Delhi Tibetan Protest: BRICS Summit के बीच तिब्बती युवाओं का प्रदर्शन, 50 से अधिक हिरासत में; शी जिनपिंग के दौरे पर जताया विरोध

राजधानी दिल्ली में BRICS Summit 2026 के बीच तिब्बत से जुड़े संगठनों का विरोध प्रदर्शन सामने आया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे और नई दिल्ली में चल रहे BRICS सम्मेलन के बीच तिब्बती युवाओं ने चीन की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान तिब्बत समर्थक नारे लगाए गए और चीन के खिलाफ पोस्टर-बैनर भी दिखाई दिए।

प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। अलग-अलग रिपोर्टों में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है। कुछ जानकारी में 30 से अधिक, जबकि अन्य रिपोर्टों में 50 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब दिल्ली में BRICS Summit के कारण सुरक्षा व्यवस्था पहले से बेहद कड़ी है। भारत मंडपम में कई देशों के शीर्ष नेता मौजूद हैं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए राजधानी पहुंचे हैं।

भारत मंडपम के आसपास तिब्बती युवाओं ने किया प्रदर्शन

तिब्बती यूथ कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने BRICS सम्मेलन के दौरान चीन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने तिब्बत की स्थिति और चीन की नीतियों को लेकर विरोध दर्ज कराया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन की भूमिका पर चर्चा के साथ तिब्बत से जुड़े मुद्दों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने चीन पर तिब्बती संस्कृति और पहचान से जुड़े अधिकारों को प्रभावित करने का आरोप लगाया।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने तिब्बत के समर्थन में झंडे और पोस्टर प्रदर्शित किए। प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के कारण सुरक्षा व्यवस्था में तैनात पुलिसकर्मी तुरंत सक्रिय हुए।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया और कई लोगों को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की।

शी जिनपिंग के भारत दौरे के बीच बढ़ी सुरक्षा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा BRICS Summit के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। कई वर्षों बाद उनके भारत आने को भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में भी अहम माना जा रहा है।

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बातचीत भी हुई है। दोनों देशों के संबंधों में स्थिरता, सीमा पर शांति और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे बातचीत का हिस्सा रहे हैं।

ऐसे संवेदनशील कूटनीतिक माहौल के बीच तिब्बती संगठनों का प्रदर्शन सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन गया। भारत मंडपम और आसपास के क्षेत्रों में पहले से ही सुरक्षा का व्यापक इंतजाम किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधिमंडल शामिल होने के कारण आयोजन स्थल के आसपास प्रदर्शन या किसी अन्य गतिविधि को लेकर पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

तिब्बती संगठनों ने चीन की नीतियों पर उठाए सवाल

तिब्बती यूथ कांग्रेस समेत कई तिब्बत समर्थक संगठन लंबे समय से चीन की नीतियों का विरोध करते रहे हैं। इन संगठनों का आरोप है कि चीन की नीतियों से तिब्बत की पारंपरिक पहचान, संस्कृति और अधिकारों पर असर पड़ रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने चीन की उन नीतियों का भी विरोध किया जिनका संबंध तिब्बती समाज को चीन की मुख्यधारा में शामिल करने से जोड़ा जाता है।

तिब्बती संगठनों की मांग रही है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय तिब्बत की स्थिति पर चर्चा करे और चीन के साथ होने वाली बातचीत में इस मुद्दे को भी महत्व दिया जाए।

हालांकि, तिब्बत को लेकर चीन और तिब्बती संगठनों के दावे एक-दूसरे से काफी अलग हैं। चीन तिब्बत को

अपने देश का हिस्सा मानता है और अपनी नीतियों को राष्ट्रीय एकता तथा विकास से जोड़ता है। दूसरी ओर

तिब्बत समर्थक संगठन चीन पर तिब्बती पहचान और अधिकारों को दबाने का आरोप लगाते हैं।

दिल्ली में पहले भी सामने आए तिब्बत समर्थक प्रदर्शन

शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के आसपास राजधानी में तिब्बत समर्थक गतिविधियां पहले भी देखने को मिली हैं।

प्रदर्शनकारियों ने अलग-अलग स्थानों पर चीन के राष्ट्रपति के दौरे का विरोध किया।

प्रगति मैदान के आसपास भी तिब्बती कार्यकर्ताओं की गतिविधियों के बाद

पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया था। इसके अलावा मजनू का टीला इलाके में भी चीन की

तिब्बत नीति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की जानकारी सामने आई थी।

इन घटनाओं के बाद दिल्ली पुलिस के सामने चुनौती यह है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की

सुरक्षा व्यवस्था को बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित किया जाए।

भारत में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन संवेदनशील और अत्यधिक

सुरक्षित क्षेत्रों में किसी भी प्रदर्शन के लिए स्थानीय प्रशासन के नियमों का पालन करना आवश्यक होता है।

इसी कारण पुलिस ने भारत मंडपम के आसपास प्रदर्शनकारियों को तुरंत हटाया।

हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे

इस घटनाक्रम में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।

कुछ रिपोर्टों में 30 से अधिक लोगों की हिरासत की बात कही गई है, जबकि कई जगह

50 से अधिक तिब्बती कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने की जानकारी दी गई है।

ऐसे में अंतिम संख्या आधिकारिक पुलिस रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी। फिलहाल

इतना स्पष्ट है कि प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया।

BRICS Summit के दौरान इस तरह का विरोध प्रदर्शन भारत-चीन संबंधों के

संवेदनशील पहलू को भी सामने लाता है। एक तरफ दोनों देशों के

शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत और संबंधों को स्थिर करने की कोशिश चल रही है,

वहीं दूसरी तरफ तिब्बती संगठनों की गतिविधियां चीन से जुड़े अलग

राजनीतिक और मानवीय सवालों को सामने रख रही हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की

आगे की कार्रवाई क्या रहती है और क्या इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी किया जाता है।

FAQ: Delhi Tibetan Protest

Q1. दिल्ली में तिब्बती युवाओं ने प्रदर्शन क्यों किया?
तिब्बती कार्यकर्ताओं ने चीन की तिब्बत नीति और शी जिनपिंग के भारत दौरे के विरोध में प्रदर्शन किया।

Q2. प्रदर्शन कहां हुआ?
प्रदर्शन भारत मंडपम और उसके आसपास के क्षेत्र में हुआ, जहां BRICS Summit आयोजित किया जा रहा है।

Q3. कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?
अलग-अलग रिपोर्टों में संख्या अलग है। कुछ जगह 30 से अधिक और कुछ में

50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी है।

Q4. प्रदर्शनकारी किस संगठन से जुड़े थे?
प्रदर्शन में तिब्बती यूथ कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं की भागीदारी बताई गई है।

Q5. क्या शी जिनपिंग के दौरे के दौरान दिल्ली में पहले भी प्रदर्शन हुए?
हां, शी जिनपिंग के दिल्ली दौरे के दौरान राजधानी के अलग-अलग इलाकों में

तिब्बत समर्थक प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं।

Q6. चीन तिब्बत को लेकर क्या कहता है?
चीन तिब्बत को अपने देश का अभिन्न हिस्सा मानता है, जबकि तिब्बत समर्थक संगठन

चीन की नीतियों का विरोध करते हैं और तिब्बती पहचान व अधिकारों का मुद्दा उठाते हैं।

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