ने पुलिस को घटना की जानकारी दी। मौके से किसी सुसाइड नोट के
मिलने की जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
फिलहाल मौत की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।
मौत पर उठे सवाल भी सामने आए
कोली की मौत के बाद निठारी कांड के कुछ पीड़ित परिवारों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।
एक पीड़ित के पिता ने उसकी मौत को आत्महत्या मानने पर आपत्ति जताते हुए किसी अन्य संभावना की
जांच की मांग की है। यह उनका आरोप/संदेह है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निठारी कांड की सबसे बड़ी कानूनी सीख क्या रही?
निठारी मामले की लंबी न्यायिक प्रक्रिया में अदालतों ने साक्ष्यों की विश्वसनीयता,
जांच की प्रक्रिया और अभियोजन के आधार पर महत्वपूर्ण सवालों पर विचार किया। यही कारण रहा कि
शुरुआती दोषसिद्धियों के बावजूद बाद में कई मामलों में आरोप टिक नहीं सके।
2025 में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के बाद कोली निठारी से जुड़े
सभी मामलों में बरी हो चुका था। उसकी 2026 में हुई मौत ने एक बार फिर
उस मामले से जुड़े अनुत्तरित सवालों और लंबे न्यायिक सफर को चर्चा में ला दिया है।
निष्कर्ष
2006 में नोएडा के निठारी इलाके में मानव अवशेष मिलने के बाद सामने आया यह मामला देश के
सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में शामिल रहा। सुरेंद्र कोली को लंबे समय तक इस मामले का
प्रमुख आरोपी माना गया और उसे कई मामलों में मौत की सजा भी मिली,
लेकिन बाद की न्यायिक प्रक्रिया में वह सभी निठारी मामलों में बरी हो गया।
अब हरिद्वार में उसकी मौत के बाद एक बार फिर निठारी कांड की पूरी कहानी और उसकी
जांच से जुड़े सवाल चर्चा में हैं। मौत की अंतिम वजह पोस्टमार्टम और
जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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