ADHD Medicine: ब्रिटेन में तीन महीने में करीब 4 लाख मरीजों को दवा, बढ़ते इस्तेमाल के बीच हार्ट हेल्थ पर भी सवाल

ADHD Medicine News: ध्यान की कमी, अत्यधिक सक्रियता और आवेगपूर्ण व्यवहार से जुड़ी न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति ADHD को लेकर दुनिया के कई देशों में जागरूकता तेजी से बढ़ी है। इसी के साथ इसकी पहचान और इलाज के लिए दवाओं का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। ब्रिटेन से सामने आए ताजा आंकड़ों ने इस बढ़ती प्रवृत्ति पर बहस को तेज कर दिया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ब्रिटेन में अप्रैल से जून की तीन महीने की अवधि में करीब 3.95 लाख लोगों को ADHD की दवाएं दी गईं। इनमें 41 हजार से अधिक लोग ऐसे थे, जिन्हें इस अवधि में पहली बार दवा मिली। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक साल के भीतर ADHD में इस्तेमाल होने वाली स्टिमुलेंट दवाओं के उपयोग में करीब 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

दवाओं की बढ़ती मांग ने जहां ADHD की बेहतर पहचान और इलाज तक पहुंच को लेकर उम्मीद जगाई है, वहीं विशेषज्ञ यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या हर बढ़ती संख्या को बीमारी के प्रसार में वृद्धि के रूप में देखना सही होगा। इसके साथ ही ADHD की दवाओं को लेकर हृदय स्वास्थ्य और संभावित दुष्प्रभावों पर भी चर्चा बढ़ी है।

ब्रिटेन में ADHD दवाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा

ब्रिटेन में ADHD के इलाज के लिए दवाओं की मांग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून के बीच लगभग 3.95 लाख मरीजों को ADHD की दवाएं दी गईं। इनमें नए मरीजों की संख्या भी काफी रही।

जनवरी से जून के बीच कुल मिलाकर करीब 24 लाख ADHD प्रिस्क्रिप्शन जारी किए जाने का आंकड़ा सामने आया है। मौजूदा रफ्तार जारी रहने पर यह संख्या पिछले साल के करीब 42 लाख प्रिस्क्रिप्शन के आंकड़े से भी आगे जा सकती है।

दवा के इस्तेमाल में बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें ADHD के बारे में जागरूकता बढ़ना, पहले से मौजूद लेकिन पहचान में न आए मामलों का सामने आना और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बदलाव शामिल हैं।

विशेषज्ञों के बीच एक दूसरी चिंता भी है। उनका कहना है कि समाज में मौजूद तनाव, व्यवहार संबंधी कठिनाइयों या दूसरी परेशानियों को कभी-कभी केवल मेडिकल समस्या के नजरिए से देखने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि बढ़ते सभी ADHD निदान गलत हैं।

ADHD क्या है और इसका इलाज कैसे किया जाता है?

ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसके लक्षण बचपन में शुरू हो सकते हैं और कई लोगों में बड़े होने के बाद भी बने रह सकते हैं। ध्यान बनाए रखने में परेशानी, अत्यधिक बेचैनी और बिना सोचे प्रतिक्रिया देना इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं।

वयस्कों में इसके लक्षण बच्चों से कुछ अलग दिखाई दे सकते हैं। काम को व्यवस्थित करने में कठिनाई, लगातार ध्यान बनाए रखने में परेशानी और रोजमर्रा के काम पूरे करने में दिक्कत भी सामने आ सकती है।

ADHD की जांच केवल किसी एक लक्षण के आधार पर नहीं की जाती। डॉक्टर मरीज के व्यवहार का इतिहास, लक्षणों की अवधि और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हैं। साथ ही चिंता, अवसाद, नींद की समस्या या अन्य स्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकता है।

इलाज व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसमें दवाओं के साथ व्यवहार संबंधी उपचार और अन्य सपोर्ट शामिल हो सकते हैं। CDC के अनुसार, कौन सा उपचार सबसे बेहतर रहेगा, यह व्यक्ति की जरूरत और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच हार्ट हेल्थ पर कितनी चिंता?

ADHD के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं शरीर की उत्तेजना और सक्रियता को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए डॉक्टर इलाज शुरू करने से पहले मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और खासकर हृदय संबंधी जोखिमों को ध्यान में रखते हैं।

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है: ADHD की दवा लेने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से हृदय रोग का खतरा होगा। बड़े स्तर पर किए गए एक मेटा-विश्लेषण में करीब 39 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया था और ADHD दवाओं तथा कुल हृदय संबंधी बीमारियों के बीच सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध नहीं पाया गया।

हालांकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि कुछ विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत हो सकती है। खासकर पहले से हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों और कुछ संभावित हृदय-धड़कन संबंधी समस्याओं के मामले में लंबे समय के प्रभावों को बेहतर समझने के लिए और शोध जरूरी है।

एक अन्य अध्ययन में युवा वयस्कों में लंबे समय तक स्टिमुलेंट दवाओं के

इस्तेमाल और कार्डियोमायोपैथी के बीच संबंध की संभावना सामने आई थी।

लेकिन ऐसे अध्ययनों को देखकर हर व्यक्ति के लिए दवा को

खतरनाक मान लेना सही नहीं होगा। मरीज की व्यक्तिगत स्थिति के

आधार पर डॉक्टर ही जोखिम और लाभ का आकलन कर सकते हैं।

दवा शुरू करने से पहले किन बातों का ध्यान जरूरी?

ADHD की दवा खुद से शुरू करना या खुराक में बदलाव करना उचित नहीं है।

खासतौर पर यदि किसी व्यक्ति को पहले से हृदय संबंधी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, अनियमित धड़कन या परिवार में

गंभीर हृदय रोग का इतिहास रहा है तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

उपचार के दौरान डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट की

निगरानी कर सकते हैं। उपलब्ध शोध में भी इलाज शुरू करने और बाद की

समीक्षा के दौरान हृदय संबंधी जोखिमों पर नजर रखने की जरूरत बताई गई है।

वहीं ADHD की बढ़ती पहचान को केवल नकारात्मक नजरिए से देखना भी सही नहीं है।

बहुत से लोगों को देर से निदान मिलने के कारण लंबे समय तक पढ़ाई, नौकरी,

रिश्तों और रोजमर्रा के काम में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

सही व्यक्ति में सही उपचार से इन समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

इसलिए मौजूदा बहस का केंद्र यह होना चाहिए कि ADHD का सटीक निदान,

जरूरतमंद मरीजों तक उचित इलाज और दवाओं की सुरक्षित निगरानी कैसे सुनिश्चित की जाए।

भारत में ADHD की स्थिति

भारत में भी ADHD को लेकर जागरूकता और पहचान बढ़ रही है। अलग-अलग अध्ययनों में

बच्चों में ADHD की दर अलग-अलग पाई गई है, क्योंकि अध्ययन की पद्धति, क्षेत्र और आबादी के

आधार पर आंकड़े बदल सकते हैं। उपलब्ध भारतीय अध्ययनों में बच्चों के बीच

इसकी व्यापकता के अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं।

ऐसे में किसी एक आंकड़े को पूरे देश की वास्तविक स्थिति मानना उचित नहीं होगा।

भारत में ADHD की जांच और उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ाना,

प्रशिक्षित विशेषज्ञों तक पहुंच आसान करना और दवाओं के इस्तेमाल की उचित निगरानी महत्वपूर्ण है।

FAQ: ADHD Medicine और हार्ट हेल्थ

Q1. ADHD क्या है?
ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें ध्यान बनाए रखने, अत्यधिक सक्रियता और

आवेगों को नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है।

इसके लक्षण बचपन से शुरू हो सकते हैं और वयस्कता तक बने रह सकते हैं।

Q2. क्या ADHD की दवाएं दिल के लिए खतरनाक हैं?
ऐसा कहना सही नहीं है कि ADHD की सभी दवाएं सभी लोगों के लिए हृदय के लिहाज से खतरनाक हैं।

बड़े मेटा-विश्लेषण में कुल हृदय रोग के जोखिम में स्पष्ट सांख्यिकीय बढ़ोतरी नहीं मिली, लेकिन कुछ विशेष मरीजों और

संभावित धड़कन संबंधी जोखिमों पर सावधानी जरूरी बताई गई है।

Q3. ADHD की दवा लेने से पहले क्या जांच जरूरी है?
डॉक्टर आम तौर पर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री और हृदय संबंधी जोखिमों का आकलन करते हैं।

यदि पहले से कोई हृदय समस्या या जोखिम मौजूद हो तो अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है।

Q4. क्या ADHD की दवा खुद से बंद या शुरू करनी चाहिए?
नहीं। दवा की शुरुआत, खुराक में बदलाव या उसे बंद करने का फैसला डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए।

Q5. ब्रिटेन में ADHD दवाओं का इस्तेमाल क्यों चर्चा में है?
क्योंकि वहां ADHD दवाओं के प्रिस्क्रिप्शन में तेज वृद्धि दर्ज हुई है। अप्रैल-जून की

अवधि में करीब 3.95 लाख लोगों को दवा दिए जाने का आंकड़ा सामने आया है,

जिससे निदान और उपचार के बढ़ते स्तर पर चर्चा शुरू हुई है।

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